नए साल के दूसरे महीने की शुरुआत में ही मिग लड़ाकू विमान दुर्घटनाओं की फेहरिस्त में एक और हादसा जुड़ गया। शुक्रवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर के नजदीक गिरे मिग-21 लड़ाकू विमान में पायलट की जान तो बच गई, लेकिन बीते आठ महीनों के दौरान भारतीय वायुसेना के बेड़े से तीसरा मिग-21 लड़ाकू विमान छीन लिया। वायुसेना मुख्यालय के मुताबिक हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं प्रारंभिक पड़ताल के मुताबिक दुर्घटना का कारण इंजन की गड़बड़ी बताया जा रहा है। वैसे इससे पहले हलवारा में जून 2010 में हुए पिछले मिग-21 हादसे की तरह इस दुर्घटना में भी पायलट सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहा। नियमित उड़ान पर निकले स्क्वाड्रन लीडर फाल्गुनी रॉय ने समय रहते विमान को छोड़ दिया था। विमान करीब सुबह 11:30 बजे एक गांव में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। बीते सवा साल में वायुसेना अपने हवाई बेड़े में चार मिग-27, तीन मिग-21 और तीन लड़ाकू हेलीकॉप्टर खो चुकी है। वायुसेना मुख्यालय के दस्तावेजों के मुताबिक जनवरी 2009 से लेकर अब तक मिग-21 विमान दुर्घटनाओं का आंकड़ा छह तक पहुंच चुका है। वहीं बीते चार सालों में मिग श्रेणी के विमानों के धराशायी होने की संख्या 26 हो गई है। वैसे अभी तक मिग श्रेणी के करीब 180 विमान भारत में दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इसमें करीब 50 पायलटों की जान भी गई है। मिग-21 श्रेणी के विमानों से फाइटर पायलट बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि तमाम हादसों के बावजूद वायुसेना मुख्यालय इन रूसी विमानों की उपयोगिता का हवाला देते हुए इनकी उड़ान को जारी रखे हुए है। वैसे 2010 में मिग-27 विमान के साथ हुए हादसे में एक पायलट की जान गंवाने के बाद वायुसेना ने कुछ वक्त के लिए इन विमानों के पूरे बेड़े को जमीन पर उतार दिया था। बाद में तकनीकी परीक्षण कर कुछ महीने बाद ही इन्हें उड़ाने की हरी झंडी दे दी गई.
No comments:
Post a Comment