सैन्य आधुनिकीकरण के मोरचे पर भारत की तुलना में पाकिस्तान आगे निकल रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच के सैन्य संतुलन का अंतर भी कम रह गया है। दरअसल पाकिस्तान के सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया चीन और अमेरिकी मदद पर केंद्रित है। इन देशों द्वारा पाकिस्तान को दिए गए हथियारों, विमानों, युद्धपोतों, घातक प्रक्षेपास्त्रों, गोला बारूद व अन्य रक्षा उपकरणों से उसकी सैन्य क्षमता बढ़ती जा रही है, जो भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है। कुछ समय पूर्व भारतीय सेना के एक गोपनीय अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि पाकिस्तान व भारत के सैन्य संतुलन का अनुपात 1:1.3 रह गया है।
विगत दिसंबर में पाकिस्तान को अमेरिका से दो उन्नत एफ-16 लड़ाकू विमान प्राप्त हुए हैं। इससे पहले भी उसे 10 एफ-16 विमान प्राप्त हुए थे तथा छह और विमान उसे मिलने वाले हैं। ये विमान उसे आतंकवाद के खिलाफ जंग के लिए सहयोग के तौर पर मिल रहे हैं। इसमें लेजर गाइडेड बम किट, 12 टोही ड्रोन विमान एवं ऐसे उपकरण शामिल हैं, जो 1,000 पारंपरिक बमों को स्मार्ट बमों में तबदील कर देंगे। ये बम शत्रु के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं।
हथियारों की इस नई खेप से अगले वित्त वर्ष में पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य मदद 1.2 अरब डॉलर पहुंच जाएगी। इस साल यह मदद 70 करोड़ अमेरिकी डॉलर और पिछले साल 7.5 अरब डॉलर थी। हालांकि यह मदद उसे आतंकवाद से जंग के लिए दी जा रही है, लेकिन सर्वविदित है कि पाकिस्तान इसका उपयोग भारत के खिलाफ सैन्य तैयारियों में करता है।
पाकिस्तान ने अपनी हवाई सैन्य क्षमता में इजाफा करने के उद्देश्य से 2009 में चीन से जे-10 श्रेणी के 36 उन्नत लडा़कू जेट विमान खरीदने का 1.4 अरब डॉलर का समझौता किया था, जिसकी आपूर्ति शुरू होने वाली है। इस सौदे के समय यह भी तय हुआ था कि पाकिस्तान भविष्य में ऐसे और विमान खरीदेगा। इसके अलावा चीन के साथ मिलकर वह जेएफए-17 लड़ाकू विमान बना रहा है। अगले चार वर्षों में वह 250 जेएफ-17 विमान तैयार करेगा। पाकिस्तान को चीन पिछले तीन दशकों से विमानों की आपूर्ति कर रहा है। इस समय पाकिस्तानी सेना चीन निर्मित जेएफ-17, काराकोरम-8 जेट प्रशिक्षण विमान, एफ-7 सात पी.जी. व ए-56 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रही है। चीन के सहयोग से 1960 में इसलामाबाद में उड्डयन संयंत्र विकसित किया गया था, जहां अब टैंक, बख्तरबंद वाहनों एवं लड़ाकू विमानों की मरम्मत की जाती है।
पाकिस्तानी वायुसेना ने एयरबोर्न अर्ली वार्निंग ऐंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट (अवाक्स) तकनीक से निर्मित पहला विमान आठ दिसंबर, 2009 को प्राप्त किया था। स्वीडन से भी वह ऐसे कुल तीन विमान खरीद रही है। इन विमानों से पाकिस्तानी वायुसेना अपनी सीमा में प्रवेश करने वाले सभी तरह के विमानों का पता लगा सकेगी और उसकी सैन्य निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। स्वीडन की स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की सालाना रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि पाकिस्तान के पास 60 वॉरहेड्स हैं और बहुत कम समय में वह 100 परमाणु हथियार बना सकता है, जबकि भारत के पास 60 से 70 वॉरहेड्स ही हैं। इस तरह पाकिस्तान परमाणु हथियारों के मामले में हमसे बढ़त हासिल कर चुका है।
अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी उसने अमेरिका से 6.5 करोड़ डॉलर में मैक्लनेरनी युद्धपोत खरीदा है, जिसमें पनडुब्बी को नष्ट करने की क्षमता है। उसने चीन से भी एफ-22 श्रेणी के चार युद्धपोत खरीदे हैं। इसके अलावा वह छह अत्याधुनिक परिवहन विमान सी-130 ई, समुद्री निगरानी के लिए पी-3 सी आरोयन विमान व एंटीशिप हारपून मिसाइलें तथा थलसेना को ताकतवर बनाने के लिए सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर तोपों व एंटी टैंक मिसाइलों की खरीदारी अमेरिका से कर रहा है।
पाकिस्तान अपनी एटमी ताकत भी बढ़ा रहा है। अगर यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में उसका सैन्य संतुलन भारत के बराबर होगा। गौरतलब है कि भारत से कमतर स्थिति में होने के बावजूद वह आक्रामक रवैया रखता है। ऐसे में भारत की तुलना में मजबूत स्थिति में होने पर उसकी आक्रामकता की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। क्या अब भी हम सजग होंगे?
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