इस बार के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 1,64,415 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं। सशस्त्र सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा उपकरणों, हथियारों व साज-ओ-सामान की खरीदारी को देखते हुए यह बजट पर्याप्त नहीं है। अब चीन और पाकिस्तान, दोनों मोरचों पर रक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं और इसके मद्देनजर रक्षा आधुनिकीकरण का खर्च तो साल के अंत में ही सामने आएगा।
पिछले बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 1,47,344 करोड़ रुपये आबंटित किए गए थे, लेकिन विगत दिसंबर में रक्षा मंत्रालय ने पूंजी व राजस्व, दोनों ही मदों में बढ़ी हुई संशोधित राशि की मांग की थी। गौरतलब है कि 1971 की लड़ाई के बाद रक्षा बजट और उसमें पूंजीगत खर्च अनुमान से अधिक हो गया था, क्योंकि उस समय देश को रक्षा उपकरणों की भारी खरीदारी करनी पड़ी थी। जबकि बीते कुछ वर्षों में रक्षा मंत्रालय पूरी आबंटित धनराशि खर्च नहीं कर सका है। हालांकि भविष्य में ऐसा होने की उम्मीद नहीं है।
इस बार का रक्षा बजट देश के कुल बजट का सातवां हिस्सा है। पिछले रक्षा बजट के मुकाबले इस बार 11.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन जिस तरह विगत दिसंबर में बजट आबंटन में कमी महसूस हुई, उसे देखते हुए यह बढ़ोतरी कम ही है। कुल 1,64,415 करोड़ रुपयों में पूंजीगत खर्च 69,199 करोड़ रुपये एवं रक्षा मंत्रालय व सशस्त्र बलों के रोजमर्रा के खर्च तथा वेतन आदि के लिए 95,216 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, योजनागत व्यय में थल सेना को 64,251 करोड़, वायु सेना को 15,927 करोड़, नौसेना के लिए 10,589 करोड़ तथा रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन के लिए 5,624 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी तरह पूंजीगत व्यय 69,199 करोड़ रुपयों में से वायु सेना की खरीदारी के लिए 30,699 करोड़, थल सेना की खरीदारी हेतु 18,988 करोड़ रुपये, नौसेना की खरीदारी हेतु 13,728 करोड़ रुपये तथा शेष राशि अन्य योजनाओं हेतु है।
वायु सेना का पूंजीगत व्यय तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। पिछले वर्ष खरीद मद में उसे 23,446 करोड़ रुपये मिले थे, जिसे इस साल बढ़ाकर 30,699 करोड़ रुपये किया गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी भी अधिक नहीं कही जा सकती, क्योंकि इस वर्ष 126 बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीद सौदे को अंतिम रूप दिया जाना है। पाक सीमा, चीन सीमा व समुद्री सीमा की सुरक्षा हेतु कुछ नई स्क्वाड्रनों की जरूरत है। इसके लिए सुखोई-30 एमकेआई विमानों की खरीद की जानी है। वायु सेना को बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टरों की भी जरूरत है। तेजस विमानों में लगने वाले इंजन भी अमेरिकी कंपनी जीई से लेने हैं। फिर कुछ विमानों की आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज की जानी है। कुछ धन सी-17 ग्लोब मास्टर विमानों व सी-130 जे विमानों की किस्तों के भुगतान में खर्च होगा। ऐसे में यह राशि अपर्याप्त है।
थल सेना को इस बार 18,988 करोड़ रुपये मिले हैं। साफ है कि होवित्जर तोपों की खरीद का सौदा अमेरिका से पूरा किया जाएगा। उसे 155 मिमी की लगभग 400 तोपों की जरूरत है। हेलीकॉप्टर बेड़ा मजबूत करने के लिए 197 हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे। इन दोनों सौदों में बड़ी रकम खर्च होगी। इसके अलावा बड़ी संख्या में टैंकों, नई एसॉल्ट राइफलों, दो लाख कारबाइनों, 1500 मशीन गनों, स्नो स्कूटर, सुरंग रोधी वाहनों, बुलेट प्रूफ जैकेटों, राकेट लांचरों तथा नाइट विजन चश्मों की खरीदारी होनी है, जो शायद ही इस राशि से पूरा हो पाएगा।
नौसेना को 13,728 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले साल से ज्यादा हैं। इससे समुद्र तटीय सुरक्षा मजबूत की जानी है। नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 8,500 करोड़ रुपये के आठ पी-8 आई टोही विमान खरीदे जा रहे हैं। इस वर्ष पांच अरब डॉलर का साज-ओ-सामान भी खरीदा जाना है। नौसेना को पनडुब्बी निरोधक बमों की भी जरूरत है। पुराने चेतक हेलीकॉप्टरों की जगह नए हलके हेलीकॉप्टरों की भी खरीद होनी है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन को अधिक धन नहीं दिया गया है। आने वाले दिनों में हमें अपनी रक्षा तैयारी बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान करने की जरूरत है। बेशक रक्षा बजट बढ़ाया गया है, लेकिन चीन व पाक से मिलने वाली चुनौतियों के मद्देनजर इसे और बढ़ाने की जरूरत थी। तभी सशस्त्र बलों का बेहतर आधुनिकीकरण संभव है।
No comments:
Post a Comment