Friday, January 21, 2011

मिसाइलरोधी तंत्र का दायरा बढ़ाने में जुटा भारत


दक्षिण एशियाई मोहल्ले में सुरक्षा चिंताओं की बदलती तस्वीर के बीच भारत ने अपनी मिसाइल छतरी के पैमानों में अहम बदलाव किए हैं। मिसाइल हमलों और कम तीव्रता वाले टकरावों के दौरान अपने नगरों को महफूज बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने मिसाइलरोधी तंत्र का दायरा बढ़ा दिया है। नए मानकों के मुताबिक हमलावर मिसाइल को आसमान में अब पहली चुनौती 150 किमी की ऊंचाई पर और दूसरी 80 किमी पर दी जाएगी। रक्षा मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक बदले हुए पैमानों का पहला परीक्षण अगले महीने होगा। परीक्षण में पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र पर मिसाइल आधारित मिसाइलरोधी तंत्र की वातावरण में दाखिल होने से पहले ही हमलावर प्रक्षेपास्त्र को मार गिराने की नई एक्सोएटमॉस्फियरिक मारक क्षमता आंकी जाएगी। परीक्षणों की अगली कड़ी में वातावरण के भीतर दाखिल होने पर हमलावर प्रक्षेपास्त्र को 50 के बजाए 80 किमी की ऊंचाई पर नष्ट किया जाएगा। उच्च पदस्थ रक्षा अधिकारी के मुताबिक पूरी दुनिया में अब खतरे का सबब अंतरमहाद्वीपीय प्रक्षेपास्त्र नहीं, बल्कि नजदीकी क्षेत्रों से दागी जाने वाली मिसाइलें हैं। लिहाजा भारत के लिए ज्यादा प्रभावी खतरा पास-पड़ोस से होने वाले हमलों का है। ऐसे में यह जरूरी है कि ज्यादा बड़े इलाके की हिफाजत को सुनिश्चित किया जाए। 6 मार्च 2009 को हुए एडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल परीक्षण में हमलावर मिसाइल को 75 किमी की ऊंचाई पर मार गिराया गया था। भारत ने पृथ्वी एयर डिफेंस सिस्टम (पीएडी) का पहला परीक्षण नवंबर 2006 में किया था। इसके एडवांस्ड एअर डिफेंस सिस्टम (एएडी) का परीक्षण दिसंबर 2007 में किया गया था। बता दें कि अमेरिका, रूस और इजराइल के बाद भारत चौथा ऐसा देश है, जिसके पास स्वदेशी मिसाइल छतरी है।


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