Monday, March 28, 2011
राज्यों में सीआरपीएफ की तैनाती सीमित करेगा केंद्र
हर छोटी-बड़ी बात पर राज्यों की ओर से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की मांग पर रोक लगाने के लिए केंद्र बल की नियुक्ति को सीमित करने जा रहा है। केंद्र ने सीआरपीएफ की तैनाती को युक्तिसंगत और सीमित करने का फैसला किया है ताकि बल के जवानों को अनिवार्य प्रशिक्षण और आराम मिल सके। इस फैसले से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ओर से सीआरपीएफ की टुकडि़यों की मनमानी मांग को पूरा करना कठिन हो जाएगा। इस अर्द्धसैनिक बल की बटालियन भेजने से संबंधित सभी अनुरोधों का केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ मुख्यालय तार्किक ढंग से मूल्यांकन करेंगे और फिर बटालियन को भेजने के बारे में निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों केअनुसार हाल ही में करीब दस मौकों पर सीआरपीएफ टुकडि़यों की वांछित संख्या पर तार्किक ढंग से विचार कर उसमें 30 फीसदी तक कटौती की गई। सूत्रों के मुताबिक सीआरपीएफ की 180 कंपनियों को अनिवार्य प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। जब तक उनका प्रशिक्षण पूरा नहीं हो जाता, उन्हें आतंरिक सुरक्षा ड्यूटी पर नहीं भेजा जाएगा। बल के सूत्रों ने कहा, अब गृह मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रशिक्षण में हिस्सा ले रही कंपनियों को तब तक न छुआ जाए जब तक वे अपना प्रशिक्षण पूरा नहीं कर लेतीं। कंपनियों का प्रशिक्षण और जवानों का आराम बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि बल को अकसर कानून व्यवस्था से संबंधित ड्यूटी पर तैनात कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए। केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने पिछले साल सीआरपीएफ के कार्यक्रम में कहा था कि रिजर्व शब्द इस बल के लिए अब सच नहीं रहा क्योंकि यह महज एक छोटे से नोटिस पर एक तैनाती से दूसरी तैनाती पर जाता रहता है। सीआरपीएफ के चार्टर के अनुसार इस बल का गठन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने तथा तथा उग्रवाद पर काबू पाने की मूलभूत भूमिका के साथ किया गया था। बल करीब एक दशक से नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल रहा है। जहां बीएसएफ, आइटीबीपी एवं एसएसबी जैसे अन्य अर्द्धसैनिक बलों की अपनी एक खास भूमिका है। सीआरपीएफ ही एकमात्र ऐसा बल बचा है जिसे कानून व्यवस्था संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए बुलाया जाता है। प्रशिक्षण और आराम की कमी के चलते बल के जवानों में थकान और अरुचि पैदा हो जाती है। गृहमंत्री ने पिछले साल कहा था कि हर बटालियन में एक कंपनी को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण पर जाना है और इसे नियम के रूप में लिया जाए तथा बल की तैनाती तार्किक एवं सीमित की जाए। सीआरपीएफ अपने करीब 210 संचालनात्मक बटालियन (2.10 लाख जवान) के साथ तेजी से अपने प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचा का विस्तार कर रहा है ताकि पुराने एवं नए जवानों के प्रशिक्षण का काम पूरा हो। सूत्रों के अनुसार दस बटालियन विशिष्ट कानून व्यवस्था इकाइयों के रूप में चिह्नित की गई हैं। वाम उग्रवाद से निबटने के लिए अलग विशिष्ट बटालियन के गठन का प्रस्ताव है|
Saturday, March 26, 2011
अवैध हैं सेना के सभी गोल्फ कोर्स
