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प्रतीक मिश्र/एसएनबी नई दिल्ली। चीन में
सत्ता परिवर्तन
के साथ ही कूटनयिक क्षेत्रों में उम्मीद की जा रही है कि अब भारत के
साथ उसके रिश्ते में गर्मजोशी आएगी। वहां सत्तरूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी में
शी जिनपिंग की अगुवाई में पांचवीं पीढ़ी को नेतृत्व की कमान सौंपे जाने के
बाद माना जा रहा है कि एशिया में इन दोनों देशों के बीच नजदीकियां बढ़ेंगी
क्योंकि नया नेतृत्व कमोवेश उदारवादी रुख वाला है। कूटनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में
भारत की बढ़ती भूमिका को चीन ज्यादा
समय तक नजरंदाज नहीं कर सकता। तेजी से बदल रहे वैश्विक माहौल
में अमेरिका न केवल
लगातार इस क्षेत्र में अपनी दिलचस्पी को बढ़ा रहा है बल्कि तेजी से उभर
रहे भारत के साथ अपनी नजदीकियों को और बढ़ाने की रणनीति की राह पर भी चल
रहा है। अमेरिका की भारत के साथ बढ़ती नजदीकी चीन के लिए एक ऐसी कूटनीतिक
मजबूरी है, जिसके
चलते उसे भारत के साथ नये सिरे से अपने रिश्तों की इबारत लिखनी होगी। माना जा रहा है कि
चीन का नया नेतृत्व इस दिशा में
सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेगा। चीन और भारत दोनों ही दुनिया
की सबसे तेजी
से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं। उनकी यह समानता भी उन्हें और नजदीक आने
में मददगार हो सकती है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों का भी मानना है कि आने
वाले समय में चीन को भारत के साथ अपने नजरिए में बदलाव लाना ही होगा। भारत
को घेरने की बजाय उसके साथ मिलकर चलना न केवल दोनों देशों के हित में होगा
बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए भी यह समय की जरूरत है। हालांकि
पिछले कुछ समय से चीन और भारत के रिश्तों में पर पड़ी बर्फ कुछ पिघली
है लेकिन अब भी दोनों के बीच अविश्वास की जो खाई है उसे पाटना चीन के नये
नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती होगी। बहरहाल,
भारतीय नेतृत्व यह उम्मीद करके चल रहा है कि हू जिंताओ और वेन
जियाबाओ ने जो बुनियाद डाली है उसे चीन
का नया उदारवादी नेतृत्व शी जिनपिंग की अगुवाई में और मजबूत
आधार प्रदान करेगा।
चीन में नया नेतृत्व मार्च में सत्ता संभालेगा। वैसे इस माह भारत व चीन
के बीच उच्चस्तरीय संबंध बहाल होने हैं। यह संबंध सामारिक-आर्थिक वार्ता
के जरिए बहाल होंगे और इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन
की चीन जाने की तैयारी है। मेनन चीन में भारत के राजदूत रह चुके हैं और
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व के बीच उनकी छवि काफी अच्छी है। उनकी
यात्रा से संबंधों में नई गति आ सकती है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक
सिंह अहलुवालिया और उनके चीनी समकक्ष एवं चीन के राष्ट्रीय विकास सुधार
आयोग के प्रमुख झांग पिंग के बीच 26
नवम्बर को वार्ता होगी।
1.
Rashtirya Sahara National Edition 19-11-2012Page
-2 lqj{kk)
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