जमीन में हैं सैन्य भ्रष्टाचार की जड़ें
सेना में भ्रष्टाचार के अनेक मामलों की मूल जड़ सेना के नाम पर देश में फैली जमीनें हैं। जमीन के मामले में भारत का रक्षा मंत्रालय सिरमौर है। उसके पास 1.73 मिलियन एकड़ जमीन है। यह जमीन सेना को छावनी, कार्यालय और सैन्यकर्मियों की रिहायश के लिए दी गई है, जिसका बड़ा हिस्सा अनप्रयुक्त पड़ा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक सेना के पास लगभग 82000 एकड़ जमीन अतिरिक्त है। 2011 जनवरी में पुणो में कल्पतरु नाम के निजी बिल्डर को सेना की जमीन सस्ती दर पर देने का मामला उठा था। इस सौदे में कल्पतरु को कथित तौर पर 9 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ था। सीबीआई ने सेना के पूर्व उप प्रमुख ले.ज. नोबेल थम्बुराज समेत तीन के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और र्दुव्यवहार के आरोपों के साथ चार्जशीट दायर किया था। इसके अलावा, कल्पतरु भवन निर्माता कम्पनी मुंबई के कंडावली-मलाड इलाके में सेना की जमीन खरीदने के मामले में भी आरोपित है। इस मामले में रक्षा उत्पादनों के राज्य मंत्री, राव इंद्रजीत सिंह और पूर्व जनरल दीपक कपूर इस मामले में आरोपित हैं। 2011 श्रीनगर में भी हवाईअड्डे से लगी 39 मिलियन डॉलर की कीमत की जमीन को निजी भवन निर्माता कम्पनी के हाथ अवैध हस्तांतरण का खुलासा हुआ था। सीबीआई ने सैन्य भू प्रबंधन विभाग के कुछ अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रही है। 2012 जनवरी में, जोधपुर में सेना की 4.84 एकड़ जमीन को तीन मिलियन डॉलर में एक निजी न्यास को हस्तांतरित करने का मामला उजागर हुआ था। यह जमीन सेना के व्यावसायिक उपयोग के वास्ते रखी गई थी लेकिन रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर ने बिना किसी वैधानिक अनुमति के स्थानीय पूर्व महाराजा मेजर हरि सिंह धमार्थ न्यास को हस्तांतरित कर दी। 2010 मुंबई में आदर्श सोसाइटी घोटाला सुर्खियों में आया था। इसमें करगिल युद्ध शहीदों की विधवाओं और परिजनों की रिहाइश के लिए फ्लैट बनाए जाने थे लेकिन सेना के आलाअफसरों से लेकर राजनीतिकनौक रशाहों तक ने न केवल भवन को 31वीं मंजिल बनवा दी बल्कि ये सारे लोग उसमें नामी-बेनामी फ्लैट भी ले लिए। हालांकि सेना का कहना है कि इतनी ऊंची इमारत से कुलाबा सैन्य केंद्र पर नजर रखी जा सकती है। लिहाजा, यह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है। इस मामले की न्यायपालिका की देखरेख में सीबीआई जांच के दौरान नौ बड़े आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 2008 में सुकना भूमि घोटाला हुआ था। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी अवस्थित सेना मुख्यालय की 71 एकड़ जमीन फर्जी तरीके से मायो कॉलेज, अजमेर के फ्रेंचाइजी स्कूल को स्थांतरित कर दिया गया था। बाद में मायो कॉलेज ने इसका खंडन किया कि उसने किसी संस्था को अपने नाम के इस्तेमाल की इजाजत दी है। इस मामले में पूर्व सैन्य सचिव ले.ज. अवधेश प्रकाश समेत सेना के चार बड़े अफसरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसी शिक्षण संस्था ने उत्तराखंड के रानीखेत अवस्थित कुमांउ रेजिमेंटल सेंटर की जमीन का सौदा करती पाई गई थी। हालांकि जारी सुका जांच ने डील को स्थगित कर दिया है। सेना की जमीनों के घोटाले को देखते हुए रक्षा मंत्री एंटनी ने स्थानीय सैन्य प्राधिकरणों के अधिकार में संशोधन की जरूरत जताई है। वैसे यह कानून के शासन वाले देश में राहत की बात है कि कार्रवाई में मुंहदेखी नहीं की जा रही है। आरोपितों पर कार्रवाई की जा रही है।
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