एलसीए व सुखोई 30 एमकेआई के स्क्वाड्रन को किया जाएगा तैनात -पीके बारबोरा वायुसेना के उप प्रमुख
दक्षिण भारत में हमले की आशंका को देखते हुए भारतीय वायु सेना इस क्षेत्र में लड़ाकू विमानों की टुकड़ियां तैनात करने की योजना बना रही है। इससे आतंकियों व समुद्री लुटेरों के खतरों से निपटने में मदद तो मिलेगी ही, समुद्री इलाकों को सुरक्षित भी बनाया जा सकेगा। वायु सेना के वाइस चीफ एयर मार्शल पीके बारबोरा ने मंगलवार को यहां एक कार्यक्र म में कहा, ‘यह हमारी योजना है। हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के पहले दो स्क्वाड्रन को दक्षिण भारत में तैनात किया जाएगा। इसके अलावा सुखोई 30 एमकेआई के स्क्वाड्रन को भी यहां पर तैनात किया जाएगा।’ बारबोरा ने यह बात एक सवाल के जवाब में कही जिसमें पूछा गया था कि क्या वायुसेना समुद्री लुटेरों और लश्कर-ए-तय्यबा के बढ़ते खतरे को देखते हुए दक्षिणी भारत में अपने लड़ाकू विमान तैनात करने की योजना बना रही है? उन्होंने कहा, ‘दक्षिण भारत में वायुसेना की भूमिका बढ़ेगी और अंडमान व निकोबार में भी अपनी भूमिका बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।’ वायुसेना एलसीए विमानों की दो स्क्वाड्रन तमिलनाडु के कोयंबटूर के सुलुर में तैनात करने पर विचार कर रही है। यह पूछे जाने पर कि लश्कर और अन्य आतंकी गुट समुद्री रास्ते का इस्तेमाल भारत के खिलाफ हमले के लिए कर सकते हैं ? इस पर बारबोरा ने कहा, ‘जहां तक उनकी (आतंकियों और लुटेरों) की बात है हम यह नहीं कह सकते हैं कि वे कब, कहां और क्या करेंगे । यदि रक्षा सेवायें उनके ढांचे को खत्म करने के लिए सहयोग मांगती हैं तो हम हमेशा उपस्थित रहेंगे।’ हिंद महासागर में देश के हितों की रक्षा करने के लिए भारतीय वायु सेना दक्षिण भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है।
Wednesday, December 29, 2010
Thursday, December 23, 2010
सीसीटीवी कैमरे रखेंगे सीमा पर नजर
दुश्मन पर पैनी निगाह रखने के लिए अटारी सड़क सीमा पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। यहां ध्वजारोहण समारोह के दौरान लश्कर-ए-तोएबा व अन्य पाकिस्तानी एजेंसियां देश की एकता व अखंडता के लिए कोई समस्या न खड़ी कर पाएं, इसके मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से मात्र 300 मीटर की दूरी पर स्थित सद्भावना द्वार के दोनों तरफ दो कैमरों के साथ-साथ मुख्य प्रवेशद्वार तक 16 कैमरे लगाने का काम शुरू हो चुका है। इसके लिए जीरो लाइन से लेकर मुख्य प्रवेशद्वार तक कई गढ्डे खोदे गए हैं। अंडरग्राउंड वायरिंग की जा रही है। इन सीसीटीवी कैमरों का मुख्य कंट्रोल सीमा शुल्क विभाग के पास होगा, जबकि जीरो लाइन से लेकर 400 मीटर क्षेत्र में स्थापित सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल सीमा सुरक्षा बल के पास रहेगा। इसके अलावा सीमा शुल्क विभाग के आयात व निर्यात गोदामों में लोडिंग व अनलोडिंग होने वाले माल पर भी अब सीसीटीवी कैमरों की नजर होगी। सीमा के इस पार व उस पार आने-जाने वाले ड्राइवरों की गतिविधियों पर भी यह कैमरे नजर रखेंगे। पाकिस्तान से आने वाले माल की स्क्रीनिंग के लिए लगाई गई एक्सरे मशीन पर भी सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। अत्याधुनिक तकनीक से लगाए गए ये कैमरे रिवाल्विंग हैं, जो पूरे क्षेत्र की पल-पल की जानकारी कंट्रोल रूम में देते हैं। सीपीडब्ल्यूडी ने इन कैमरों को लगाने का काम शुरू कर दिया है। संभावना है कि आगामी एक माह के भीतर यह काम पूरा हो जाएगा। इसके लिए एक बड़ा सरवर कस्टम विभाग के कार्यालय में स्थापित किया जा रहा है। सीमा शुल्क विभाग के डिप्टी कमिश्नर आरके दुग्गल ने बताया कि सीमा की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद ध्वजारोहण समारोह व पाकिस्तान से आयात व निर्यात होने वाले सामान पर पैनी निगाह रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे सहायक सिद्ध होंगे।
