उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विकास के साथ सड़कों पर वाहनों और दुर्घटनाओं की रफ्तार भी बढ़ी है। बिहार में पिछले चार सालों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। दूसरी ओर दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे अपेक्षाकृत विकसित अथवा पश्चिम बंगाल जैसे अवरुद्ध विकास वाले राज्यों में दुर्घटनाओं में कमी आई है। इन चार सालों में पूरे देश में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा चाल लाख 60 हजार 920 से बढ़कर चार लाख 86 हजार 384 पर पहंुच गया, जबकि मरने वालों की संख्या एक लाख पांच हजार 749 से बढ़कर एक लाख 25 हजार 660 हो गई। यह रोचक तथ्य सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सड़क दुर्घनाओं के ट्रेंड पर कराए गए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में सामने आया है। सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में जहां 2006 में 5594 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं 2009 में यह आंकड़ा बढ़कर 10065 पर पहंुच गया। छत्तीसगढ़ में 2006 में 11934 सड़क हादसे हुए थे, जबकि 2009 में यह संख्या 12888 पर पहंुच गई। मध्य प्रदेश का आंकड़ा 38041 से बढ़कर 47267 पर पहंुच गया। वहीं कुछ शहरों तक केंद्रित विकास वाले उत्तर प्रदेश में भी सड़क दुर्घटनाएं खूब बढ़ी हैं। राज्य में वर्ष 2006 में 19489 के मुकाबले 2009 में 28155 सड़क हादसे हुए। इसके विपरीत अपेक्षाकृत विकसित राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं में खासी कमी देखने में कमी आई है। सर्वाधिक विकसित दिल्ली में 2006 में जहां 9299 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं 2009 में 7516 सड़क हादसे हुए। गुजरात में दुर्घटनाओं की संख्या 31547 से घटकर 31034 और महाराष्ट्र में 75413 से घटकर 71996 पर आ गई है। विकास की दौड़ में पिछड़े पश्चिम बंगाल में भी सड़क हादसे न के बराबर बढ़े हैं। यहां 2006 में 11324 सड़क दुर्घटनाएं हुई थी। वर्ष 2009 में यह संख्या घटकर 11134 रह गई। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि जिन राज्यों में नई सड़कों का निर्माण तो हुआ है लेकिन मौजूदा सड़कों का चौड़ीकरण तथा यातायात व्यवस्थाओं में सुधार के इंतजाम नहीं हुए हैं, वहां दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ा है। जिन विकसित राज्यों में अच्छी सड़कें और ज्यादा वाहन हैं और दुर्घटनाएं भी काफी होती हैं, वहां सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्थाओं पर ध्यान दिए जाने से दुर्घटनाओं में कमी आई है। दिल्ली इसका सबसे बढि़या उदाहरण है, जहां राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुए सड़क चौड़ीकरण, बेहतर बस बेड़े और यातायात नियमों का सख्ती से पालन के कारण दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं पश्चिम बंगाल में दुर्घटनाएं घटने का कारण खराब कारोबारी माहौल से यातायात में कमी आना है, न कि यातायात व्यवस्था में सुधार।
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