आदर्श सोसाइटी और सुखना जैसे जमीन घोटालों के दाग छुड़ाने की कोशिश कर रहे रक्षा मंत्रालय के भूमि प्रबंधन पर सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने भी जमकर खिंचाई की है। सीएजी ने रक्षा मंत्रालय की नाक के नीचे सैन्य जमीन पर गलत तरीके से चल रहे गोल्फ कोर्स और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए हैं। साथ ही सैन्य जमीन पर बने सभी 97 गोल्फ मैदानों को अवैध करार देते हुए सीएजी ने इस संबंध में नियम न बनाने को लेकर सरकार को फटकार लगाई है। सीएजी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि सरकारी जमीन के सबसे बड़े कब्जाधारी रक्षा मंत्रालय के पास भूमि-रिकार्ड और उनके वर्गीकरण की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। साथ ही ऑडिट आकलन में सैन्य जमीनों के व्यावसायिक उपयोग पर भी हैरत जताई गई है। रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि पिछले कई ऑडिट आकलन में सवाल उठाए जाने के बावजूद सैन्य जमीनों पर शॉपिंग कांप्लेक्स निर्माण को मंजूरी देने और उनसे हासिल धन को रेजीमेंट फंड के मद में डालने की प्रक्रिया जारी है। वहीं सीएजी रिपोर्ट में निजी संस्था के तौर पर पंजीकृत आर्मी जोन गोल्फ के परचम तले सेना के सभी गोल्फ मैदानों में विदेशियों तक को इजाजत दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट कहती है कि 8000 एकड़ से अधिक भूमि पर बने गोल्फ मैदानों के सहारे मोटा राजस्व कमाने और सरकारी संपत्ति व साधनों के उपयोग के बदले राजकीय कोष में किसी तरह का किराया न दिए जाना सवाल खड़े करता है। सीएजी ने कहा है गोल्फ को सैन्य गतिविधि नहीं माना जा सकता और इसके लिए किसी भी सूरत में ए-1 श्रेणी की सैन्य जमीन के इस्तेमाल को स्वीकार नहीं किया जा सकता। सैन्य जमीन के इस्तेमाल को लेकर आई सीएजी की 35वीं रिपोर्ट में पट्टे की भूमि पर महज 58.92 रुपये सालाना किराये पर बने आगरा क्लब में अवैध निर्माण और इसकी भरपाई पर बकाया डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि पर भी लाल घेरा बनाया है। इसी तरह लखनऊ के एमबी क्लब पर बकाया धन को लेकर भी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। सीएजी ने रक्षा मंत्रालय के भारी मात्रा में सरप्लस जमीन के इस्तेमाल पर कोई फैसला न करने पर भी सरकार को फटकारा है। हालांकि बीते दिनों मुंबई में आदर्श सोसाइटी और कांदिवली इलाके में जमीन घोटालों के बाद रक्षा मंत्रालय ने अपने भूमि प्रबंधन नियमों के तार कसने की कवायद शुरू की है|
Wednesday, March 23, 2011
Tuesday, March 15, 2011
चीन को पछाड़ हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार बना भारत
जरूरत के 70 फीसद हथियार आयात करता है भारत दुनिया में शस्त्रों के दस बड़े आयातकों में चार एशिया के
वर्ष 2011-12 के लिए भारत के रक्षा बजट में हुई 40% वृद्धि से 1500 अरब रुपए पहुंचा आगे भी हथियारों का सबसे बड़ा आयातक बना रहेगा भारत रिपोर्ट
युद्धक साजो-सामान का आयात करने वाले देशों में चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है। चीन दूसरे नंबर पर और उसके बाद दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान का नंबर है। स्वीडन की स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, ‘अंतरराष्ट्रीय हथियार हस्तांतरण विषयक शोध के नवीन आंकड़ों के हिसाब से भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है।’ इंस्टीट्यूट की रपट के अनुसार वर्ष 2006 से 1010 के दौरान दुनिया के कुल हथियारों के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी नौ फीसद रही। भारत को करीब 82 फीसद हथियारों का निर्यात रूस से किया गया। रपट के अनुसार वर्ष 2006-10 की अवधि में परंपरागत हथियारों के चार बड़े खरीदार एशिया महाद्वीप में ही थे। इससे पहले 1992 में भारत दुनियाभर में सबसे अधिक हथियार खरीदने वाला देश बना था। एशियाई क्षेत्र में हथियारों के चार सबसे बड़े खरीदारों में सकल खरीद में नौ फीसद खरीदारी के