Saturday, February 12, 2011

surakshit seemain


भारतीय वायुसेना ने दो मोर्चों पर युद्ध मुकाबले की स्थिति से निपटने में अपने को तैयार करने के उद्देश्य से अपने स्वीकृत लड़ाकू विमानों के बेड़ों की संख्या बढ़ाकर 45 करने के लिए रक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है। वायुसेना के वर्तमान बेड़ों की संख्या 33 है। एक बेड़े में करीब 18 से 20 विमान होते हैं। वास्तवित नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की सेना की ओर से तैनाती बढ़ने के मद्देनजर वायुसेना पूर्वोत्तर क्षे़त्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है तथा उसकी योजना वहां वर्ष 2015 तक सुखोई 30 एमकेआइ लड़ाकू विमानों के चार बेड़े तैनात करने की है। यह पूछे जाने पर कि वायुसेना ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कब तक की समयसीमा निर्धारित की है, सूत्रों ने कहा कि भविष्य का अधिग्रहण वायुसेना को सरकार की ओर से मिलने वाली स्वीकृति पर निर्भर करेगा। वायुसेना के आधुनिकीकरण योजना के तहत पश्चिमी मोर्चें पर वायुसेना अड्डों को आधुनिक आधारभूत संरचना और नए लड़ाकू विमानों से लैस किया जा रहा है। वायुसेना की इस दशक के अंत तक 350 लड़ाकू विमान अपने बेड़े में शामिल करने की योजना है। इनमें 126 बहुद्देश्य लड़ाकू विमान (एम-एमआरसीए), 160 नए सुखोई एमकेआइ और 140 स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) शामिल हैं। नए सुखोई 30 विमानों के लिए समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं तथा 126 एम-एमआरसीए के लिए समझौता यह इस वर्ष सितम्बर के अंत में होने की संभावना है। एम-एमआरसीए समझौते के लिए रूस का मिग 35, अमेरिका का एम 16 और एफ.ए18, स्वीडन का ग्रिपन, यूरोपीय यूरोफाइटर और फ्रांस का राफेल दौड़ में हैं। इस पर करीब 11 अरब डॉलर का खर्च होने का अनुमान है। वायुसेना इसके अलावा रूसी मिग विमान 21, 23 और 27 श्रृंखला के विमानों को चरणबद्ध तरीके से अपने बेड़े से हटा रही है। इसमें सबसे पुराने मिग 21 टाइप 77 के इस वर्ष के अंत तक हटने की संभावना है।

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