Thursday, January 6, 2011
फाइल ड्रामे के बाद लीकेज ढूंढ़ने में जुटा रक्षा मंत्रालय
वायुसेना के लिए 126 लड़ाकू विमान सौदे से जुड़ी संवेदनशील फाइल के नाटकीय तरीके से गुम हो जाने और फिर मिलने पर रक्षा मंत्रालय अब अपने तंत्र में लीकेज तलाशने में जुट गया है। वहीं, रक्षा मुख्यालय ने इस मामले की जांच के दायरे में ताजा घटना के साथ-साथ व्यवस्था के कील कांटे दुरुस्त करने की कवायद को भी शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक पड़ताल की खुर्दबीन में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ एक्विजीशन के साथ उन विभागों का अमला खड़ा है, जिनका संबंध फाइल से है। उक्त फाइल 506 अरब रुपये के अति महत्वपूर्ण सौदे की खरीद प्रक्रिया से संबंधित थी। देश की सबसे बड़े रक्षा खरीद सौदों में एक इस सौदे पर वायुसेना ने अपनी रिपोर्ट रक्षा मुख्यालय को 31 जुलाई 2010 को सौंपी थी। इसमें विमानों की तकनीकी आकलन रिपोर्ट और उसके ऑफसैट से संबंधित जानकारियां थीं। हालांकि रक्षा मंत्रालय फिलहाल जांच के संबंध में अधिक कुछ भी बताने को राजी नहीं है। इस महत्वपूर्ण सौदे से जुड़ी एक फाइल खेल गांव इलाके में सड़क किनारे पड़ी पाई गई। इसे बाद में वायुसेना मुख्यालय को सौंप दिया गया। सूत्रों के मुताबिक यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस फाइल के संबंध में संवेदनशील जानकारियों से जुड़ी नियत प्रक्रिया में किस जगह चूक हुई? साथ ही जांच के दायरे में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस संबंध में स्थापित नियमावली की किस हद तक अनदेखी हुई? रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि फाइलों को कई बार अधिकारी घर ले जाते हैं लेकिन उसके लिए बाकायदा एक नियत प्रक्रिया है। इसमें उच्च अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी देने के साथ ही निर्धारित कागजी कार्यवाही भी करनी होती है। इतना ही नहीं, व्यवस्था तो यहां तक कहती है कि अधिकारी अपने साथ फाइलों को हिफाजत के साथ निर्धारित बक्सों में ले जाएं। उल्लेखनीय है कि 126 लड़ाकू विमान खरीद सौदा अहम मोड़ पर है जहां सरकार को इस बारे में अंतिम फैसला लेना है। इस सौदे को लेकर दुनिया के हथियार बाजार में खासी उत्सुकता है। इसकी दौड़ में अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन और बोइंग, यूरोप की यूरोफाइटर, स्वीडिश कंपनी ग्रिपेन और रूसी कंपनी मिग शामिल हैं।
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