साथ भारत पहले स्थान पर, छह फीसद के साथ चीन दूसरे स्थान पर, करीब छह फीसद के साथ ही दक्षिण कोरिया तीसरे पर और पांच फीसद के साथ पाकिस्तान चौथे स्थान पर रहा। रपट के अनुसार ये सभी परंपरागत हथियारों का आयात कर रहे हैं, और आगे भी करते रहेंगे। इनमें विशेष रूप से छोटे लड़ाकू विमान और समुद्री रक्षा पण्राली शामिल हैं। पिछले पांच साल में देश की हथियार खरीद मात्रा में 21 फीसद का इजाफा हुआ है, जबकि एयरक्राफ्ट की खरीद 71 फीसद बढ़ी। पाकिस्तान के मामले में इन पांच सालों के दौरान उसके हथियार आयात में 128 फीसद की बढ़ोतरी हुई। हथियारों की खरीद-फरोख्त पर नजर रखने वाली संस्था के सीमोन वेजमैन ने कहा ‘भारत ने अब तक जो खरीद आर्डर दिए हैं हमें पता है कि आने वाले सालों में भी भारत युद्धक सामग्री का बड़ा आयातक बना रहेगा।’
वर्ष 2011-12 के लिए भारत का रक्षा बजट 1500 अरब रुपए तय किया गया है। इसमें दो वर्ष पहले की तुलना में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। भारत अपनी जरूरतों के करीब 70 प्रतिशत हथियारों का आयात करता है। वेजेमैन ने कहा चीन अपनी घरेलू हथियार निर्माण फैक्टरियों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। भारत इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर पाया है। अभी भी भारत में 126 लड़ाकू जेट विमान, 200 हेलीकाप्टर, समुद्री पोत तथा एक पनडुब्बी खरीदने का प्रस्ताव भी है।
Sunday, March 13, 2011
क्या भारत के परमाणु संयंत्र सुरक्षित हैं?
जापान में शुक्रवार को आई सुनामी के बाद परमाणु आपातकाल घोषित कर दिया गया। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि देश में भूकंप की स्थिति में क्या हमारे परमाणु संयंत्र सुरक्षित हैं? देश में 20 परमाणु संयंत्र संचालित हैं। जिनकी ऊर्जा क्षमता 4780 मेगावॉट है। मुंबई में परमाणु ऊर्जा विभाग के सार्वजनिक जागरुकता डिवीजन के एस.के. मल्होत्रा का कहना है, दुनिया भर में परमाणु संयंत्र प्राकृतिक आपदाओं, जलस्तर बढ़ने और हवा की गति को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा सुविधाओं के साथ डिजाइन किए गए हैं। क्या प्राकृतिक आपदा आने पर संयंत्र खुद ब खुद सुरक्षित तरीके से बंद होकर परमाणु संयंत्र को ठंडा करने में सक्षम हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, भारत समेत दुनिया के सभी आधुनिक परमाणु संयंत्र इस प्रकार बनाए गए है कि संयंत्र के अंदर मौजूद यूरेनियम और अन्य रेडियोएक्टिव सामग्री बाहर न आ सके। मल्होत्रा ने बताया अगर मिसाइल से भी हमला किया जाए, तो भी रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। आपदा के शांत होने के बाद परमाणु संयंत्र को वैज्ञानिक नुकसान का जायजा लेने के बाद दोबारा शुरू कर सकते हैं। उन्होंने तमिलनाडु में कलपक्कम परमाणु ऊर्जा स्टेशन का उदाहरण दिया कि वर्ष 2004 में आई सुनामी से इस क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा था। उस दौरानऊर्जा संयंत्र ऑटोमेटिक तरीके से बंद हो गए थे। स्थिति का आकलन करने के एक हफ्ते बाद संयंत्र और उसकी इकाइयों ने दोबारा काम करना शुरू कर दिया था। हालांकि स्वयंसेवी संस्था ग्रीनपीस की करुणा रैना उनसे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है, हमें यह बात समझ लेना चाहिए कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जोखिम है। रिसाव होने पर इसका मानव स्वास्थ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
Saturday, March 12, 2011
भारत ने दो मिसाइलें दागकर दिखाई ताकत
