Monday, March 28, 2011

राज्यों में सीआरपीएफ की तैनाती सीमित करेगा केंद्र


हर छोटी-बड़ी बात पर राज्यों की ओर से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की मांग पर रोक लगाने के लिए केंद्र बल की नियुक्ति को सीमित करने जा रहा है। केंद्र ने सीआरपीएफ की तैनाती को युक्तिसंगत और सीमित करने का फैसला किया है ताकि बल के जवानों को अनिवार्य प्रशिक्षण और आराम मिल सके। इस फैसले से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ओर से सीआरपीएफ की टुकडि़यों की मनमानी मांग को पूरा करना कठिन हो जाएगा। इस अ‌र्द्धसैनिक बल की बटालियन भेजने से संबंधित सभी अनुरोधों का केंद्रीय गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ मुख्यालय तार्किक ढंग से मूल्यांकन करेंगे और फिर बटालियन को भेजने के बारे में निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों केअनुसार हाल ही में करीब दस मौकों पर सीआरपीएफ टुकडि़यों की वांछित संख्या पर तार्किक ढंग से विचार कर उसमें 30 फीसदी तक कटौती की गई। सूत्रों के मुताबिक सीआरपीएफ की 180 कंपनियों को अनिवार्य प्रशिक्षण में शामिल किया गया है। जब तक उनका प्रशिक्षण पूरा नहीं हो जाता, उन्हें आतंरिक सुरक्षा ड्यूटी पर नहीं भेजा जाएगा। बल के सूत्रों ने कहा, अब गृह मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रशिक्षण में हिस्सा ले रही कंपनियों को तब तक न छुआ जाए जब तक वे अपना प्रशिक्षण पूरा नहीं कर लेतीं। कंपनियों का प्रशिक्षण और जवानों का आराम बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि बल को अकसर कानून व्यवस्था से संबंधित ड्यूटी पर तैनात कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए। केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने पिछले साल सीआरपीएफ के कार्यक्रम में कहा था कि रिजर्व शब्द इस बल के लिए अब सच नहीं रहा क्योंकि यह महज एक छोटे से नोटिस पर एक तैनाती से दूसरी तैनाती पर जाता रहता है। सीआरपीएफ के चार्टर के अनुसार इस बल का गठन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने तथा तथा उग्रवाद पर काबू पाने की मूलभूत भूमिका के साथ किया गया था। बल करीब एक दशक से नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल रहा है। जहां बीएसएफ, आइटीबीपी एवं एसएसबी जैसे अन्य अ‌र्द्धसैनिक बलों की अपनी एक खास भूमिका है। सीआरपीएफ ही एकमात्र ऐसा बल बचा है जिसे कानून व्यवस्था संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए बुलाया जाता है। प्रशिक्षण और आराम की कमी के चलते बल के जवानों में थकान और अरुचि पैदा हो जाती है। गृहमंत्री ने पिछले साल कहा था कि हर बटालियन में एक कंपनी को अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण पर जाना है और इसे नियम के रूप में लिया जाए तथा बल की तैनाती तार्किक एवं सीमित की जाए। सीआरपीएफ अपने करीब 210 संचालनात्मक बटालियन (2.10 लाख जवान) के साथ तेजी से अपने प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचा का विस्तार कर रहा है ताकि पुराने एवं नए जवानों के प्रशिक्षण का काम पूरा हो। सूत्रों के अनुसार दस बटालियन विशिष्ट कानून व्यवस्था इकाइयों के रूप में चिह्नित की गई हैं। वाम उग्रवाद से निबटने के लिए अलग विशिष्ट बटालियन के गठन का प्रस्ताव है|

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