250 लड़ाकू विमान मिलेंगे :
पांचवीं पीढ़ी के करीब 200-250 लड़ाकू विमान भारत को मिलेंगे। दोनों मुल्कों के बीच यह अपने आप में अलग तरह का रक्षा सहयोग समझौता है। सूत्रों के अनुसार, एडवांस लड़ाकू जेट के प्रारंभिक डिजाइन कांट्रैक्ट को दोनों देश साझा तौर पर क्रियान्वित करेंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा कि अब दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के्रता और विक्रेता संबंध के दायरे से आगे बढ़ चुका है। 18 माह में एयरक्राफ्ट के डिजाइन को पूरा कर लिया जाएगा। भारतीय वायु सेना 2030 तक ऐसे 250 विमानों को इस्तेमाल करना शुरू कर देगी।
सुरक्षा परिषद का हकदार :
मेदवेदेव ने भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए तगड़ा हकदार तो बताया ही, साथ ही उसे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य बनाए जाने की जरूरत भी बताई। रणनीतिक पार्टनरशिप के दस साल पूरे होने के मौके पर रूसी शीर्षस्थ नेतृत्व से इस तरह की टिप्पणियों को भारतीय खेमा किसी तोहफे से कम नहीं मान रहा है।
एटमी संयंत्र पर बातचीत
परमाणु सहयोग बढ़ाने के मकसद से तमिलनाडु के कुडानकुलम में दो और परमाणु संयंत्र (यूनिट तीन और चार) स्थापित करने पर मेदवेदेव और मनमोहन के बीच सहमति बनी। वहां दो इकाइयां काम शुरू करने के लिए तैयार हैं। इनमें से एक इकाई इस महीने के अंत में या अगले महीने की शुरूआत में काम शुरू करेगी, वहीं दूसरी इकाई का काम अगले साल के अंत में शुरू होगा। यह उन 11 करारों में से एक था जिन पर मेदवेदेव-मनमोहन की संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान हस्ताक्षर किए गए।
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