भारत ने शुक्रवार को अपनी मिसाइल क्षमता को एक बार फिर परखा। इसके लिए उसने एक ही दिन में दो अलग-अलग तरह की बैलेस्टिक मिसाइलों धनुष और पृथ्वी-टू का सफल परीक्षण किया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी सतह से सतह पर कम दूरी तक मारक क्षमता वाली मिसाइल हत्फ-2 या अब्दाली बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। धनुष मिसाइल ने हवा में लक्ष्य पर निशाना साधा जबकि पृथ्वी-टू ने सतह से सतह पर मार किया। दोनों मिसाइलें 350 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं और पूरी तरह भारत में विकसित की गई हैं। इन्हें परमाणु हथियार के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। धनुष को बंगाल की खाड़ी में नौसेना के जहाज आइएनएस सुवर्णा से हवा में लक्ष्य साधने के लिए छोड़ा गया। इसके एक घंटे के अंदर सतह से सतह पर मार करने वाली पृथ्वी-टू मिसाइल का परीक्षण हुआ। यह परीक्षण यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आइटीआर) के प्रक्षेपण परिसर-3 से समुद्र में किया गया। आइटीआर के निदेशक एसपी दास ने कहा कि धनुष ने बिल्कुल सटीक निशाना साधा। उन्होंने आगे कहा, सभी रडार और तट पर लगे हुए उपकरणों ने इन मिसाइलों के काम तय मानकों पर परखा। दोनों मिसाइलें पहले ही सेना में शामिल की जा चुकी हैं। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इन सफल परीक्षणों के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सभी वैज्ञानिकों, तकनीशियनों और सैन्य बलों को बधाई दी है। इन दोनों मिसाइलों का 6 मार्च 2011 को बैलिस्टिक हवाई रक्षा मिसाइल प्रणाली के सफल प्रदर्शन के पांच दिनों के भीतर परीक्षण किया गया है। वहीं, पाकिस्तान ने कहा है कि 180 किमी तक मार कर सकने वाली हत्फ मिसाइल सभी तरह के परमाणु और पारंपरिक हथियारों को ले जाने में सक्षम हैं। यह परीक्षण किसी गुप्त स्थान पर किया गया|
Monday, March 7, 2011
यात्री विमानों में लगेंगे गुप्त कैमरे
देश के विमानन क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यात्री विमानों में जल्द ही गुप्त कैमरे स्थापित किए जा सकते हैं ताकि उड़ान पर होने वाली हर घटना को कैद किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक इस तरह के कैमरे स्थापित करने की योजना नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो की ओर से सुझाए गए कई उपायों में से एक है। जरूरी कदम उठाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय जल्द ही सभी विमानन कंपनियों को एक परामर्श जारी कर सकता है। गुप्त कैमरों का इस्तेमाल विमान के अंदर होने वाली किसी भी घटना की वीडियोग्राफी के लिए हो सकेगा। इसके जरिये विमान का अपहरण करने या खलल पैदा कर रहे किसी यात्री के कृत्य की तस्वीरों को कैद किया जा सकेगा। पिछले महीने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपहरण रोधी अभ्यास होने के बाद यह सिफारिश की गई। सूत्रों के अनुसार भारत में उड्डयन सुरक्षा क्षेत्र के शीर्ष निकाय नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो ने यह भी सिफारिश की थी कि सुरक्षा संबंधी आपात स्थिति के बाद जिस स्थान पर विमान को ले जाया जाता है, उसे दिल्ली हवाई अड्डे के किसी एकदम अलग जगह पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। वर्तमान में यह क्षेत्र भारतीय वायुसेना के तकनीकी क्षेत्र में वीआईपी विमान हैंगर के निकट स्थित है। सिफारिशों के तहत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने दिल्ली हवाई अड्डे में प्रवेश करने वाले वाहनों का औचक निरीक्षण शुरू कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में हवाई अड्डे की सुरक्षा की समीक्षा करने के बाद यह कदम उठाया गया है। मंत्रालय ने टर्मिनल क्षेत्र में प्रवेश से पहले रिमोट बैगेज स्कीनिंग या स्क्रीनिंग लगेज व्यवस्था शुरू करने की व्यवहार्यता का भी अध्ययन किया था। