Thursday, January 17, 2013

जम्मू-कश्मीर में अफस्पा हटाने के खिलाफ सेना




ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर सुलगते हालात के बीच सेना ने सियाचिन का मोर्चा छोड़ने और सूबे में सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) को हटाए जाने पर अपना विरोध फिर जताया है। सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि राज्य के किसी भी हिस्से से अफस्पा हटाए जाने का फैसला सुरक्षा एजेंसियों और सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही लिया जाए। सेना प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकियों के बीच अफस्पा का भय है और इसमें कोई ढील मुनासिब नहीं है। यह कानून सेना को देशहित के खिलाफ काम करने वालों पर कार्रवाई का अधिकार देता है। इसके दायरे में किसी भी बदलाव के बारे में फैसला सभी पक्षों से मुकम्मल राय-मशविरे के बाद ही लिया जाना चाहिए। उन्होंने सियाचिन को असैन्य क्षेत्र बनाने को लेकर पाकिस्तान की ओर से लगातार उठाए जा रहे प्रस्ताव पर भी विरोध जताया। उनका कहना था कि सेना ने बहुत कुर्बानियों के साथ सियाचिन मोर्चे पर अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत किया है। ऐसे में इसे खोना मुनासिब नहीं होगा। खास तौर पर तब, जबकि पाकिस्तान अविश्वसनीय तरीके से बर्ताव कर रहा है। सेनाध्यक्ष ने भरोसा दिया है कि खजाने की खस्ता सेहत के मद्देनजर रक्षा बजट में हुई कटौती का सैन्य तैयारियों पर कोई असर नहीं होगा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि नई माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने, तोपखाने के आधुनिकीकरण और सैन्य बल बढ़ाने समेत विभिन्न परियोजनाओं पर मुकम्मल मदद मिलेगी। सेना को जरूरत है अपने अंदरुनी तंत्र को चुस्त करने की, ताकि हम अपनी जरूरतों की प्राथमिकताएं तय कर सकें। सरकार ने भरोसा दिया है कि आधुनिकीकरण परियोजनाओं के फाइनल होते ही सरकार उनके लिए आर्थिक संसाधन मुहैया कराएगी।
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करारा जवाब मिलेगा




ठ्ठ प्रणय उपाध्याय, नई दिल्ली पाक सैनिकों के घुसपैठ कर दो भारतीय सैनिकों का गला रेतने की घटना को अक्षम्य अपराध करार देते हुए शीर्ष सेना नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत उकसावे की ऐसी किसी भी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा। सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि जवाबी कार्रवाई कब, कहां और कैसे होगी यह हम तय करेंगे। उन्होंने माना कि पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं और 8 जनवरी की घटना ने भारत के मोर्चे पर कुछ कमजोरियों को उजागर किया है, जिन्हें सुधारा जा रहा है। पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि भारत पर 6 जनवरी को नियंत्रण रेखा पार कर सैनिक कार्रवाई करने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। सेना दिवस की पूर्व संध्या पर मीडिया से रूबरू सेनाध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान ने सोची-समझी रणनीति के साथ 8 जनवरी की कार्रवाई को अंजाम दिया। वहीं, अपनी हरकत को जायज ठहराने के लिए भारत पर झूठे आरोप मढ़े। लांस नायक हेमराज व लांस नायक सुधाकर सिंह की बर्बर हत्या पर पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए सेनाध्यक्ष ने कहा कि भारत को उकसाने का माकूल जवाब मिलेगा। पाकिस्तान ने उड़ी सेक्टर में भारत पर कार्रवाई का आरोप लगाया और फिर दो दिन के भीतर मेंढर क्षेत्र में घुसपैठ कर दो सैनिकों का गला रेत दिया। ऐसे अभियान के लिए कम से कम 15 दिनों की तैयारी जरूरी है। साफ है कि उसने इसके लिए तैयारी की थी। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक पाकिस्तान के एसएसजी कमांडो इसमें शामिल थे। हालांकि उन्होंने इस बात से इन्कार नहीं किया कि इसमें लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी भी शामिल हों। जनरल सिंह ने कहा कि सरकार और सेना के स्तर पर पाकिस्तान के साथ इस मामले को उठाया जा रहा है। सेना के कमांडरों को निर्देश दिया गया है कि उकसाए जाने पर वह तुरंत जवाबी कार्रवाई करें। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थिति से स्थानीय स्तर पर ही निपटा जाएगा। सेना प्रमुख ने जोर दिया कि पाक युद्धविराम तोड़ने के साथ ही सीमा को सुलगाने की भी कोशिश कर रहा है। गत दो दिनों में निगरानी उपकरणों ने पाकिस्तानी सेना की हलचल पकड़ी है जो बताती है कि घुसपैठ की कोशिशों को मदद के साथ बॉर्डर एक्शन टीमें भी सक्रिय हैं। जनरल सिंह के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा स्थित भारतीय चौकियों पर पाकिस्तानी गोलीबारी पर भारत का जवाब नपा-तुला और सटीक है। उन्होंने मामूली झड़प के जंग में बदलने की संभावना से इन्कार किया। सेनाध्यक्ष ने माना कि पाकिस्तान पहले भी भारतीय सैनिकों का गला रेतने जैसी घटनाओं को अंजाम देता रहा है। पहली बार शीर्ष स्तर से हुई इस स्वीकारोक्ति में जनरल सिंह ने माना कि मई, 2000 में एक और जुलाई 2011 में दो सैनिकों के भी गला रेतने की घटनाएं सामने आई थीं। साथ ही सेना प्रमुख ने माना कि 8 जनवरी की पाकिस्तानी हरकत ने हमारी कुछ रणनीतिक गलतियों को भी उजागर किया है, जिन पर बाद में विचार किया जाएगा। अभी जांच से सैन्य बलों के मनोबल पर असर पड़ेगा। (संबंधित खबरें पेज-3 पर)

