बदलती जरूरत और बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच भारतीय सेना अपने ढांचे में बड़े पैमाने पर फेरबदल की तैयारी कर रही है। यहां तक कि फौज की योजना अपने मुख्यालय का चेहरा और कमानों के कामकाज का दायरा भी बदलने की है, जिसके लिए प्रयोग इस साल से शुरू होंगे। वहीं सेना मुख्यालय अपनी ताकत को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए तोपखाने और हवाई क्षमता विस्तार की रफ्तार भी बढ़ा रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान सेना में ढांचागत सुधार की लंबी लकीर खींचने को बेताब सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने इसके लिए हुए अध्ययन पर क्रियान्वयन का कार्यक्रम तय कर दिया है। सेना दिवस की पूर्व संध्या पर मीडिया से मिले जनरल वीके सिंह ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से मुकाबले के लिए उनकी योजना फौज को अधिक घातक और प्रभावी बनाने की है। इसके तहत न केवल कमान की जिम्मेदारियों और दायरों में बदलाव संभव है, बल्कि नई कमान बनाने के विकल्प भी खुले हैं। सेना का लक्ष्य मैदानी क्षेत्र से लेकर पहाड़ों तक समान मारक क्षमता हासिल करने का होगा। जनरल सिंह ने बताया कि बदलाव की प्रक्रिया का आगाज करते हुए सेना मुख्यालय इस साल से ढांचागत सुधार के प्रयोग शुरू करेगा। साथ ही क्षमता विस्तार और भविष्य की जरूरतों के मद्देनजर बनाए गए इस सुधार कार्यक्रम के अन्य कई मोर्चो पर भी क्रियान्वयन शुरू करेगा। सेना मुख्यालय की ओर से इस संबंध में कराया गया अध्ययन पिछले साल पूरा हो गया था। उसके बाद सुधार व संशोधन के मुफीद विकल्प चुनने को लेकर इस समय उप-अध्ययन जारी है। इसी कड़ी में जमीनी ढांचे में कुछ प्रयोग किए जाने हैं। सूत्रों के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह इस बात को लेकर खासे उत्सुक हैं कि सुधार कार्यक्रम के तहत तय अधिकतर बदलावों पर 2012 तक काम शुरू हो जाए। वहीं सेना के मुखिया की कवायद फौज के तोपखाने की तस्वीर बदलने की भी है। इस संबंध में सेना प्रमुख का कहना था कि इस बरस के अंत तक तोपों के लिए चल रहे परीक्षण में कुछ को फौज में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सेल्फ प्रोपेल्ड और टोड गन के लिए परीक्षण चल रहा है। उल्लेखनीय है कि बोफोर्स के बाद बहुत लंबे समय से फौज का तोपखाना नई तोपों का इंतजार कर रहा है। वहीं सेना अपने हवाई क्षमताओं के लिए अपने हेलीकॉप्टर बेड़े की ताकत बढ़ाने की भी तैयार कर रही है।
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