Friday, January 7, 2011

घाटी से सुरक्षाबलों की अभी वापसी नहीं

 जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक समूहों की मजबूत दलीलों के बावजूद राज्य से सुरक्षाबलों को वापस बुलाने की कम संभावना है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि आतंकी गतिविधियां फिर शुरू होने की आशंका है, ऐसे में राज्य सरकार जवानों को वापस बुलाए जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। उन्होंने कहा कि सूचना मिली है कि अलगाववादी और उनके समर्थक 2011 की गर्मियों में गलियों में विरोध प्रदर्शन की दूसरी पारी शुरू करने की तैयारी में हैं। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक बैठक में हिस्सा ले चुके वरिष्ठ अधिकारी ने यहां बताया, ऐसे हालात में सुरक्षाबलों को वापस बुलाने की कोई संभावना नहीं है। हम वही करेंगे जो सुरक्षा की दृष्टि से उचित होगा, राजनीतिक समूहों के विचारों पर चलना ठीक नहीं होगा।अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, यह साल यहां के लिए बहुत संकटपूर्ण बनने जा रहा है। 2010 की गर्मियों में सुरक्षाबलों पर हुए आतंकी हमलों से हमारी यह धारणा पुख्ता हुई है कि पाकिस्तान और उनसे द्वारा संपोषित आतंकी समूचे राज्य में गड़बड़ी फैलाते रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समूचे राज्य में 500 से अधिक आतंकी सक्रिय हैं तथा सीमा पार से आतंकियों के नए जत्थे भी आ रहे हैं। आतंकियों की नई घुसपैठ नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा, दोनों जगहों से हो रही है। इस कारण सुरक्षाबलों की मौजूदगी और चौकसी आवश्यक है। अधिकारी ने कहा, हम पहले से बनी हुई व्यवस्था में तब्दीली नहीं चाहते हैं। राज्य सरकार भीड़ नियंत्रण प्रणाली शुरू करने की तैयारी में है। राज्य पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गैर प्राणघातक हथियारों की खरीद कर रही है।
10 वर्षो में हिंसा के दौरान करीब 7000 लोगों की मौत नई दिल्ली :
जम्मू-कश्मीर में पिछले दस वर्षो में हिंसा के दौरान कुल 7031 नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। सूचना का अधिकार (आरटीआइ) कानून के तहत दिए गए जवाब में गृह मंत्रालय ने बताया, जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2001 से अगस्त 2010 तक 4812 नागरिकों और 2219 सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाईं। पिछले वर्षो में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में पथराव, विरोध प्रदर्शन, हथियारबंद आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ और आतंकवादी हमलों की अनेक घटनाओं में कई नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई और अनेक घायल हुए। गृह मंत्रालय ने कहा, कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है और राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने संबंधी कदम जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा उठाए जाते हैं। सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अश्विनी श्रीवास्तव ने मंत्रालय से 2001 से अब तक पथराव के कारण हुई मौतों और आतंकवादियों द्वारा आतंक या घुसपैठ की कोशिशों की जानकारी मांगी थी।


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