ठ्ठ जागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली चीन
से सटी सरहद पर मोर्चेबंदी मजबूत करने के लिए दो नई माउंटेन स्ट्राइक कोर
बनाने के प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से उठे
सवालों के बावजूद सेना ने इसे ठंडे बस्ते में नहीं डाला है। सेना मुख्यालय
सरकार में उठे सवालों पर उचित जवाब के साथ इस प्रस्ताव को फिर से भेजने
की तैयारी कर रहा है। करीब दो साल पुराने इस प्रस्ताव में
सेना ने सरकार को पर्वतीय जरूरतों के लिहाज से दो नई
स्ट्राइक (आक्रामक) कोर खड़ी करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि
मामले पर वित्त मंत्रालय को कोर खड़ी करने के खर्च को लेकर चिंताएं थी, वहीं
प्रधानमंत्री कार्यालय चीन के साथ संबंध के मद्देनजर इसके परिणामों
को लेकर फिक्रमंद था। लिहाजा बीते दिनों पीएमओ ने सेना के इस प्रस्ताव
पर कुछ सवालों के साथ रक्षा मंत्रालय को लौटा दिया। महत्वपूर्ण है कि
सेना के लिए एक नई कोर बनाने में अनुमानित 60 हजार करोड़ का
अतिरिक्त भार
आएगा। बुधवार को सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा
था कि स्ट्राइक कोर बनाने का प्रस्ताव सेना की भावी जरूरतों के लिहाज से
बनाया गया है। इस बारे में जो भी सवाल उठाए गए हैं, उनके जवाब सहित हम अपना
प्रस्ताव पुन: भेजेंगे। उनका कहना था कि यह प्रस्ताव अभी प्रमाणीकरण के
चरण में है। गत
वर्ष सरकार दो नई माउंटेन डिविजन बनाने की सेना की योजना को मंजूरी दे चुकी
थी। इन्हें अरुणाचल प्रदेश के इलाके में खड़ा किया जाना है। सामान्यत: डिविजन
में करीब 10 हजार
सैनिक होते हैं जबकि कोर में यह आंकड़ा 20 से 40 हजार
के बीच हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक पीएमओ की ओर से इस बात को लेकर चिंता
जताई गई थी कि बीते तीन सालों में चीन ने भारत के साथ सटी सीमा पर कोई
बड़ा सैन्य जमावड़ा नहीं किया है। ऐसे में नई कोर बनाने का कदम संबंध सामान्य
बनाने की कोशिशों को धक्का दे सकता है। हालांकि सैन्य जानकारों का कहना
है कि सीमा पर चीन के ढांचागत निर्माण व तैयारियों के मुकाबले मौजूद कमजोरियों
की भरपाई इससे होगी
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -2,21 -9-2012 lqj{kk
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