ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली भारत
और चीन की सीमा पर बीते कुछ समय से आसमान में अज्ञात उड़नतश्तरियों (यूएफओ)
की उड़ान ने सुरक्षा तंत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीन के साथ लगी उत्तरी
सीमा पर तैनात सेना की 14वीं
कोर ने सरकार को इस बाबत रिपोर्ट भेजी है। साथ ही इनकी
पहचान में तकनीकी खुफिया एजेंसियों की क्षमताओं पर सवालिया
निशान लगाए गए हैं। सेना मुख्यालय सूत्रों ने इसकी तस्दीक
करते हुए बताया कि 14वीं
कोर की रिपोर्ट
में कहा गया है कि लद्दाख क्षेत्र में सीमावर्ती इलाके में दिन और रात
के वक्त अज्ञात उड़नतश्तरियों की गतिविधियां देखी गई हैं। रडार व अन्य निगरानी
उपकरण इनकी पहचान का कोई भी निशान पकड़ने में नाकाम रहे। यहां तक कि
किसी धातु के भी निशान रडार पर नहीं मिल सके। इस मामले में राष्ट्रीय तकनीकी
अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ), रक्षा
अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ ) की विशेषज्ञ टीमों से
मदद मांगी गई, लेकिन
वे भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे। सूत्र
बताते हैं कि बीते तीन महीनों के दौरान इस तरह की सौ से ज्यादा घटनाएं
सीमा पर तैनात सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की टुकडि़यों
ने रिपोर्ट की हैं। खास तौर पर पेंगोंग त्सो झील के पास इनकी सक्रियता
अधिक है। बताया जाता है कि चीनी इलाके से उठने के बाद रात के वक्त रोशनी
का गोला काफी ऊंचाई पर हवा में तैरता देखा गया और फिर गायब हो गया। सूत्रों
के अनुसार इनका आकार-प्रकार मानवरहित टोही विमानों (यूएवी) से अलग है।
वैसे भारतीय तैयारियों की टोह में चीनी टोही विमान अक्सर भारतीय सीमा के
करीब आते रहे हैं। इस साल जनवरी से अगस्त के बीच जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर
क्षेत्र में 90 से
अधिक बार यूएवी देखे गए, लेकिन
ये रहस्यमय उड़नखटोले
इनसे अलग हैं। सैन्य
विशेषज्ञों के मुताबिक अज्ञात उड़नखटोलों का रडार की पकड़ में न आना न केवल
चिंता की बात है, बल्कि
तकनीकी कमजोरियों का भी निशान है। इसे चीन की ओर
से भारत की सैन्य तैयारियों की टोह लेने के लिए भेजे गए हवाई मिशन के तौर
पर भी देखा जा रहा है। वैसे यह पहला मौका नहीं जब इस इलाके में उड़नतश्तरियां
देखे जाने की बात सामने आई है। 2010 में इसी तरह की खबरों पर वायुसेना
ने अपनी जांच में भारतीय आसमान में ऐसी किसी भी उड़ने वाली वस्तु की
मौजूदगी से इन्कार करते हुए उन्हें चीनी लालटेन करार दिया था। सेना ने 2003 में
भी इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट सेना मुख्यालय को भेजी थी, लेकिन
उसे खारिज कर दिया गया था।
Dainik Jagran National Edition -6-11-2012 Shuraksha Page-1
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