Friday, December 9, 2011

ऐसे हो रही तटों की हिफाजत !

भारतीय तटरक्षक बल के पास मौजूद पोत, नौका, टोही विमान और हेलीकाप्टरों की आधी संख्या एक्सपायरहो चुकी है। उनका येन-केन प्रकार से मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। बल की यह स्थिति तब है, जब वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए आंतकी हमले के बाद सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए थे। बल के पास इस समय 45 पोत, 27 नौकाएं, 28 डोर्नियर टोही विमान, 20 चीता और चार ध्रुव हेलीकाप्टर हैं। मुंबई हमलों के बाद तटीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के प्रयासों की धीमी गति पर चिंता जाहिर करते हुए संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने कहा कि तटरक्षक बल का ढांचा पर्याप्त रूप से शक्तिशाली नहीं है। समिति के अध्यक्ष सतपाल महराज ने बृहस्पतिवार को संसद में रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया कि मुंबई हमले के बाद तटरक्षक संगठन की क्षमता को उन्नत बनाने की प्रगति काफी धीमी है जबकि इसे काफी तेज गति से होना चाहिए था। तटरक्षक बल में अपेक्षित और मौजूदा बल स्तर में काफी अंतर है। 26/11 हमलों के बाद की अनुमानित आवश्यकता 154 पोत और 93 नौकाओं की थी जबकि तटरक्षक बल के पास वर्तमान में 45 पोत और 27 नौकाएं ही हैं। समिति ने यह भी कहा कि तटरक्षक संगठन को आवश्यक आवंटन उपलब्ध कराया जाए ताकि अपेक्षित और मौजूदा क्षमता के बीच अंतर को पाटा जा सके। समिति ने डॉनियर टोही विमानों और चेतक हेलीकाप्टरों के मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए रक्षा मंत्रालय से जानना चाहा कि क्या उसने इनके बेकार पड़े होने के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि तटरक्षक बल के पोतों समर और संग्राम का सुपर रैपिड गन माउंटिंग पांच साल से काम नहीं कर रहा है और इस बल के विमानों और हेलीकाप्टरों का एक चौथाई बेड़ा भारी मरम्मत के दौर से गुजर रहा है। समिति ने इस पर भी खेद जाहिर किया है कि तटरक्षक बल के पास बड़ी संख्या में उपकरण, हेलिकाप्टर और वायुयान बेकार पड़े हैं और उनकी मरम्मत की प्रक्रि या बहुत ही धीमी है। डॉनियर औरचेतक हेलिकाप्टरों की मौजूदा संख्या क्र मश: 28 और 20 है जिसमें से बेड़े के एक चौथाई हिस्से की प्रमुख रूप से मरम्मत चल रही है। तटीय सुरक्षा के पहले और दूसरे चरण की परियोजनाएं देरी से चल रही हैं। ऐसे में तटवर्ती इलाकों की गश्त और निगरानी बढ़ाने की सख्त जरूरत है। यह खेदजनक ही है कि पिछले चार साल में तटरक्षक बल में महज दो जहाज और छह नौकाएं ही नई आई हैं। बांग्लादेशियों को रोकने के लिए कोलकाता में तटरक्षक मुख्यालय खोलने की सिफारिश बांग्लादेश से शरणार्थियों का तांता रोकने और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के मकसद से समिति ने भारतीय तटरक्षक बल का नया पूर्वोत्तर मुख्यालय खोलने की पुरजोर सिफारिश की है। समिति ने रिपोर्ट में कहा कि समुद्र से जुड़े ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लिए कोलकाता में तटरक्षक बल का क्षेत्रीय मुख्यालय खोलने की सख्त जरूरत है और सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए। समिति ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शरणार्थियों की घुसपैठ हो रही है और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां भी फल फूल रही हैं। इसके अलावा इन दो समुद्र तटीय राज्यों में समुद्री संपदा का खजाना है। उड़ीसा के तटवर्ती इलाके में विलुप्त प्राय कछुओं का बसेरा भी है। इस इलाके में तेल रिसाव का भी जोखिम बना रहता है और दोनों राज्यों के आसपास के समुद्र में दोहन की गतिविधियां भी बड़े पैमाने पर चलती हैं। ऐसे में तटरक्षक बल का क्षेत्रीय मुख्यालय कोलकाता में खोलने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

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