नौसेना हेलीकॉप्टर सौदे की खुली निविदा जारी होगीनई दिल्ली (एजेंसियां)। भ्ाारत ने 16 बहुपयोगी हेलीकॉप्टरों (एमआरएच) की आपूर्ति अमेरिका के विदेशी सैन्य सौदा माध्यम से करने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया और अरबों डॉलर के इस सौदे के लिए खुली निविदा जारी करने का फैसला किया है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी नौसेना ने नौसेना की 16 एमआरएच की जरूरतों को पूरा करने के लिए एमएच-60 ‘रोमियो’ अंतर सरकारी समझौते के तहत देने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उसे नामंजूर कर दिया गया।
विदेशी सैन्य सौदा (एफएमएस) के तहत खरीद अंतर-सरकारी समझौते के अनुसार होती है जहां बिना किसी वैश्विक निविदा जारी किए अमेरिकी सरकार सीधे उत्पाद देने का प्रस्ताव देती है। सूत्रों ने बताया कि सरकार के फैसले के बाद केवल दो कंपनियां मैदान में बचती हैं। एक अमेरिकी एस-70 ब्रावो और दूसरी यूरोपीय एनएच-90 जिनके उत्पादों का परीक्षण इस साल मार्च के बाद शुरू किया जाएगा। अपने पुराने पड़ते सीकिंग बेड़े को हटाने के लिए नौसेना को एमआरएच की तत्काल जरूरत है। सीकिंग को 1970 में शामिल किया गया था। इस बेड़े में 40 सी किंग हेलीकाप्टर थे लेकिन दुर्घटनाओं के बाद इनकी संख्या 30 रह गई है। बहुपयोगी हेलीकॉप्टर (एमआरएच) की प्राथमिक भूमिका पनडुब्बी रोधी और सतह रोधी युद्ध को अंजाम देने की होगी जबकि उसकी दूसरी भूमिका तलाशी और बचाव, मालवाहक और आपात निकासी की होगी। 16 एमआरएच के लिए आरंभिक आरएफपी 2006 के शुरूआत में जारी की गई थी लेकिन दो साल बाद निविदाओं को रद्द कर दिया गया था। बाद में सितंबर 2008 में उसे दोबारा जारी किया गया। निविदा के मुताबिक, ठेका पाने वाली कंपनी को 46 महीनों के भीतर तीन चरणों में पहले एमआरएच की आपूर्ति करनी होगी। मौजूदा ठेका पूरा हो जाने के बाद नौसेना के पास 44 अन्य हेलीकॉटरों का आर्डर देने का विकल्प होगा। अनुबंध में प्रावधान है कि ठेका पाने वाली कंपनी को ठेके की 30 फीसदी राशि भारतीय रक्षा उधोग में निवेश करनी होगी।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी नौसेना ने नौसेना की 16 एमआरएच की जरूरतों को पूरा करने के लिए एमएच-60 ‘रोमियो’ अंतर सरकारी समझौते के तहत देने का प्रस्ताव दिया था लेकिन उसे नामंजूर कर दिया गया।
विदेशी सैन्य सौदा (एफएमएस) के तहत खरीद अंतर-सरकारी समझौते के अनुसार होती है जहां बिना किसी वैश्विक निविदा जारी किए अमेरिकी सरकार सीधे उत्पाद देने का प्रस्ताव देती है। सूत्रों ने बताया कि सरकार के फैसले के बाद केवल दो कंपनियां मैदान में बचती हैं। एक अमेरिकी एस-70 ब्रावो और दूसरी यूरोपीय एनएच-90 जिनके उत्पादों का परीक्षण इस साल मार्च के बाद शुरू किया जाएगा। अपने पुराने पड़ते सीकिंग बेड़े को हटाने के लिए नौसेना को एमआरएच की तत्काल जरूरत है। सीकिंग को 1970 में शामिल किया गया था। इस बेड़े में 40 सी किंग हेलीकाप्टर थे लेकिन दुर्घटनाओं के बाद इनकी संख्या 30 रह गई है। बहुपयोगी हेलीकॉप्टर (एमआरएच) की प्राथमिक भूमिका पनडुब्बी रोधी और सतह रोधी युद्ध को अंजाम देने की होगी जबकि उसकी दूसरी भूमिका तलाशी और बचाव, मालवाहक और आपात निकासी की होगी। 16 एमआरएच के लिए आरंभिक आरएफपी 2006 के शुरूआत में जारी की गई थी लेकिन दो साल बाद निविदाओं को रद्द कर दिया गया था। बाद में सितंबर 2008 में उसे दोबारा जारी किया गया। निविदा के मुताबिक, ठेका पाने वाली कंपनी को 46 महीनों के भीतर तीन चरणों में पहले एमआरएच की आपूर्ति करनी होगी। मौजूदा ठेका पूरा हो जाने के बाद नौसेना के पास 44 अन्य हेलीकॉटरों का आर्डर देने का विकल्प होगा। अनुबंध में प्रावधान है कि ठेका पाने वाली कंपनी को ठेके की 30 फीसदी राशि भारतीय रक्षा उधोग में निवेश करनी होगी।
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