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ढीले पड़े पाकिस्तान के तेवर





ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली सीमा पार से टकराव की आग भड़काने की कोशिशों पर भारत के सख्त रुख के कारण अब पाकिस्तान के तेवरों में नरमी दिखाई दी है। प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के कठोर संदेशों के साथ वीजा ऑन अराइवल के क्रियान्वयन को टालने, पाक व्यापार मंत्री की दिल्ली यात्रा के प्रति उदासीन रवैया दिखाने और हॉकी खिलाडि़यों को वापस भेजने सहित उठाए गए कदमों के एक दिन बाद ही पाकिस्तान की हेकड़ी निकल गई। सीमा पर लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रही पाकिस्तानी सेना के डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन ने बुधवार को अपने भारतीय समकक्ष को फोन कर बताया है कि नियंत्रण रेखा पर तैनात सभी पाक फौजियों को शांति समझौते का सख्ती से पालन करने व संयम बरतने के आदेश दिए गए हैं। सेना मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार बुधवार सुबह 10:00 बजे दोनों सैन्य अधिकारियों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने तनाव कम करने पर रजामंदी जताई। पाक अधिकारी ने नियंत्रण रेखा पर हुई गोलाबारी में अपने सैनिकों की मौत का मामला भी उठाया। हालांकि भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि गोलाबारी की शुरुआत हमारी ओर से नहीं की गई। जवाबी कार्रवाई भी काफी नियंत्रित तौर पर की गई। भारतीय सैन्य खेमे के मुताबिक पाकिस्तानी रुख का आकलन सीमा पर उसके बर्ताव से किया जाएगा। भारत ने नियंत्रण रेखा पर अपनी निगरानी सख्त कर दी है। थर्मल इमेजर व नाइट विजन उपकरणों से न केवल कड़ी चौकसी बरती जा रही है, बल्कि हालात से निपटने की भी पूरी तैयारी की गई है। भारतीय सीमा में पाक द्वारा लगाए गए लैंडमाइन्स भी बरामद किए गए हैं। इसकी तस्वीरें सुबूत के तौर पर पाक सेना को सौंप दिए गए। पाक के साथ वीजा ऑन अराइवल का क्रियान्यवन टलने के बाद अब समूह वीजा सुविधा भी खटाई में पड़ने के संकेत मिलने लगे हैं। इस बीच, शाम को तीनों सेना प्रमुखों ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के लिए हुई बैठक के दौरान ताजा हालात पर चर्चा की। सेनाध्यक्ष बिक्रम सिंह के मथुरा से लौटने के बाद शुरू हुई यह बैठक करीब तीन घंटे चली। सेना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नियंत्रण रेखा पर दो भारतीय जवानों की नृशंस हत्या की घटना को बर्बरतापूर्ण बताते हुए दो-टूक कहा था कि इसके बाद पाक के साथ संबंध सामान्य नहीं रह सकते। प्रधानमंत्री ने सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह के बयानों का भी समर्थन किया था कि उकसावे की किसी कार्रवाई का भारत माकूल जवाब देगा। इससे पहले तक पाकिस्तानी सेना का रवैया काफी सीनाजोरी का था। पाक अधिकारियों ने न तो 9 जनवरी को हुई बातचीत में किसी तरह की नरमी दिखाई थी और न ही चकना-दा-बाग में नियंत्रण रेखा पर हुई फ्लैग मीटिंग में उसके रवैये में कोई बदलाव आया था।
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