गुलाम कश्मीर में रेलवे लाइन बिछा रही चीनी सेना ने एक बार फिर भारतीय सीमा में दाखिल होने की हिमाकत की। चीन के फौजियों ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एएलसी) का उल्लंघन ही नहीं किया बल्कि भारतीय क्षेत्र के एक गांव गोंबीर में बन रहे यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कार्य भी रुकवा दिया। उन्होंने प्रतीक्षालय बनाने वाले श्रमिक और उनके ठेकेदार को जान से मारने की धमकी भी दी। भारतीय सेना ने चीन की हिमाकत के विरोध के बजाय लेह जिला प्रशासन को लिख भेजा कि वह एएलसी के 50 किमी के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कराने से पहले रक्षा और विदेश मंत्रालय की अनुमति ले। यह घटना लेह-लद्दाख जिला मुख्यालय से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दमचुक क्षेत्र के गोंबीर गांव में सितंबर 2010 के अंत में हुई थी। सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन, सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया और अपनी रिपोर्ट गृह और रक्षा मंत्रालय को भी भेजी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमांत क्षेत्र विकास परियोजना (बीएडीपी) के तहत गोंबीर गांव में यात्री शेड बनाया जा रहा था। सिंतबर माह में चीनी सेना (पब्लिक लिबरेशन आर्मी) के जवान निर्माण स्थल पर पहुंचे। इनमें से कुछ मोटर साइकिल पर सवार थे। उन्होंने निर्माण कार्य रुकवाने के साथ ही संबधित ठेकेदार और मजदूरों को जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। ठेकेदार ने घटना की जानकारी सेना और संबधित प्रशासन को दी। दो अक्टूबर को जिला प्रशासन ने एक दल को मामले की जांच के लिए गोंबीर भेजा। 3 तारीख को सेना की थर्ड इंफेंट्री डिवीजन (एएलसी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार) ने राज्य सरकार को एक पत्र के जरिये सूचित किया कि एएलसी पर यथास्थिति बनाई रखी जाए और इसके 50 किमी के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण से पूर्व केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी जरूर ली जाए। श्रीनगर स्थित रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस बरार ने इस संदर्भ में किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया से इनकार किया। इस बारे में पूछे जाने पर जम्मू कश्मीर के ग्रामीण विकास और कानून मंत्री अली मोहम्मद सागर और लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (एलएएचडीसी) के मुख्य कार्यकारी पार्षद रिग्जिन स्पाल्बार ने कहा, यह कोई नया मामला नहीं है। राज्य सरकार ने 2009 में स्थानीय लोगों को रोजगार देने के लिए सीमांत क्षेत्रों में नरेगा के तहत सड़कों का निर्माण कराना शुरू किया था,लेकिन चीन के ऐतराज जताने पर काम रोक दिया गया था। चीन और भारत के बीच इस क्षेत्र में कोई सीमा कोई विवाद है। वहीं, केंद्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्री और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि भारत चीन के साथ दोस्ती चाहता है, लेकिन भारतीय सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता संभव नहीं है। सर्दियों कम होते ही भारत भी अपनी ताकत का अहसास करवा सकता है। उन्होंने कहा, हाल ही में चीनी प्रधानमंत्री भारत आए थे। दोस्ती की बातें हुई थी, लेकिन चीन की गतिविधियों में कोई सुधार नहीं हुआ। लद्दाख में बढ़ते हस्तक्षेप पर विदेश मंत्री व रक्षा मंत्री पहले भी चीन से बात कर चुके हैं।
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