Wednesday, December 22, 2010
रूस से मिलेंगे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान
भारत और रूस ने अपने संबंधों को नया आयाम देते हुए मंगलवार को रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने संबंधी अहम करार किए। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को डिजाइन और विकसित करने संबंधी 29.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के सौदे पर दस्तखत कर दोनों देशों ने सामरिक रिश्तों को नई दिशा देने की इबारत लिख दी। दोनों देशों के बीच कुल 30 समझौते हुए।
250 लड़ाकू विमान मिलेंगे :
पांचवीं पीढ़ी के करीब 200-250 लड़ाकू विमान भारत को मिलेंगे। दोनों मुल्कों के बीच यह अपने आप में अलग तरह का रक्षा सहयोग समझौता है। सूत्रों के अनुसार, एडवांस लड़ाकू जेट के प्रारंभिक डिजाइन कांट्रैक्ट को दोनों देश साझा तौर पर क्रियान्वित करेंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के्रता और विक्रेता संबंध के दायरे से आगे बढ़ चुका है। 18 माह में एयरक्राफ्ट के डिजाइन को पूरा कर लिया जाएगा। भारतीय वायु सेना 2030 तक ऐसे 250 विमानों को इस्तेमाल करना शुरू कर देगी।
सुरक्षा परिषद का हकदार :
मेदवेदेव ने भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए तगड़ा हकदार तो बताया ही, साथ ही उसे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य बनाए जाने की जरूरत भी बताई। रणनीतिक पार्टनरशिप के दस साल पूरे होने के मौके पर रूसी शीर्षस्थ नेतृत्व से इस तरह की टिप्पणियों को भारतीय खेमा किसी तोहफे से कम नहीं मान रहा है।
एटमी संयंत्र पर बातचीत
परमाणु सहयोग बढ़ाने के मकसद से तमिलनाडु के कुडानकुलम में दो और परमाणु संयंत्र (यूनिट तीन और चार) स्थापित करने पर मेदवेदेव और मनमोहन के बीच सहमति बनी। वहां दो इकाइयां काम शुरू करने के लिए तैयार हैं। इनमें से एक इकाई इस महीने के अंत में या अगले महीने की शुरूआत में काम शुरू करेगी, वहीं दूसरी इकाई का काम अगले साल के अंत में शुरू होगा। यह उन 11 करारों में से एक था जिन पर मेदवेदेव-मनमोहन की संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान हस्ताक्षर किए गए।
Tuesday, December 21, 2010
समुद्री सरहद की चौकसी
भारत की लगभग 7,516 किलोमीटर लंबी समुद्र तटीय सरहद की सुरक्षा की जिम्मेदारी नौसेना पर है। इस सीमा पर आतंकवादी घुसपैठ, हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी का खतरा पहले की तरह अब भी बना हुआ है। इसी के मद्देनजर 26/11 के हमले के बाद समुद्र तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाए जाने के प्रयास जारी हैं।
भारतीय नौसेना को पाकिस्तान एवं चीन से भी चुनौती दिख रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत रूस से गोर्शकोव नामक विमान वाहक युद्धपोत खरीद रहा है। इसमें मिग-29 श्रेणी के विमानों के साथ ही छह के.ए.-2, के.ए.-28 एवं के.ए.-32 हेलीकॉप्टर रखे जा सकेंगे और आधुनिक मिसाइल प्रणाली भी होगी। नौसेना ऐसे 29 विमान और खरीदेगी।
