कोलकाता महानगर के सबसे व्यस्त सियालदह रेलवे स्टेशन से रोजाना 27 लाख से ज्यादा यात्री आवागमन करते हैं। मुसाफिरों की इतनी बड़ी भीड़ की सुरक्षा का जिम्मा आरपीएफ के 80 और जीआरपी के 20 जवानों पर है। यानी एक सिपाही के कंधे पर 27 हजार यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे के प्रति यह बेरुखी कभी भी हादसे या आतंकी वारदात का कारण बन सकती है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, सियालदह स्टेशन से रोजाना 826 लोकल ट्रेनें, 80 एक्सप्रेस, चार इंटर डिवीजन ट्रेनें और 18 नन सबर्वन छूटती हैं। हाल में कुछ नयी ट्रेनें भी बढ़ी हैं, जिससे स्टेशन पर दिनभर यात्रियों की भीड़ बरकरार रहती है। इसके बावजूद, मुसाफिरों की सुरक्षा, संदिग्धों की पहचान करने और उन्हें दबोचने के लिए स्टेशन पर सिर्फ 100 सुरक्षा कर्मी ही तैनात हैं। स्टेशन पर हर दिन आठ घंटे के तीन शिफ्ट में 80 आरपीएफ के जवान तैनात रहते हैं, वहीं जीआरपी के पुलिस कर्मियों की तादाद 20 से ज्यादा नहीं है। स्टेशन के सभी बड़े-बड़े इंट्री गेट पर प्राय: मेटल डिटेक्टर खराब रहते हैं। कई जगह से तो मशीन खराब होने के बाद से गायब है। संदिग्धों पर नजर रखने के लिए स्टेशन पर लगे क्लोज सर्किट टीवी (सीसीटीवी) में से महज दो दर्जन ही ऐसे हैं जो काम करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी की संख्या बेहद कम है। इस बारे में बात करने पर आरपीएफ का कहना है कि 27 लाख से ज्यादा यात्रियों को संभालने के लिए पूरे स्टेशन पर आरपीएफ जवानों की संख्या कम से कम 350 होनी चाहिए। उन्होंने कहा, सुबह व शाम यात्रियों की भारी भीड़ के दौरान मेटल डिटेक्टर गेट से एक सेकेंड में कई यात्री गुजर जाते हैं, जबकि यात्री के पास हथियार मौजूद है, इसकी जानकारी देने में मशीन को न्यूनतम 8 सेकेंड का समय लगता है, अगर सुरक्षा जांच के लिए यात्रियों को लाइन में खड़ा कर मेटल डिटेक्टर गेट से ही जाने दिया जाए, तो ऑफिस समय के दौरान स्टेशन के बाहर यात्रियों की लंबी लाइन लग जायेगी। गेट पर मेटल डिटेक्टर न होने की वजह से कोई भी हथियार और विस्फोटक सामग्री ले कर घुस सकता है। आरपीएफ के आइजी डॉक्टर सुभाष चंद साहू ने बताया कि स्टेशन पर आरपीएफ जवानों की संख्या में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। स्टेशन की सुरक्षा के लिए जल्द 300 सीसीटीवी भी लगाये जायेंगे। आरपीएफ के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि अपराध रोकने को स्टेशन पर सफेद वर्दीधारी (महिला व पुरुष सिपाही) गश्त करते रहते हैं। स्टेशन पर विस्फोटक सामग्री और लंबी दूरी की महत्वपूर्ण ट्रेन की जांच के लिए दो स्नीफर डॉग की मदद ली जाती है।
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