Thursday, April 7, 2011

चीनी हमले का खतरा


चीन क्या फिर हम पर हमले की तैयारी कर रहा है! सीमा पर तैनात सेना के एक जनरल की चेतावनी से तो यही आशंका उभर कर आती है। और अगर ऐसा हुआ तो इस बार चीन अकेला नहीं, उसका पिछलग्गू पाकिस्तान भी उसके साथ होगा। मतलब, भारत को एक ऐसे बड़े युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए जो एक साथ कई मोर्चो पर लड़ा जाएगा और दुनिया की सबसे विशाल सेना हमारे सामने होगी। पाकिस्तान का निशाना होगा कश्मीर जबकि चीन हमारे अरुणाचल और आसपास के इलाकों पर दांत गड़ाने की फिराक में होगा। इस आशंका पर हंसने या कपोलकल्पना समझने की भूल अगर हमने की तो बासठ के चीनी हमले से भी बड़ी कीमत चुकाने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। हमारे वरिष्ठ जनरल ने खुल कर और सार्वजनिक रूप से चेताया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच नियंतण्ररेखा पर चीन ने सैनिक तैनात कर दिये हैं। इस 778 किलोमीटर नियंतण्ररेखा पर पाकिस्तान के साथ चीनी सैनिकों की तैनाती भी हो चुकी है और किसी भी झड़प या युद्ध में हमें एक साथ दोनों देशों की सेना से एक साथ निपटना पड़ेगा। चीन इसके पहले भारत से सटी चार हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा पर सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछा चुका है। वहां बड़ी संख्या में उसके सैनिक मौजूद हैं और वह हमले के लिए खतरनाक मिसाइलों की तैनाती कर चुका है। आपको याद होगा कि बार-बार इन इलाकों में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की खबरें आती रही हैं जो भारतीय सीमा के अंदर घुस कर वहां अपने देश का नाम लिख देते हैं। खतरा अब नजदीक है क्योंकि गिलगित और बालतिस्तान का इलाका चीन को सौंपने के बाद पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से सटी सीमा पर भी चीनी सैनिकों की तैनाती करवा ली है। खतरा कितना गंभीर है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि सीमा विवाद का जिक्र छिड़ने पर चीन अब केवल दो हजार किलोमीटर सीमारेखा के विवाद की बात कहता है जबकि भारत के अनुसार विवादित इलाका साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबा है। ध्यान रहे कि चीन जिस डेढ़ हजार किलोमीटर सीमारेखा का जिक्र करना बंद कर चुका है वह जम्मू-कश्मीर की चीनी इलाकों और तिब्बत से सटी सीमारेखा है। मतलब चीन की नजर में जम्मू-कश्मीर अब भारत का रहा ही नहीं। पिछले दिनों चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की भारत यात्रा के समय ही वहां आधिकारिक रूप से केवल दो हजार किलोमीटर सीमारेखा की बात कही गई थी और हमारे राजदूत ने जब विवादित क्षेत्र साढ़े तीन हजार किलोमीटर बताया था तो उसका विरोध किया गया था। इसके अलावा पिछले ही दिनों चीन की सरकारी पत्रिका में भारत को खुलेआम युद्ध की धमकी दी गई थी और कहा गया था कि अगर अमेरिका के साथ मिल कर उसे घेरने की कोशिश की गई तो चीन लड़ाई छेड़ने से नहीं हिचकेगा। इसे कोरी धमकी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। यह लड़ाई छेड़ने की आरंभिक कूटनीति है। दूसरी तरफ हम इन खतरों को बड़े हल्के रूप में लेते हैं। चीनी घुसपैठ को मामूली बताते हैं, उनके सैनिक हमारी सीमा में घुस कर बन रहे सड़कों का काम रुकवा देते हैं और हम झुक जाते हैं। अब जब चीन की खोटी नीयत हमारे सामने आ चुकी है और हमारे सेना के वरिष्ठ जनरल तक खतरे की बात कहने लगे हैं तब इसे हल्के में लेना गंभीर भूल होगी। चीन बड़ी चालाकी से हमले की रणनीति बना रहा है और हम अपनी ताकत की गफलत में डूबे यह सोच रहे हैं कि अब वह बासठ वाला दुस्साहस नहीं दोहराएगा। समय रहते चेतना होगा वर्ना अनर्थ हो सकता है।

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