ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली जम्मू-कश्मीर
में नियंत्रण रेखा पर सुलगते हालात के बीच सेना ने सियाचिन का मोर्चा
छोड़ने और सूबे में सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) को हटाए
जाने पर अपना विरोध
फिर जताया है। सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने कहा
कि राज्य के किसी भी हिस्से से अफस्पा हटाए जाने का फैसला सुरक्षा एजेंसियों
और सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही लिया जाए। सेना
प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकियों के बीच अफस्पा का भय है और इसमें
कोई ढील मुनासिब नहीं है। यह कानून सेना को देशहित के खिलाफ काम करने वालों
पर कार्रवाई का अधिकार देता है। इसके दायरे में किसी भी बदलाव के बारे
में फैसला सभी पक्षों से मुकम्मल राय-मशविरे के बाद ही लिया जाना चाहिए।
उन्होंने सियाचिन को असैन्य क्षेत्र बनाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से
लगातार उठाए जा रहे प्रस्ताव पर भी विरोध जताया। उनका कहना था कि सेना ने
बहुत कुर्बानियों के साथ सियाचिन मोर्चे पर अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत
किया है। ऐसे में इसे खोना मुनासिब नहीं होगा। खास तौर पर तब, जबकि पाकिस्तान
अविश्वसनीय तरीके से बर्ताव कर रहा है। सेनाध्यक्ष ने भरोसा
दिया है कि खजाने की खस्ता सेहत के मद्देनजर रक्षा बजट में
हुई कटौती का सैन्य तैयारियों पर कोई असर नहीं होगा। सरकार ने आश्वासन दिया
है कि नई माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने, तोपखाने के
आधुनिकीकरण और सैन्य
बल बढ़ाने समेत विभिन्न परियोजनाओं पर मुकम्मल मदद मिलेगी। सेना को जरूरत
है अपने अंदरुनी तंत्र को चुस्त करने की, ताकि हम अपनी जरूरतों
की प्राथमिकताएं
तय कर सकें। सरकार ने भरोसा दिया है कि आधुनिकीकरण परियोजनाओं के
फाइनल होते ही सरकार उनके लिए आर्थिक संसाधन मुहैया कराएगी।
Dainik Jagran
Naational Edition Date 15-01-2013Page-3 Shuraksha