आदर्श सोसाइटी और सुखना जैसे जमीन घोटालों के दाग छुड़ाने की कोशिश कर रहे रक्षा मंत्रालय के भूमि प्रबंधन पर सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ने भी जमकर खिंचाई की है। सीएजी ने रक्षा मंत्रालय की नाक के नीचे सैन्य जमीन पर गलत तरीके से चल रहे गोल्फ कोर्स और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए हैं। साथ ही सैन्य जमीन पर बने सभी 97 गोल्फ मैदानों को अवैध करार देते हुए सीएजी ने इस संबंध में नियम न बनाने को लेकर सरकार को फटकार लगाई है। सीएजी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि सरकारी जमीन के सबसे बड़े कब्जाधारी रक्षा मंत्रालय के पास भूमि-रिकार्ड और उनके वर्गीकरण की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। साथ ही ऑडिट आकलन में सैन्य जमीनों के व्यावसायिक उपयोग पर भी हैरत जताई गई है। रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि पिछले कई ऑडिट आकलन में सवाल उठाए जाने के बावजूद सैन्य जमीनों पर शॉपिंग कांप्लेक्स निर्माण को मंजूरी देने और उनसे हासिल धन को रेजीमेंट फंड के मद में डालने की प्रक्रिया जारी है। वहीं सीएजी रिपोर्ट में निजी संस्था के तौर पर पंजीकृत आर्मी जोन गोल्फ के परचम तले सेना के सभी गोल्फ मैदानों में विदेशियों तक को इजाजत दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट कहती है कि 8000 एकड़ से अधिक भूमि पर बने गोल्फ मैदानों के सहारे मोटा राजस्व कमाने और सरकारी संपत्ति व साधनों के उपयोग के बदले राजकीय कोष में किसी तरह का किराया न दिए जाना सवाल खड़े करता है। सीएजी ने कहा है गोल्फ को सैन्य गतिविधि नहीं माना जा सकता और इसके लिए किसी भी सूरत में ए-1 श्रेणी की सैन्य जमीन के इस्तेमाल को स्वीकार नहीं किया जा सकता। सैन्य जमीन के इस्तेमाल को लेकर आई सीएजी की 35वीं रिपोर्ट में पट्टे की भूमि पर महज 58.92 रुपये सालाना किराये पर बने आगरा क्लब में अवैध निर्माण और इसकी भरपाई पर बकाया डेढ़ करोड़ रुपये की धनराशि पर भी लाल घेरा बनाया है। इसी तरह लखनऊ के एमबी क्लब पर बकाया धन को लेकर भी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। सीएजी ने रक्षा मंत्रालय के भारी मात्रा में सरप्लस जमीन के इस्तेमाल पर कोई फैसला न करने पर भी सरकार को फटकारा है। हालांकि बीते दिनों मुंबई में आदर्श सोसाइटी और कांदिवली इलाके में जमीन घोटालों के बाद रक्षा मंत्रालय ने अपने भूमि प्रबंधन नियमों के तार कसने की कवायद शुरू की है|
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