छह साल पहले, स्क्रैप के साथ राजधानी तक पहुंचे लगभग साढ़े तीन हजार बमों (विस्फोटक पदार्थ) को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के लिए सेना द्वारा ऑपरेशन सहयोग चलाया जा रहा है। अब तक सेना को तीन हजार से अधिक बमों को नष्ट करने में सफलता मिल चुकी है। फरीदाबाद स्थित एयरफोर्स रेंज, तिलपत में इस ऑपरेशन को 11 मई से अंजाम दिया जा रहा है। कर्नल सतीश वारियर की अगुवाई में में चल रहे इस मिशन में सेना के चालीस जवान लगे हुए हैं। सोमवार को दक्षिणी जिला की उप-आयुक्त नंदनी पॉलीवाल ने बम निरस्त क्षेत्र का दौरा करने के बाद मीडिया को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह वर्षो पुराने इस काम का अंजाम दिया जा रहा है जो राजधानी की सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी था। एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि इस काम के लिए जब हमें उप राज्यपाल की तरफ से आदेश आया था। लेकिन दिल्ली पुलिस और बम स्क्वैड टीम ने इंकार करने के बाद हमने सेना से बात की। चूंकि सेना ने इसके पहले पंजाब में वर्ष 2004-05 में पहला ऑपरेशन सहयोग चलाया था। इसलिए उन्होंने इस काम को भी स्वीकार कर लिया। बम को सुरक्षित तरीके से विस्फोट कराने के लिए तीन प्वांइट बनाया गया है। तुगलकाबाद में होल्डिंग पिट्स बनाया गया है, यहां से 18 किलोमीटर दूर फरीदाबाद में डिस्टक्रशन प्वांइट और फाइरिंग प्वाइंट बनाया गया है। डिस्ट्रक्शन प्वांइट से फाइरिंग प्वाइंट की दूरी पांच सौ मीटर रखा गया है। पॉलीवाल ने कहा डिस्ट्रक्शन प्वाइंट पर सुरक्षित तरीके से बम विस्फोट करने के लिए दो किलोमीटर परिधि का यह क्षेत्र चुना गया है। बम विस्फोट के लिए चार मीटर का एक गड्डा किया जाता है, फिर लकड़ी तथा बालू का एक परत तैयार कर फिर बम रखा जाता है और ऊपर से फिर बालू और लकड़ी डाल कर पूरी तरह से पैक किया जाता है। तब फिर बम ब्लास्ट किया जाता है, ताकि पर्यावरण तथा आम लोगों को इससे जरा भी नुकसान न पहुंचे। बता दें कि छह वर्ष पहले अलग अलग कंटेनर के जरिए स्क्रैप के साथ भारी संख्या में आए बम इनलैंड कंटेनर डिपोट, तुगलकाबाद में मिला था, जिसे वहीं जमीन के अंदर दबा कर रखा गया था।
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