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू और हैदराबाद सहित सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा तथा अपहरण रोधी अभ्यास प्रक्रि या की जा रही है। ब्यूरो ने हवाई अड्डा संचालकों से तुरंत सीसीटीवी स्थापित करने और पूरे हवाई अड्डा क्षेत्र की हिफाजत के लिए अन्य उपाय करने को भी कहा है। विमानन सुरक्षा के ताजा आदेशों के तहत हवाई अड्डा प्रशासन से कहा गया है कि पार्किंग क्षेत्र सहित सभी तरह की आवाजाही पर नजर रखी जाए।
Sunday, March 6, 2011
अब छू भी नहीं पाएंगी दुश्मन की मिसाइलें
भारत ने रविवार को मिसाइल हमले को नाकाम करने की प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए उड़ीसा के एक सैन्य ठिकाने से बेलिस्टिक इंटरसेप्टर मिसाइल का सफल परीक्षण किया। भुवनेश्वर से 170 किलोमीटर दूर भद्रक जिले में धमरा के करीब व्हीलर द्वीप से पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित इंटरसेप्टर मिसाइल को सुबह 9:37 बजे प्रक्षेपित किया गया। इस इंटरसेप्टर मिसाइल के जरिए दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट किया जा सकेगा। इंटरसेप्टर मिसाइल ने बालासोर जिले के चांदीपुर रेंज से दागी गई पृथ्वी 2 के मिसाइल के संस्करण को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। इंटरसेप्टर मिसाइल लक्षित मिसाइल से पांच मिनट बाद प्रक्षेपित की गई। चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (आइटीआर) के निदेशक एस. पी. दाश ने कहा, यह शानदार अभियान था। इसने लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षण पर विभिन्न राडार और सेंसरों से नजर रखी गई। सभी हथियार उपकरण, संचार उपकरण और रडार संतोषजनक तरीके से काम कर रहे थे। यह देश के बैलिस्टक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के इतिहास की प्रमुख उपलब्धि है। रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने रविवार को इस परीक्षण अभियान में शामिल रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई दी। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस इंटरसेप्टर मिसाइल ने करीब 16 किलोमीटर की ऊंचाई पर लक्ष्य को निशाना बनाया। कई वैज्ञानिक और रक्षा अधिकारी परीक्षण के प्रत्यक्षदर्शी रहे। रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार वी.के. सारस्वत परीक्षण अभियान के दौरान मौजूद रहे और उन्होंने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को बधाई दी|
Friday, March 4, 2011
नाकाफी है बढ़ा हुआ रक्षा बजट
इस बार के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 1,64,415 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा उपकरणों, हथियारों व साज-ओ-सामान की खरीदारी को देखते हुए यह बजट पर्याप्त नहीं है। अब चीन और पाकिस्तान, दोनों मोरचों पर रक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं और इसके मद्देनजर रक्षा आधुनिकीकरण का खर्च तो साल के अंत में ही सामने आएगा।
पिछले बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 1,47,344 करोड़ रुपये आबंटित किए गए थे, लेकिन विगत दिसंबर में रक्षा मंत्रालय ने पूंजी व राजस्व, दोनों ही मदों में बढ़ी हुई संशोधित राशि की मांग की थी। गौरतलब है कि 1971 की लड़ाई के बाद रक्षा बजट और उसमें पूंजीगत खर्च अनुमान से अधिक हो गया था, क्योंकि उस समय देश को रक्षा उपकरणों की भारी खरीदारी करनी पड़ी थी। जबकि बीते कुछ वर्षों में रक्षा मंत्रालय पूरी आबंटित धनराशि खर्च नहीं कर सका है। हालांकि भविष्य में ऐसा होने की उम्मीद नहीं है।
