जरूरत के 70 फीसद हथियार आयात करता है भारत दुनिया में शस्त्रों के दस बड़े आयातकों में चार एशिया के
वर्ष 2011-12 के लिए भारत के रक्षा बजट में हुई 40% वृद्धि से 1500 अरब रुपए पहुंचा आगे भी हथियारों का सबसे बड़ा आयातक बना रहेगा भारत रिपोर्ट
युद्धक साजो-सामान का आयात करने वाले देशों में चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है। चीन दूसरे नंबर पर और उसके बाद दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान का नंबर है। स्वीडन की स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, ‘अंतरराष्ट्रीय हथियार हस्तांतरण विषयक शोध के नवीन आंकड़ों के हिसाब से भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है।’ इंस्टीट्यूट की रपट के अनुसार वर्ष 2006 से 1010 के दौरान दुनिया के कुल हथियारों के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी नौ फीसद रही। भारत को करीब 82 फीसद हथियारों का निर्यात रूस से किया गया। रपट के अनुसार वर्ष 2006-10 की अवधि में परंपरागत हथियारों के चार बड़े खरीदार एशिया महाद्वीप में ही थे। इससे पहले 1992 में भारत दुनियाभर में सबसे अधिक हथियार खरीदने वाला देश बना था। एशियाई क्षेत्र में हथियारों के चार सबसे बड़े खरीदारों में सकल खरीद में नौ फीसद खरीदारी के साथ भारत पहले स्थान पर, छह फीसद के साथ चीन दूसरे स्थान पर, करीब छह फीसद के साथ ही दक्षिण कोरिया तीसरे पर और पांच फीसद के साथ पाकिस्तान चौथे स्थान पर रहा। रपट के अनुसार ये सभी परंपरागत हथियारों का आयात कर रहे हैं, और आगे भी करते रहेंगे। इनमें विशेष रूप से छोटे लड़ाकू विमान और समुद्री रक्षा पण्राली शामिल हैं। पिछले पांच साल में देश की हथियार खरीद मात्रा में 21 फीसद का इजाफा हुआ है, जबकि एयरक्राफ्ट की खरीद 71 फीसद बढ़ी। पाकिस्तान के मामले में इन पांच सालों के दौरान उसके हथियार आयात में 128 फीसद की बढ़ोतरी हुई। हथियारों की खरीद-फरोख्त पर नजर रखने वाली संस्था के सीमोन वेजमैन ने कहा ‘भारत ने अब तक जो खरीद आर्डर दिए हैं हमें पता है कि आने वाले सालों में भी भारत युद्धक सामग्री का बड़ा आयातक बना रहेगा।’
वर्ष 2011-12 के लिए भारत का रक्षा बजट 1500 अरब रुपए तय किया गया है। इसमें दो वर्ष पहले की तुलना में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। भारत अपनी जरूरतों के करीब 70 प्रतिशत हथियारों का आयात करता है। वेजेमैन ने कहा चीन अपनी घरेलू हथियार निर्माण फैक्टरियों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। भारत इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कर पाया है। अभी भी भारत में 126 लड़ाकू जेट विमान, 200 हेलीकाप्टर, समुद्री पोत तथा एक पनडुब्बी खरीदने का प्रस्ताव भी है।
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