Monday, January 10, 2011

विमान खरीद में वायुसेना पर उठी उंगली

घोटालों और भ्रष्टाचार शिकायतों की जांच के इस मौसम में वायुसेना पर धोखाधड़ी को लेकर उंगलियां उठी हैं। सेना अधिकारियों पर विमान खरीद से जुड़े दस्तावेजों पर जाली दस्तखत के आरोप लगे हैं। उंगली उठाने वाले और कोई नहीं बीएसएफ के अधिकारी हैं। वायुसेना मुख्यालय ने आरोपों की जांच के लिए कोर्ट आफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ का आरोप है कि उसके लिए दो नए परिवहन विमान खरीद सौदे से संबंधित कागजात पर वायुसेना के नुमाइंदों ने बीएसएफ अधिकारियों की ओर से भी खुद ही दस्तखत कर दिए। जबकि दस्तावेजों पर वायुसेना और बीएसएफ दोनों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर होने थे। सूत्र बताते हैं कि दो सी- 27 जे विमान खरीदने के लिए एक यूरोपीय कंपनी के सौदे पर अंतिम दौर की बात चल रही थी। विमानों पर विशेषज्ञता के चलते गृहमंत्रालय अपने विमानों की खरीद के मामले में भी वायुसेना की ही राय लेता है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एविएशन विंग का मुखिया भी वायुसेना का ही वरिष्ठ अधिकारी होता है। जरूरत पड़ने पर वायुसेना अपने पायलट और विशेषज्ञों को प्रतिनियुक्ति पर गृहमंत्रालय और अ‌र्द्धसैनिक बलों को भेजती है। वायुसेना के पाले में विमान खरीद को लेकर गड़बड़ी का यह पहला वाकया नहीं है। 2009 में लड़ाकू हेलीकाप्टर खरीद की कवायद को एक बार इस कारण रद करना पड़ा था क्योंकि जरूरी आरएफपी दस्तावेज ही गलत तरीके से लिखा गया था।

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