इस बार का रक्षा बजट देश के कुल बजट का सातवां हिस्सा है। पिछले रक्षा बजट के मुकाबले इस बार 11.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन जिस तरह विगत दिसंबर में बजट आबंटन में कमी महसूस हुई, उसे देखते हुए यह बढ़ोतरी कम ही है। कुल 1,64,415 करोड़ रुपयों में पूंजीगत खर्च 69,199 करोड़ रुपये एवं रक्षा मंत्रालय व सशस्त्र बलों के रोजमर्रा के खर्च तथा वेतन आदि के लिए 95,216 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, योजनागत व्यय में थल सेना को 64,251 करोड़, वायु सेना को 15,927 करोड़, नौसेना के लिए 10,589 करोड़ तथा रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के लिए 5,624 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी तरह पूंजीगत व्यय 69,199 करोड़ रुपयों में से वायु सेना की खरीदारी के लिए 30,699 करोड़, थल सेना की खरीदारी हेतु 18,988 करोड़ रुपये, नौसेना की खरीदारी हेतु 13,728 करोड़ रुपये तथा शेष राशि अन्य योजनाओं हेतु है।
वायु सेना का पूंजीगत व्यय तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। पिछले वर्ष खरीद मद में उसे 23,446 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे इस साल बढ़ाकर 30,699 करोड़ रुपये किया गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी भी अधिक नहीं कही जा सकती, क्योंकि इस वर्ष 126 बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीद सौदे को अंतिम रूप दिया जाना है। पाक सीमा, चीन सीमा व समुद्री सीमा की सुरक्षा हेतु कुछ नई स्क्वाड्रनों की जरूरत है। इसके लिए सुखोई-30 एमकेआई विमानों की खरीद की जानी है। वायु सेना को बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टरों की भी जरूरत है। तेजस विमानों में लगने वाले इंजन भी अमेरिकी कंपनी जीई से लेने हैं। फिर कुछ विमानों की आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज की जानी है। कुछ धन सी-17 ग्लोब मास्टर विमानों व सी-130 जे विमानों की किस्तों के भुगतान में खर्च होगा। ऐसे में यह राशि अपर्याप्त है।
थल सेना को इस बार 18,988 करोड़ रुपये मिले हैं। साफ है कि होवित्जर तोपों की खरीद का सौदा अमेरिका से पूरा किया जाएगा। उसे 155 मिमी की लगभग 400 तोपों की जरूरत है। हेलीकॉप्टर बेड़ा मजबूत करने के लिए 197 हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे। इन दोनों सौदों में बड़ी रकम खर्च होगी। इसके अलावा बड़ी संख्या में टैंकों, नई एसॉल्ट राइफलों, दो लाख कारबाइनों, 1500 मशीन गनों, स्नो स्कूटर, सुरंग रोधी वाहनों, बुलेट प्रूफ जैकेटों, राकेट लांचरों तथा नाइट विजन चश्मों की खरीदारी होनी है, जो शायद ही इस राशि से पूरा हो पाएगा।
नौसेना को 13,728 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले साल से ज्यादा हैं। इससे समुद्र तटीय सुरक्षा मजबूत की जानी है। नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 8,500 करोड़ रुपये के आठ पी-8 आई टोही विमान खरीदे जा रहे हैं। इस वर्ष पांच अरब डॉलर का साज-ओ-सामान भी खरीदा जाना है। नौसेना को पनडुब्बी निरोधक बमों की भी जरूरत है। पुराने चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह नए हलके हेलीकॉप्टरों की भी खरीद होनी है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को अधिक धन नहीं दिया गया है। आने वाले दिनों में हमें अपनी रक्षा तैयारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान करने की जरूरत है। बेशक रक्षा बजट बढ़ाया गया है, लेकिन चीन व पाक से मिलने वाली चुनौतियों के मद्देनजर इसे और बढ़ाने की जरूरत थी। तभी सशस्त्र बलों का बेहतर आधुनिकीकरण संभव है।
सुरक्षा पर समझौता
बजट में रक्षा प्रावधान को अपर्याप्त बता रहे हैं लेखक…..
