भारत की लगभग 7,516 किलोमीटर लंबी समुद्र तटीय सरहद की सुरक्षा की जिम्मेदारी नौसेना पर है। इस सीमा पर आतंकवादी घुसपैठ, हथियारों व मादक पदार्थों की तस्करी का खतरा पहले की तरह अब भी बना हुआ है। इसी के मद्देनजर 26/11 के हमले के बाद समुद्र तटीय सुरक्षा को मजबूत बनाए जाने के प्रयास जारी हैं।
भारतीय नौसेना को पाकिस्तान एवं चीन से भी चुनौती दिख रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत रूस से गोर्शकोव नामक विमान वाहक युद्धपोत खरीद रहा है। इसमें मिग-29 श्रेणी के विमानों के साथ ही छह के.ए.-2, के.ए.-28 एवं के.ए.-32 हेलीकॉप्टर रखे जा सकेंगे और आधुनिक मिसाइल प्रणाली भी होगी। नौसेना ऐसे 29 विमान और खरीदेगी।
भारतीय नौसेना के बेड़े में इस समय एक विमान वाहक पोत, 20 लैंडिंग शिप, आठ डिस्ट्रायर, 12 फ्रिगेट, 16 पनडुब्बियां व 130 युद्धपोत हैं। नौसेना की योजना 180 युद्धपोत रखने की है, जिसे 2017 तक पूरा करने के प्रयास जारी हैं। आगामी पांच वर्षों में नौसेना के लिए 32 नए युद्धपोत और छह स्कारपियन पनडुब्बियां तैयार हो जाएंगी। इसके अलावा लंबी दूरी के आठ पी-8 आई टोही विमान अमेरिका से खरीदे जा रहे हैं। भारत अपनी नौसेना के लिए पांच अरब डॉलर का सैन्य साज-ओ-सामान खरीदेगा। इसमें चार पी-8 आई पोजीडॉन विमान व चार लैंडिंग पंटून गोदी की खरीद शामिल है। यह सौदा अमेरिका से किया गया है। इसके अतिरिक्त कामोव-31 हेलीकॉप्टरों और नए बहु-उद्देशीय हेलीकॉप्टरों की खरीद की योजना बनाई गई है। विगत जून में दो अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस कंकारसो और कोंडुल को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया है। ये पोत अपने सामान्य कार्य के अलावा तस्करों पर भी नजर रखेंगे। ऐसे 10 युद्धपोत शामिल किए जाने हैं। रडार से ओझल होने में सक्षम तीन युद्धपोत रूस से लिए जाने का फैसला चार वर्ष पूर्व ही किया गया था। इनमें से दो जंगीपोत तेग का जलावतरण हो चुका है। रूस ने इससे पहले तलवार श्रेणी के तीन युद्धपोत निर्मित करके दिए थे।
आधुनिक उपकरणों से लैस पहले स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस शिवालिक को इसी वर्ष नौसेना में शामिल किया गया। इसमें आधुनिकतम कंट्रोल सिस्टम और रडार की पकड़ में आने से बचने की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। शिवालिक श्रेणी के दो अन्य युद्धपोत आईएनएस सहयाद्रि व आईएनएस सतपुड़ा को अगले वर्ष नौसेना में शामिल किया जाएगा। देश में ही बने तीन युद्धक जहाजों आईएनएस कबरा, कोसवारी और करूवा का जलावतरण विगत मार्च में हुआ था। इसी वर्ष अप्रैल में आईएनएस चेन्नई नामक विध्वंसक युद्धपोत का जलावतरण हुआ था। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, तारपीडो व रॉकेट लांचर की सुविधा है। गत वर्ष सितंबर में नौसेना को दुश्मन के जहाजों को नेस्तनाबूद करने में सक्षम आईएनएस कोच्चि प्राप्त हुआ था।
भारत रूस से अकूला-2 श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी ले रहा है। अगले वर्ष मार्च में यह मिलने की उम्मीद है। नौसेना के बेड़े में डीजल व बिजली से चलने वाली नई पीढ़ी की पनडुब्बियों के लिए रक्षा मंत्रालय ने 5,0000 करोड़ रुपये की परियोजना को सैद्धांतिक सहमति दे दी है। अपनी युद्धक क्षमता बढ़ाने केलिए नौसेना पनडुब्बी निरोधक बम खरीदने की भी तैयारी कर रही है। इन्हें विमान से गहरे पानी में छिपी शत्रु पनडुब्बियों पर गिराया जा सकता है।
खुफिया सूचनाएं एकत्र करने के क्षेत्र में कमियों को दूर करने के लिए तारापुर में एक तटीय निगरानी नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। इससे समुद्री क्षेत्रों में चौकसी बढ़ जाएगी। समुद्री तटों पर रडार सेंसर लगाए जाने की भी योजना है। इसके लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इन्हें 46 स्थानों पर लाइट हाउस में लगाया जाएगा। इनमें से 36 मुख्य भूमि में, छह लक्षद्वीप में व चार अंडमान निकोबार द्वीप समूह में लगाए जाएंगे। अगले वर्ष मार्च तक तटीय इलाकों की चौकसी के लिए 73 तटीय थाने, 97 चेकपोस्ट, 58 आउटपोस्ट व 30 ऑपरेशनल बैरक तैयार हो जाएंगे। अगले वर्ष 46 संवेदनशील स्थानों पर नया निगरानी तंत्र लगाया जाएगा। निश्चित ही इन सबसे लैस होने के बाद नौसेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी और वह किसी भी चुनौतियों से निपटने में सक्षम होगी।
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