भारत अपनी नौसेना की ताकत में इजाफा करने के मकसद से अगले 20 साल में 101 नए युद्धपोतों पर कुल 4696 करोड़ डॉलर (करीब दो लाख दस हजार करोड़ रुपये) का निवेश करेगा। एक विशेषज्ञ ने यह दावा किया है। नौसेना में युद्धपोतों और अत्याधुनिक हथियारों के अलावा परमाणु पनडुब्बियों को भी शामिल किया जाएगा। अमेरिका की संस्था एएमआइ इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष और नौसेना के विशेषज्ञ बॉब नुगेंट का अनुमान है कि इतना बड़ा निवेश करने के बाद भारत परिष्कृत विध्वंसक, नई पीढ़ी और नए रडार के पोत, परमाणु पनडुब्बियां और तेज गति वाले जलयान चाहेगा। नुगेंट यहां 18 से 20 मई तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री रक्षा प्रदर्शनी एवं सम्मेलन में शिरकत करने आए हैं। उनका कहना है कि नौसेना में भारत का निवेश चीन से भी दोगुना है। फिलहाल चीन 113 युद्धपोतों के लिए 2399 करोड़ डॉलर (करीब एक लाख करोड़ रुपये) का निवेश कर रहा है।भारतीय नौसेना का जोर परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण पर होगा, जबकि चीन की कोशिश विमान वाहक पोत बनाने की होगी। नुगेंट का कहना है कि भारत तेज गति और उच्च तकनीक वाले युद्धक पोत बनाना चाहता है, ताकि मंुबई जैसे आतंकी हमलों को रोका जा सके। 2008 में आतंकवादियों ने समुद्री मार्ग से ही मंुबई में प्रवेश किया था। भारत की महत्वाकांक्षा छह फ्रांसीसी स्कॉर्पियन पनडुब्बी हासिल करने की भी है, लेकिन आगे चलकर सीमित स्थान के कारण इसे छह से तीन भी किया जा सकता है। नौसेना विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धपोतों पर भारत का निवेश एशिया- प्रशांत क्षेत्र के निवेश का 27.8 फीसदी होगा। युद्धपोतों को लेकर भारत और चीन का निवेश नाटो एवं रूस के निवेश को भी पीछे छोड़ देगा। नौसेना की ताकत में इजाफा करने के मकसद से आने वाले वर्षो में ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, ताइवान, पाकिस्तान और सिंगापुर भी बड़े पैमाने पर निवेश करेंगे।
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