वित्त मंत्री ने बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 1,64,415 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा उपकरण, हथियार व साजो-सामान की खरीदारी को देखते हुए यह रक्षा बजट पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। पिछले बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए पूंजी और राजस्व मद में कुल 1,47,344 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन यह नाकाफी सिद्ध हुआ और दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय को अतिरिक्त राशि की मांग करनी पड़ी। अगले वर्ष के लिए घोषित रक्षा बजट देश के कुल बजट का सातवां हिस्सा है। पिछले रक्षा बजट के मुकाबले इस बार 11.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। घोषित रक्षा बजट में पूंजीगत खर्च 69,199 करोड़ रुपये और रक्षा मंत्रालय व सशस्त्र बलों के रोजमर्रा के खर्च तथा वेतन आदि के लिए 95,216 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। योजनागत परिव्यय में थल सेना के लिए 64,251 करोड़ रुपये, वायु सेना के लिए 15,927 करोड़ रुपये, नौसेना के लिए 10,589 करोड़ रुपये तथा रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के लिए 5,624 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी तरह पूंजीगत परिव्यय 69,199 करोड़ रुपयों में से वायु सेना की खरीदारी के लिए 30,699 करोड़ रुपये, थल सेना की खरीदारी के लिए 18,988 करोड़ रुपये, नौसेना की खरीदारी के लिए 13,728 करोड़ रुपयों के प्रावधान का प्रस्ताव है। शेष धनराशि अन्य योजनाओं के लिए है। वायु सेना का पूंजीगत परिव्यय अन्य सेनाओं की तुलना में ज्यादा है लेकिन इससे भी उसके सौदे पूरे होते दिखाई नहीं पड़ते। पिछले वर्ष वायु सेना को खरीद मद में 23,446 करोड़ रुपये मिले थे। अब इसे 7253 करोड़ रुपये बढ़ाकर 30,699 करोड़ रुपये किया गया है। यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं कही जा सकती है क्योंकि इस वर्ष वायु सेना के लिए बहुप्रतीक्षित 126 बहुउद्देश्यीय भूमिका वाले लड़ाकू विमानों की खरीद के सौदे को अंतिम रूप दिया जाना है। इसके अलावा वायु सेना के विमान बेड़े को बढ़ाया जाना है क्योंकि पाक सीमा, चीन सीमा व समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए कुछ नई स्क्वाड्रनों की आवश्यकता है। इसके लिए सुखोई-30 एमकेआई विमानों की खरीद की जानी है। ऐसे में यह धनराशि काफी कम होगा। थल सेना की खरीदारी की तरफ ध्यान दिया जाए तो उसे पिछले वर्ष के 11,099 करोड़ की तुलना में इस वर्ष 18,988 करोड़ रुपये मिले हैं। थल सेना की होवित्जर तोपों की खरीद का सौदा अमेरिका से पूरा किया जाएगा। उसे 155 मिमी की लगभग 400 तोपों की जरूरत है। इसके साथ ही उसका हेलीकॉप्टर बेड़ा मजबूत किया जाना है जिसके लिए 197 हेलीकॉप्टरों की खरीद की जानी है। इन दोनों सौदों में बड़ी रकम खर्च होगी। इसके अलावा बड़ी संख्या में टैंकों, नई एसाल्ट राइफलों, दो लाख कारबाइनों, 1500 मशीन गनों, स्नो स्कूटर, सुरंग रोधी वाहनों, बुलेटप्रूफ जैकेटों, राकेट लांचरों तथा नाइट विजन चश्मों की खरीदारी की जानी है, जो इस बजट से शायद ही पूरी हो सके। वायु सेना व थल सेना की तरह नौसेना का पूंजीगत परिव्यय पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। नौसेना को 13,728 करोड़ रुपये मिले हैं। नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 8,500 करोड़ रुपये के आठ पी-8 आई टोही विमान खरीदे जा रहे हैं। इस वर्ष पांच अरब डॉलर का साजो-सामान भी खरीदा जाना है। नौसेना को पनडुब्बी निरोधक बमों की जरूरत है। इसलिए यह बजट कम ही कहा जाएगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को भी अधिक धन नहीं दिया गया है। आने वाले दिनों में भारत को अपनी रक्षा तैयारी बढ़ाने के लिए रक्षात्मक मिसाइलों के लिए विशेष प्रावधान करने की जरूरत है। बेशक रक्षा बजट बढ़ाया गया है, लेकिन चीन व पाक से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए इसे और अधिक बढ़ाने की जरूरत है। तभी सशस्त्र बलों का बेहतर आधुनिकीकरण संभव होगा। (लेखक सैन्य विज्ञान के प्राध्यापक हैं)
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