Sunday, September 23, 2012

स्वदेशी तोप का 2013 में शुरू होगा उत्पादन




ठ्ठजागरण न्यूज नेटवर्क, जबलपुर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में गन कैरिज फैक्टरी (जीसीएफ) में 155 एमएम तोप प्रोडक्शन शॉप की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि यह तोप दिसंबर तक तैयार कर ली जाएगी। परीक्षण के बाद 2013 में इसका उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। रक्षामंत्री ने 155 एमएम तोप के स्वदेशीकरण में तोप गाड़ी निर्माणी, जबलपुर एवं भारतीय सेना आर्मी 506 वर्कशॉप, सीओडी जबलपुर के एक साथ कार्य करने को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की। रक्षा मंत्री ने भविष्य में भी इसी तरह और भी उत्पाद विकसित किए जाने का विश्वास जताया। एंटोनी ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान भी 155 एमएम तोप के बारे में बताया। साथ ही कहा कि यह दिसंबर तक तैयार कर ली जाएगी। परीक्षण के बाद इसका उत्पादन कार्य शुरू हो जाएगा। एंटोनी ने शनिवार को जबलपुर में व्हीकल फैक्टरी और जीसीएफ का दौरा किया। उन्होंने कहा कि नई फैक्टरियां खोलने के लिए जबलपुर सबसे उपयुक्त जगह है। एंटोनी ने भारत-चीन के संबंध के बारे में कहा कि सेना हर तरह से चौकस है और हम हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। देश की सभी निर्माणियों को आधुनिक बनाने का कार्य चल रहा है। सभी आयुध निर्माणियों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारियां चल रहीं हैं।

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -6,23-9-2012 lqj{kk

Saturday, September 22, 2012

समुद्री सरहद की हिफाजत के इंतजाम होंगे और चुस्त




ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली तटीय सीमा की अबाध इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द ही रडार श्रृंखला का नया फेज शुरू करेगा। समुद्री सरहद की सुरक्षा की प्राथमिकता गिनाते हुए रक्षा मंत्री एके एंटनी ने तटरक्षक बल कमांडरों की बैठक में कहा कि निगरानी के काम में मछुआरों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए। तटरक्षक बल कमांडरों की 31वीं बैठक को संबोधित करते हुए एंटनी ने कहा कि बल की ताकत को अगले चार-पांच साल में दोगुना कर दिया जाएगा। बीते साल जहां पूर्वोत्तर मुख्यालय व पांच स्टेशनों को शुरू किया गया वहीं चालू वित्त वर्ष के अंत तक छह और स्टेशन काम करना शुरू कर देंगे। एंटनी ने बताया कि भारत की साढ़े सात हजार किलोमीटर लंबी तटरेखा की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की परियोजना का पहला चरण पूरा होने के करीब है। महत्वपूर्ण है कि इसके तहत 46 रडार लगाए जा रहे हैं। वहीं दूसरे चरण में अतिरिक्त 38 रडार स्थापित किए जाने हैं। तटरक्षक बल के महानिदेशक वाइस एडमिरल एमपी मुरलीधरन ने कहा कि बल के क्षमता विस्तार की रफ्तार में काफी तेजी आई है। नए निगरानी पोत खरीदे जा रहे हैं वहीं बीते साल पोरबंदर में डोर्नियर विमानों की एक स्क्वाड्रन भी तैनात की गई है। समुद्री सीमाओं की हवाई निगरानी के लिए दो एयर स्टेशन, 5 एयर एंक्लेव और चार स्क्वाड्रन बनाने की योजना प्राथमिकता के आधार पर बढ़ रही है।

