अफगान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ी तपिश का प्रभाव भारत-पाकिस्तान सीमा पर साफ दिखने लगा है। पिछले एक साल में भारत-पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी, घुसपैठ से लेकर नकली भारतीय नोटों और मादक पदार्थो की तस्करी की घटनाएं लगभग आधी रह गई हैं। एक साल के भीतर इन घटनाओं में यह सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2010 में पाकिस्तानी सेना की ओर से गोलीबारी की 87 वारदात हुई थीं, जो 2011 में घटकर मात्र 32 रह गई। आतंकी घुसपैठ की घटनाएं भी पिछले साल के 119 के मुकाबले मात्र 65 ही रिकॉर्ड की गई हैं। सीमा पर लगे बाड़ तोड़कर घुसपैठ की कोशिश हर साल की जाती है। 2010 में ऐसी पांच कोशिशें हुई थीं, पर 2011 में केवल दो ही हुर्ई। सीमा पर वारदातों में यह कमी सिर्फ सीमा पर गोलीबारी और आतंकियों की घुसपैठ तक सीमित नहीं है। मादक पदार्थो और नकली भारतीय नोटों की तस्करी की घटनाओं में भी अहम गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल के दौरान जहां बीएसएफ ने 105 किलो हीरोइन जब्त की थी, वहीं 2011 में केवल 59 किलो जब्त हुई है। इसी तरह 2010 में एक करोड़ 38 लाख रुपये के नकली भारतीय नोट पकड़े गए थे, जो 2011 में 25 लाख रुपये से भी कम रह गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारी भारत-पाकिस्तान सीमा पर इन वारदात में जबरदस्त कमी के पीछे पाकिस्तान की अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ी मुश्किलों को मान रहे हैं। अंदरूनी परेशानियों और पाकिस्तानी तालिबानियों से मिल रही चुनौतियों के कारण पाक सेना की भारत विरोधी मुहिम कमजोर पड़ी है। वैसे 2011 के उपलब्ध आंकड़े 31 अक्टूबर तक के हैं, पर अगले दो महीने में इसमें ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है। सर्दी के मौसम में वैसे भी भारत-पाक सीमा पर अपेक्षाकृत शांति रहती है। इस दौरान भारतीय सेना ने भी घुसपैठ की कई कोशिशें नाकाम की हैं।