ठ्ठप्रणय उपाध्याय, नई
दिल्ली भारत
और मालदीव के रिश्तों में चीन के बढ़ते दबदबे का कांटा लगातार भारतीय फिक्र
बढ़ा रहा है और इसके संकेत भारतीय रक्षा मंत्री के दूसरे मालदीव दौरे में
भी सामने आए। माले ने भारत के साथ रक्षा सहयोग और
दोस्ती पर गर्मजोशी तो बहुत दिखाई, लेकिन
कुछ अहम परियोजनाओं पर किसी वादे को लेकर चुप्पी साध ली। कूटनीतिक
सूत्रों के मुताबिक, भारत
को मालदीव में अपनी रडार नेटवर्क परियोजना बढ़ाने पर
कोई ठोस भरोसा हासिल नहीं हो पाया। हिंद महासागर में समुद्री
डकैती के आतंक से मुकाबले और निगरानी के लिए भारत ने मालदीव में पहले
से तीन रडार लगाए हैं। इस कड़ी में सात और रडार लगाए जाने हैं और इसे भारत
के तटीय रडार नेटवर्क से जोड़े जाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार, वार्ता
की मेज पर भारत की ओर से इस मुद्दे को उठाए जाने पर मालदीव ने कोई उत्साह
नहीं दिखाया। भारतीय खेमा इसे अच्छे संकेत के तौर पर नहीं देख रहा। महत्वपूर्ण
है कि मालदीव में चीन का बढ़ता निवेश और दबदबा पहले से ही भारत की
चिंता का सबब है। इन्हीं चिंताओं के बीच भारत की कोशिश अपनी सुरक्षा के लिहाज
से अहम मालदीव में अपने प्रभाव को बनाए रखने की है। हालांकि भारत की फिक्र
के जवाब में मालदीव अपनी आर्थिक आवश्यकता का हवाला देते हुए चीनी निवेश
को अपनी जरूरत बताता रहा है। अपनी इन चिंताओं के मद्देनजर ही भारत ने इस
साल मालदीव को साढ़े नौ करोड़ अमेरिकी डॉलर की रकम रियायती दरों पर दी थी।
वहीं मई 2012 में
मालदीव के राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री
मनमोहन सिंह ने साढ़े ढाई करोड़ डॉलर की रकम देने की घोषणा की थी।
ज्ञात हो, मालदीव
में नई सरकार बनने के बाद भारतीय रक्षा मंत्री एके एंटनी
के दौरे में संयुक्त बयान जारी कर दोनों मुल्कों के बीच सहयोग बढ़ाने का
ऐलान किया गया। एंटनी की यात्रा के दौरान भारत की मदद से मालदीव में सैन्य
प्रशिक्षण संस्थान का शिलान्यास किया गया। वहीं,भारत ने मालदीव के पायलटों
को भी प्रशिक्षण देने की सुविधा का प्रस्ताव दिया है।
दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण पेज -6,19-9-2012
lqj{kk
No comments:
Post a Comment