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -2,21 -9-2012 lqj{kk

माउंटेन स्ट्राइक कोर पर फिर प्रस्ताव भेजेगी सेना




ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली चीन से सटी सरहद पर मोर्चेबंदी मजबूत करने के लिए दो नई माउंटेन स्ट्राइक कोर बनाने के प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से उठे सवालों के बावजूद सेना ने इसे ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। सेना मुख्यालय सरकार में उठे सवालों पर उचित जवाब के साथ इस प्रस्ताव को फिर से भेजने की तैयारी कर रहा है। करीब दो साल पुराने इस प्रस्ताव में सेना ने सरकार को पर्वतीय जरूरतों के लिहाज से दो नई स्ट्राइक (आक्रामक) कोर खड़ी करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि मामले पर वित्त मंत्रालय को कोर खड़ी करने के खर्च को लेकर चिंताएं थी, वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय चीन के साथ संबंध के मद्देनजर इसके परिणामों को लेकर फिक्रमंद था। लिहाजा बीते दिनों पीएमओ ने सेना के इस प्रस्ताव पर कुछ सवालों के साथ रक्षा मंत्रालय को लौटा दिया। महत्वपूर्ण है कि सेना के लिए एक नई कोर बनाने में अनुमानित 60 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा। बुधवार को सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि स्ट्राइक कोर बनाने का प्रस्ताव सेना की भावी जरूरतों के लिहाज से बनाया गया है। इस बारे में जो भी सवाल उठाए गए हैं, उनके जवाब सहित हम अपना प्रस्ताव पुन: भेजेंगे। उनका कहना था कि यह प्रस्ताव अभी प्रमाणीकरण के चरण में है। गत वर्ष सरकार दो नई माउंटेन डिविजन बनाने की सेना की योजना को मंजूरी दे चुकी थी। इन्हें अरुणाचल प्रदेश के इलाके में खड़ा किया जाना है। सामान्यत: डिविजन में करीब 10 हजार सैनिक होते हैं जबकि कोर में यह आंकड़ा 20 से 40 हजार के बीच हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ की ओर से इस बात को लेकर चिंता जताई गई थी कि बीते तीन सालों में चीन ने भारत के साथ सटी सीमा पर कोई बड़ा सैन्य जमावड़ा नहीं किया है। ऐसे में नई कोर बनाने का कदम संबंध सामान्य बनाने की कोशिशों को धक्का दे सकता है। हालांकि सैन्य जानकारों का कहना है कि सीमा पर चीन के ढांचागत निर्माण व तैयारियों के मुकाबले मौजूद कमजोरियों की भरपाई इससे होगी
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -2,21 -9-2012 lqj{kk

चीन ने नई पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल का विकास कर लिया है




पिछले दिनों न्यूयार्क टाइम्स ने अमेरिका के सैन्य एवं खुफिया अधिकारियों के हवाले से यह खबर प्रकाशित की कि चीन ने नई पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल का विकास कर लिया है। इसे पनडुब्बी से लांच किया जा सकता है और यह मिसाइल कम से कम दस परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। डोंगफोंग-41 के नाम से जानी जाने वाली यह इंटर कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आइसीबीएम) को चलंत लांचिंग प्रणाली से दागा जा सकेगा। इस तकनीक के कारण इस मिसाइल को लांच करने से पहले इसका पता लगाकर नष्ट करना एक कठिन कार्य होगा। इस तरह चीन ने मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से निपटने की ताकत मजबूत कर ली है। डोंगफोंग-41 मिसाइल 12000 से 14000 किलोमीटर की लंबी दूरी तक मार कर सकती है। अमेरिकी सैन्य एवं खुफिया अधिकारियों की इस नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास तकरीबन 55 से 65 आइसीबीएम श्रेणी की मिसाइलें हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पनडुब्बी से लांच की जाने वाली इस मिसाइल का प्रयोग अमेरिका की मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से निपटने के लिए कर सकता है। चीन की इस मिसाइल की जद में भारत व अमेरिका के कई शहर आते हैं। उल्लेखनीय है कि चीन की पश्चिमी सीमा से न्यूयॉर्क की दूरी 6945 मील तथा पूर्वी सीमा से सिएटल की दूरी 4349 मील है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि चीन ऐसी दो पनडुब्बियों को तैनात करने की योजना पर कार्य कर रहा है जिन पर 12 मिसाइलें तैनात की जाएंगी। चीन अपने पहले विमान वाहक पोत के समुद्री परीक्षण व अत्याधुनिक किस्म के लड़ाकू विमान जे-20 की उड़ान परीक्षण के बाद अपनी मिसाइलों की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में लग गया है। चीन की डोंग फोंग-3 मिसाइल 2000 किलोग्राम थर्मो न्यूक्लियर आयुध के साथ लगभग 2800 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। इसमें तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है। यह एक चरण वाली मिसाइल है। इसी श्रेणी की दो चरण व तरल ईंधन वाली डोंग फोंग-4 ए मिसाइल 5000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। यह मिसाइल भी अपने साथ 2000 किलोग्राम थर्मो न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है। इसी तरह डोंग फोंग-5 में भी तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है। यह भी दो चरण वाली मिसाइल है, लेकिन यह 2000 किलोग्राम के थर्मो न्यूक्लियर वारहेड के साथ 10,000 किलोमीटर की दूरी तक की संहारक क्षमता रखती है। चीन के पास 11,500 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल डोंग फोंग-31 ए है जो दक्षिण एशिया क्षेत्र में कहीं भी निशाना साध सकती है। इसी तरह डोंग फोंग-31 मिसाइल 1000 किलोग्राम की परमाणु आयुध सामग्री के साथ 10000 किलोमीटर तक की संहारक क्षमता रखती है। चीन ने भारतीय सीमा पर परमाणु क्षमता से लैस डी.एफ.-21 मिसाइल को तैनात कर रखा है। इसकी मारक क्षमता 1700 से 3000 किलोमीटर है। मतलब यह है कि भारत के प्रमुख शहर कोलकाता, डिब्रूगढ़, नई दिल्ली व चंडीगढ़ आदि इसकी मारक जद में होंगे। यह 600 किलोग्राम वजन का परमाणु विस्फोटक ले जाने में सक्षम है जो किसी भी शहर के विध्वंस के लिए काफी है। चीन ने नई मिसाइल प्रणाली एसएएम की तैनाती कर दी है जो ऊंचे और बेहद नीची उड़ान भरने वाले लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इस प्रणाली को रेड फ्लैग-16 नाम दिया गया है। चीन युद्धपोत रोधी मिसाइलों को प्रशांत महासागर में तैनात कर रहा है। यह डोंग फोंग-21डी मिसाइल का परिवर्धित रूप है। इनकी मारक क्षमता 20,000 किलोमीटर की दूरी तक है। चीन ने 12 जनवरी, 2010 को हवा में ही मिसाइल मार गिराने का सफल परीक्षण किया था। इससे पहले यह तकनीक केवल अमेरिका व रूस के पास ही थी। जनवरी 2007 में चीन ने सैटेलाइट निरोधक मिसाइल प्रणाली का सफल परीक्षण किया था। चीन की इस ताकत को देखते हुए अमेरिका व भारत को अपनी तैयारी में ढील नहीं देना चाहिए। (लेखक सैन्य विज्ञान विषय के प्राध्यापक हैं) चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव की टिप्पणी चीन की नई मिसाइल

