चीन के अंतिम छोर तक मार करने में सक्षम इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टक मिसाइल ‘अग्नि-5’ के फ्लॉइट टेस्ट समेत इस साल कुल 10 मिसाइलों के परीक्षण की तैयारी में भारत के रक्षा वैज्ञानिक जी-जान से जुटे हुए हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा वैज्ञानिकों के लिए विभिन्न रेंज और प्रकृति की सभी 10 मिसाइलों का परीक्षण ‘अग्नि परीक्षा’ के समान है, लेकिन अग्नि-5 की फ्लॉइट टेस्ट खास मायने रखती है। इसका परीक्षण सितम्बर माह में निर्धारित किया गया है। अग्नि-5 का वजन 49 टन होगा जो अग्नि-3 से एक टन अधिक है। पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करनेवाली अग्नि-5 मिसाइल के फ्लॉइट परीक्षण में भारत अगर कामयाब होता है तो वह दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनके पास इंटरकांटिनेंटल (उप महाद्वीपीय) मिसाइलें पहले से मौजूद हैं। ये देश हैं- अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और इस्रइल। रक्षा वैज्ञानिक इस साल सबसे पहले के-15 नामक मिसाइल के परीक्षण में जुटे हुए हैं, जिसका नाम सागरिका भी है। यह बहुत ही विशेष तरह की मिसाइल है। पनडुब्बी से छोड़े जानेवाली यह शार्ट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल पानी के भीतर 700 किमी तक मार करने में सक्षम है। इसका प्रयोग अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी से ही किया जा सकता है। डीआरडीओ द्वारा निर्मित 10 मीटर लंबी और 17 टन भारी इस मिसाइल को इस परीक्षण के बाद सेना में शामिल किया जाएगा। इस मिसाइल का विकास कार्य 1998 से शुरू किया गया था, जिसकी अनुमति तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज ने दी थी। के-15 मिसाइलों के दो अन्य वर्जनों पर भी काम चल रहा है जो एक हजार और 1900 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होंगी। इस श्रेणी की दो हजार किलोमीटर तक मार करनेवाली अग्नि-2 और 3500 किलोमीटर तक मार करनेवाली अग्नि- 3 के नए परीक्षण भी इस साल निर्धारित किए गए हैं। पिछले माह अग्नि-3 का परीक्षण नाकामयाब हो गया था। रक्षा वैज्ञानिकों ने इस मिसाइल का वजन कम करने के लिए इसमें कुछ तब्दीलियां की हैं, जिसका परीक्षण किया जाना है। इस साल अप्रैल माह तक 700 किलोमीटर रेंजवाली अग्नि-1 तथा 2000 किलोमीटर रेंज की अग्नि-2 मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद अग्नि-3 की बारी आएगी। पिछले साल पृथ्वी मिसाइल के वायुसेना वर्जन पृथ्वी-11 मिसाइल के परीक्षण में भारत को नाकामयाबी हाथ लगी थी। इस साल पुरानी चूक से सबक लेते हुए इसके नवीनतम परीक्षण की तैयारी की गई है। इसके पहले पृथ्वी मिसाइल का नया टेस्ट किया जाएगा। सेना के लिए सतह से सतह पर मार करनेवाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 150 किलोमीटर तक है, लेकिन इसका वायुसेना वर्जन पृथ्वी-11 250 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगा। इसी तरह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों से 100 किलोमीटर तक हवा से हवा में मार करनेवाली पूरी तरह भारतीय मिसाइल ‘एस्ट्रा’ का परीक्षण भी शेड्यूल किया गया है। इस तरह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने पिछली नाकामयाबियों से सबक लेते हुए इस साल मिसाइल परीक्षणों की पूरी श्रृंखला का चार्ट तैयार कर रखा है, जिसे अंजाम तक पहुंचाने की कवायद की जा रही है।
Friday, February 4, 2011
इस साल 10 मिसाइलें आजमाएगा भारत
