| चीन की सेना के आधुनिकीकरण पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बुधवार को कहा कि भारत को अपनी रक्षा तैयारियों की व्यापक समीक्षा करने की जरूरत है। एंटनी ने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में चौकस रहने की भी जरूरत है। एंटनी ने एशियाई सुरक्षा सम्मेलन के इतर संवाददाताओं से कहा कि चीन की सशस्त्र सेना का आधुनिकीकरण और उसका बढ़ता सैन्य खर्च गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन हम अनावश्यक रूप से चिंतित नहीं हैं क्योंकि अब हमें भी अपने सशस्त्र बलों को आधुनिक और मजबूत करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि हमें अपनी क्षमताओं और बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत करना होगा और हम ऐसा कर रहे हैं। सरकार भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र बलों को और आधुनिक करने के साथ बुनियादी सुविधाओं को और मजबूत कर रही है। चीन ने जब से भारत के साथ अपनी सीमा पर मिसाइल तैनात करना और अपनी सैन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना शुरू किया है, तब से भारत ने भी वहां अपनी सड़क और हवाई क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाना शुरू कर दिया है। भारत सु-30 एमकेआई विशेष विमानों के चार दस्ते खरीदने की प्रक्रिया में है और सेना की दो माउंटेन डिवीजन स्थापित कर रहा है। मंत्री ने कहा कि सशस्त्र बलों की क्षमताओं की समीक्षा एक जारी और सतत प्रक्रिया है और रक्षा तैयारियों को नियमित तौर पर देखा जा रहा है और यदि कोई खामी पाई जाती है तो उसे खत्म किया जाएगा। जब एंटनी से पूछा गया कि क्या भारतीय सैन्य आधुनिकीकरण चीन की तुलना में धीमी गति से चल रहा है तो उन्होंने कहा कि हम अपने सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण किसी अन्य देश के आधुनिकीकरण को दिमाग में रखकर नहीं कर रहे। हम हमारे आसपास उत्पन्न सुरक्षा परिदृश्य की व्यापक समीक्षा के आधार पर अपने बलों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। भारत, अमेरिका और जापान के बीच त्रिपक्षीय मालाबार अभ्यास को लेकर चीन की आपत्ति की खबरों पर रक्षा मंत्री ने कहा कि मालाबार अभ्यास 15 साल पहले शुरू हुआ था और हम इसे हर साल करते हैं। इसमें किसी देश विशेष के खिलाफ कुछ नहीं है। यह हमारी नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के दो सबसे बड़े देशों के तौर पर भारत और चीन को जलवायु परिवर्तन और व्यापार जैसे समान मुद्दों पर सहयोग का स्तर बढ़ाने की जरूरत है। |
Friday, February 18, 2011
चीनी सेना का आधुनिकीकरण खतरनाक!
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