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -8,21 -9-2012 lqj{kk

किसी हाल में नहीं दोहराने देंगे 1962




ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली चीन के साथ 1962 की लड़ाई को अगले माह 50 बरस पूरे होंगे। इससे पहले सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि भारतीय फौज अब किसी भी सूरत में उसकी पुनरावृत्ति नहीं होने देगी। हमारे पास अपनी सरहदों की हिफाजत की योजनाएं हैं। वहीं, पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सेना की मौजूदगी को चिंताजनक मानते हुए जनरल सिंह ने कहा कि हम अपनी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। इस बारे में हमने अपनी चिंताएं सरकार को बता दी हैं। सेना प्रमुख जनरल सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं भारतीय सेनाध्यक्ष के तौर पर यह भरोसा देता हूं कि किसी भी हालत में हम 1962 को दोहराने नहीं देंगे। हमारे पास देश की सीमाओं की रक्षा करने की क्षमता और योजना है। किसी एक देश की बात नहीं है, हम किसी को भी भारत की सीमाओं में दाखिल नहीं होने देंगे। पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चीनी सैनिकों की मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी सेना को है। सेना की मिली सूचनाओं के अनुसार चीनी सैनिक पीओके में जारी रेल, सड़क व पनबिजली परियोजनाओं को सुरक्षा देने के लिए हैं। महत्वपूर्ण है कि भारत इस मामले को उठा चुका है। बीते दिनों समाप्त संसद के मानसून सत्र में रक्षा मंत्री एके एंटनी ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चीन की ढांचागत परियोजनाओं पर भारत की पूरी नजर है। इसके बारे में भारत ने अपनी चिंता चीन के सामने रख दी है और उनसे पीओके में सारे काम रोकने के लिए कहा है। इस बारे में रिपोर्ट आती रही हैं कि पीओके में चीन के चार हजार से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं। हालांकि सेनाध्यक्ष ने चीन के साथ लगी सरहद को शांतिपूर्ण बताते हुए स्पष्ट किया कि घुसपैठ की कोई घटना नहीं हुई है। चूमर क्षेत्र में 29 जुलाई को चीन और भारत के गश्ती दलों के बीच हुए आमने-सामने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी मान्यता के आधार गश्त करते हैं। ऐसे में कई बार आमना-सामना हो जाता है जिसमें तनाव टालने के लिए बैनर दिखाने की व्यवस्था है। फिलहाल चीन से खतरा नहीं : केटी परनायक नौशहरा : चीन लद्दाख में पाकिस्तान की तरह हरकतें नहीं कर रहा। वहां सिर्फ स्मगलिंग की ही वारदातें हो रही हैं। इस मसले पर उसके साथ बातचीत होती रहती है। चीन सीमा पर अगर कुछ हो रहा है तो उसे रोका जाएगा। चीन अभी हमारे लिए पाकिस्तान की तरह खतरा नहीं बन रहा। लद्दाख में हमारी सेना ने सीमा पर पूरी नजर रखी है। यह कहना है उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनायक का।

दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -3,20-9-2012 lqj{kk