चीन के अंतिम छोर तक मार करने में सक्षम इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टक मिसाइल ‘अग्नि-5’ के फ्लॉइट टेस्ट समेत इस साल कुल 10 मिसाइलों के परीक्षण की तैयारी में भारत के रक्षा वैज्ञानिक जी-जान से जुटे हुए हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा वैज्ञानिकों के लिए विभिन्न रेंज और प्रकृति की सभी 10 मिसाइलों का परीक्षण ‘अग्नि परीक्षा’ के समान है, लेकिन अग्नि-5 की फ्लॉइट टेस्ट खास मायने रखती है। इसका परीक्षण सितम्बर माह में निर्धारित किया गया है। अग्नि-5 का वजन 49 टन होगा जो अग्नि-3 से एक टन अधिक है। पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करनेवाली अग्नि-5 मिसाइल के फ्लॉइट परीक्षण में भारत अगर कामयाब होता है तो वह दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनके पास इंटरकांटिनेंटल (उप महाद्वीपीय) मिसाइलें पहले से मौजूद हैं। ये देश हैं- अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और इस्रइल। रक्षा वैज्ञानिक इस साल सबसे पहले के-15 नामक मिसाइल के परीक्षण में जुटे हुए हैं, जिसका नाम सागरिका भी है। यह बहुत ही विशेष तरह की मिसाइल है। पनडुब्बी से छोड़े जानेवाली यह शार्ट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल पानी के भीतर 700 किमी तक मार करने में सक्षम है। इसका प्रयोग अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी से ही किया जा सकता है। डीआरडीओ द्वारा निर्मित 10 मीटर लंबी और 17 टन भारी इस मिसाइल को इस परीक्षण के बाद सेना में शामिल किया जाएगा। इस मिसाइल का विकास कार्य 1998 से शुरू किया गया था, जिसकी अनुमति तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज ने दी थी। के-15 मिसाइलों के दो अन्य वर्जनों पर भी काम चल रहा है जो एक हजार और 1900 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होंगी। इस श्रेणी की दो हजार किलोमीटर तक मार करनेवाली अग्नि-2 और 3500 किलोमीटर तक मार करनेवाली अग्नि- 3 के नए परीक्षण भी इस साल निर्धारित किए गए हैं। पिछले माह अग्नि-3 का परीक्षण नाकामयाब हो गया था। रक्षा वैज्ञानिकों ने इस मिसाइल का वजन कम करने के लिए इसमें कुछ तब्दीलियां की हैं, जिसका परीक्षण किया जाना है। इस साल अप्रैल माह तक 700 किलोमीटर रेंजवाली अग्नि-1 तथा 2000 किलोमीटर रेंज की अग्नि-2 मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद अग्नि-3 की बारी आएगी। पिछले साल पृथ्वी मिसाइल के वायुसेना वर्जन पृथ्वी-11 मिसाइल के परीक्षण में भारत को नाकामयाबी हाथ लगी थी। इस साल पुरानी चूक से सबक लेते हुए इसके नवीनतम परीक्षण की तैयारी की गई है। इसके पहले पृथ्वी मिसाइल का नया टेस्ट किया जाएगा। सेना के लिए सतह से सतह पर मार करनेवाली इस मिसाइल की मारक क्षमता 150 किलोमीटर तक है, लेकिन इसका वायुसेना वर्जन पृथ्वी-11 250 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होगा। इसी तरह भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों से 100 किलोमीटर तक हवा से हवा में मार करनेवाली पूरी तरह भारतीय मिसाइल ‘एस्ट्रा’ का परीक्षण भी शेड्यूल किया गया है। इस तरह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने पिछली नाकामयाबियों से सबक लेते हुए इस साल मिसाइल परीक्षणों की पूरी श्रृंखला का चार्ट तैयार कर रखा है, जिसे अंजाम तक पहुंचाने की कवायद की जा रही है।
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