Tuesday, April 19, 2011

साइबर सुरक्षा को और दुरुस्त करेगी सरकार


देश के अति संवेदनशील कंप्यूटर सूचना नेटवर्क को सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना हिस्सा बनाने जा रही है। खतरे का स्तर जांचने के लिए सभी महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की कंप्यूटर प्रणालियों का साइबर सुरक्षा ऑडिट शुरू हो गया है। ऑडिटर नतीजों के आधार पर विशेष एजेंसियों को खास नेटवर्को की साइबर सुरक्षा में तैनात किया जाएगा। इतना ही नहीं एक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र भी बनेगा। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के मातहत एक विशेष कार्यदल इस राष्ट्रीय केंद्र की परियोजना तैयार करेगा। साइबर सुरक्षा को लेकर बनी विशेष एजेंसी नेशनल इंफारमेशन बोर्ड ने अपनी ताजा बैठक में साइबर सुरक्षा के खतरे ने निबटने की रणनीति का पहला चरण तय कर लिया है। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र इसका अहम हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, तीनों सेना प्रमुख, आणविक ऊर्जा आयोग के चेयरमैन, कैबिनेट, विदेश, वित्त, रक्षा, दूरसंचार, सूचना तकनीक, अंतरिक्ष विभागों के सचिवों व खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि इस बैठक में मौजूद थे। लगातार हैकिंग व वायरस हमलों के मद्देनजर सरकार सबसे पहले अपने कंप्यूटर तंत्र के सुरक्षा खतरों को जानना चाहती है। पिछले साल ईरान की परमाणु संयंत्र प्रणालियों पर स्टुक्सनेट वायरस के अनोखे हमले के बाद पूरी दुनिया साइबर सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गई है। केंद्र सरकार का सबसे अहम फैसला संवेदनशील सूचना प्रणालियों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना में शामिल करने का है। अर्थात सरकार यह मान रही है कि कंप्यूटर व सूचना तंत्र की असफलता बड़ी आपदा बन सकती है। इसलिए पूरे सरकारी तंत्र में कंप्यूटर प्रणालियों के व्यापक सुरक्षा ऑडिट की शुरुआत हो गई है। इस ऑडिट में सी-डैक त्रिवेंद्रम साइबर फारेंसिक व साइबर चेक टूल्स अहम भूमिका होगी। साइबर अपराधों की पड़ताल में सरकार बड़े पैमाने पर सी-डैक के इस केंद्र की मदद ले रही है। ऑडिट के बाद संवेदनशीलता के हिसाब विभिन्न सूचना प्रणालियों को विशिष्ट एजेंसियों के हवाले किया जाएगा। जैसे कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल की साइबर सुरक्षा को उच्च तकनीक खुफिया संगठन एनटीआरओ को सौंपी गई है। साइबर सुरक्षा की पूरी कवायद को संभालने, खतरे की पहचान करने और तत्काल प्रतिक्रिया करने के लिए राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के नेतृत्व वाला एक कार्यदल इस गठन व संचालन की योजना बनाएगा। इसके साथ ही विभिन्न सूचना तकनीकों उपकरणों के प्रमाणन, समन्वय, भारतीय पुर्जो का इस्तेमाल जैसे मुद्दों के लिए अलग एक और कार्यदल बनाया जाएगा। पिछले साल ईरान के परमाणु संयंत्रों की कंप्यूटर प्रणाली स्टुक्सनेट नाम के अनोखे वायरस का हमला हुआ था जो केवल ईरान के कंप्यूटरों के और खासतौर परमाणु संयंत्रों में लगी सिमेंस की नियंत्रण व आंकड़ा प्रबंधन प्रणालियों पर हमला कर उन्हें तबाह करता था। यह अपनी तरह का पहला मामला था। जिसमें एक देश और पूरे सिस्टम का एक संवेदनशील हिस्सा किसी वायरस का निशाना थे। स्टुक्सनेट ने ईरान के 60 फीसदी कंप्यूटरों को प्रभावित किया था|

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