Thursday, February 3, 2011

बांग्लादेशियों की घुसपैठ से हरियाणा को नया खतरा


हरियाणा में माओवाद के बढ़ते प्रसार के बाद अब बांग्लादेशियों से नया खतरा पैदा हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी प्रक्षेत्र (एनसीआर) के दायरे में राज्य के फरीदाबाद और गुड़गांव में गैर कानूनी तरीके से बांग्लादेशियों की घुसपैठ तेजी से बढ़ी है। राज्य में अवैध हथियारों की तस्करी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित सम्मेलन में हरियाणा की ओर से संसदीय कार्यमंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए केंद्र सरकार से मदद की गुहार की। सुरजेवाला ने कहा कि एनसीआर के गुड़गांव, फरीदाबाद जैसे शहरों में बांग्लादेशियों की आवाजाही बढ़ी है, जिस पर अंकुश लगाने को सरकार ने उच्च प्राथमिकता दी है। बांग्लादेशी अपराधी गिरोहों का संचालन ढाका से दिल्ली तक हो रहा है। अब इसका कुप्रभाव जीटी रोड से जुड़े करनाल, अंबाला और पंचकूला शहरों में भी दिखने लगा है। हरियाणा पुलिस को जांच में कई चौंकाने तथ्य मिले हैं। सुरजेवाला ने राज्य में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से तस्करी के मार्फत पहुंच रहे अवैध हथियारों पर चिंता जताई। उन्होंने इसके लिए संबंधित राज्यों के साथ केंद्र से भी मदद मांगी। राज्य सरकार माओवाद के प्रसार पर अंकुश लगाने की भरपूर कोशिश में लगी है, लेकिन संसाधनों का अभाव इसमें आड़े आ रहा है। सुरजेवाला ने केंद्र सरकार से भारतीय रिजर्व बटालियन की एक महिला बटालियन सहित चार और बटालियनों के गठन की तत्काल मंजूरी देने का आग्रह किया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्होंने एक क्षेत्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद मांगी। राष्ट्रीय राजधानी के नजदीक होने के नाते फरीदाबाद व गुड़गांव में भी वे सारी चुनौतियां आ रही हैं, जो दिल्ली के समक्ष है। हरियाणा ने इनसे निपटने के लिए यहां की पुलिस को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस करने की मांग की। दिल्ली की तर्ज पर गुड़गांव में डिजिटल टंैकिंग सिस्टम तो मिल गया है, लेकिन फरीदाबाद अभी इससे वंचित है। हरियाणा ने सम्मेलन में हिंसक भीड़ पर कारगर तरीके से काबू पाने के लिये गैर घातक प्रौद्योगिकी और उपकरण विकसित करने के अनुसंधान पर जोर दिया। सुरजेवाला ने कहा कि प्रजातांत्रिक प्रणाली में ऐसे उपकरणों की सख्त जरूरत है। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए वर्तमान में पानी की बौछारों वाली गाड़ी का उपयोग प्रचलित है। लेकिन इसके प्रयोग में कठिनाई आती है।


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