भारतीय नौसेना के बेड़े में इस समय एक विमान वाहक पोत, 20 लैंडिंग शिप, आठ डिस्ट्रायर, 12 फ्रिगेट, 16 पनडुब्बियां व 130 युद्धपोत हैं। नौसेना की योजना 180 युद्धपोत रखने की है, जिसे 2017 तक पूरा करने के प्रयास जारी हैं। आगामी पांच वर्षों में नौसेना के लिए 32 नए युद्धपोत और छह स्कारपियन पनडुब्बियां तैयार हो जाएंगी। इसके अलावा लंबी दूरी के आठ पी-8 आई टोही विमान अमेरिका से खरीदे जा रहे हैं। भारत अपनी नौसेना के लिए पांच अरब डॉलर का सैन्य साज-ओ-सामान खरीदेगा। इसमें चार पी-8 आई पोजीडॉन विमान व चार लैंडिंग पंटून गोदी की खरीद शामिल है। यह सौदा अमेरिका से किया गया है। इसके अतिरिक्त कामोव-31 हेलीकॉप्टरों और नए बहु-उद्देशीय हेलीकॉप्टरों की खरीद की योजना बनाई गई है। विगत जून में दो अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस कंकारसो और कोंडुल को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया है। ये पोत अपने सामान्य कार्य के अलावा तस्करों पर भी नजर रखेंगे। ऐसे 10 युद्धपोत शामिल किए जाने हैं। रडार से ओझल होने में सक्षम तीन युद्धपोत रूस से लिए जाने का फैसला चार वर्ष पूर्व ही किया गया था। इनमें से दो जंगीपोत तेग का जलावतरण हो चुका है। रूस ने इससे पहले तलवार श्रेणी के तीन युद्धपोत निर्मित करके दिए थे।
आधुनिक उपकरणों से लैस पहले स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस शिवालिक को इसी वर्ष नौसेना में शामिल किया गया। इसमें आधुनिकतम कंट्रोल सिस्टम और रडार की पकड़ में आने से बचने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। शिवालिक श्रेणी के दो अन्य युद्धपोत आईएनएस सहयाद्रि व आईएनएस सतपुड़ा को अगले वर्ष नौसेना में शामिल किया जाएगा। देश में ही बने तीन युद्धक जहाजों आईएनएस कबरा, कोसवारी और करूवा का जलावतरण विगत मार्च में हुआ था। इसी वर्ष अप्रैल में आईएनएस चेन्नई नामक विध्वंसक युद्धपोत का जलावतरण हुआ था। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, तारपीडो व रॉकेट लांचर की सुविधा है। गत वर्ष सितंबर में नौसेना को दुश्मन के जहाजों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम आईएनएस कोच्चि प्राप्त हुआ था।
भारत रूस से अकूला-2 श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी ले रहा है। अगले वर्ष मार्च में यह मिलने की उम्मीद है। नौसेना के बेड़े में डीजल व बिजली से चलने वाली नई पीढ़ी की पनडुब्बियों के लिए रक्षा मंत्रालय ने 5,0000 करोड़ रुपये की परियोजना को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अपनी युद्धक क्षमता बढ़ाने केलिए नौसेना पनडुब्बी निरोधक बम खरीदने की भी तैयारी कर रही है। इन्हें विमान से गहरे पानी में छिपी शत्रु पनडुब्बियों पर गिराया जा सकता है।
खुफिया सूचनाएं एकत्र करने के क्षेत्र में कमियों को दूर करने के लिए तारापुर में एक तटीय निगरानी नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इससे समुद्री क्षेत्रों में चौकसी बढ़ जाएगी। समुद्री तटों पर रडार सेंसर लगाए जाने की भी योजना है। इसके लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इन्हें 46 स्थानों पर लाइट हाउस में लगाया जाएगा। इनमें से 36 मुख्य भूमि में, छह लक्षद्वीप में व चार अंडमान निकोबार द्वीप समूह में लगाए जाएंगे। अगले वर्ष मार्च तक तटीय इलाकों की चौकसी के लिए 73 तटीय थाने, 97 चेकपोस्ट, 58 आउटपोस्ट व 30 ऑपरेशनल बैरक तैयार हो जाएंगे। अगले वर्ष 46 संवेदनशील स्थानों पर नया निगरानी तंत्र लगाया जाएगा। निश्चित ही इन सबसे लैस होने के बाद नौसेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी और वह किसी भी चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगी।
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