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पिछले 25 साल में एक भी तोप
नहीं खरीद पाई सेना
रक्षा संगठनों को और वित्तीय शक्तियां
दी जाएंगी, लेकिन
पाई-पाई का होगा हिसाब : एंटनी
नई दिल्ली (एसएनबी)। रक्षा मंत्रालय
ने अब देश में ही बनी 144 नई
उन्नत बोफोर्स
तोपें खरीदने का फैसला किया है। रक्षामंत्री एके एंटनी ने सोमवार को
यहां एक रक्षा समारोह में सरकार के इस फैसले का खुलासा करते हुए कहा कि रक्षा
खरीदारी परिषद (डीएसी) ने उन्नत 155
एमएम-45 कैलिबर वाली 144
तोपों
की खरीद को मंजूरी दी है। रक्षामंत्री एंटनी ने देश में ही
बनी ‘देसी बोफोर्स
तोपों’ की
खरीदारी की सूचना ऐसे समय दी है जब राजीव गांधी सरकार के समय हुए बोफोर्स तोप घोटाले के काले
साए के बाद सेना के लिए तब से एक भी
नई तोप नहीं खरीदी गई है। दिलचस्प बात यह है कि उस समय
बोफोर्स तोपें खरीदने
के साथ साथ उनकी टेक्नोलाजी का हस्तांतरण भी किया गया था। तब से देश में
ही तोप बनाने की दिशा में काम भी नहीं हुआ। सेना पिछले 25 वर्ष से कई प्रयासों
के बावजूद एक भी नई तोप हासिल नहीं कर पाई है। तोपखाना खाली होते जाने
और सेना का दबाव बढ़ने पर पिछले साल अक्टूबर में रक्षा खरीदारी परिषद ने
दो प्रोटोटाइप 155 एमएम
39 कैलिबर
तथा दो प्रोटोटाइप 45 कैलिबर
की तोपें बनाने
के लिए आर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड को मंजूरी दी थी। दोनों तोपें तैयार होने
के बाद उन्हें पोखरण में परीक्षणों के दौर से गुजारा गया। यह तोपें सभी
प्रांरभिक मानकों पर खरी उतरीं और परीक्षण के नतीजों को देखते हुए सरकार
ने इन्हें खरीदने का निर्णय लिया। एंटनी ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने
इन 155 मिमी
की होवित्जर तोपों को सेना में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इनके फाइनल परीक्षण
का काम इसी वर्ष शुरू होगा। इसके
शीतकालीन परीक्षण दिसम्बर में और ग्रीष्मकालीन परीक्षण जून
में होंगे। रक्षामंत्री
ने उम्मीद जताई कि यह परीक्षण सफल होंगे और भारत को 30 वर्ष बाद
155 मिमी
की तोपें मिल सकेंगी। रक्षामंत्री ने हाल ही में इन तोपों के विकास
की प्रगति का जायजा लेने के लिए जबलपुर का दौरा किया था। रक्षा मंत्रालय
द्वारा डीआरडीओ प्रमुख की वित्तीय शक्तियों में कटौती करने संबंधी हालिया
खबरों के बारे में पूछे जाने पर एंटोनी ने कहा कि यह सही नहीं है। हम
रक्षा मंत्रालय की विभिन्न शाखाओं को और शक्तियां सौंपने की प्रक्रि या में
हैं। उन्होंने कहा कि जब शक्तियां सौंपी जाएंगी तो हमें चीजों को अधिक व्यवस्थित
करना होगा। यह सिर्फ डीआरडीओ अथवा ब्रह्मोस तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रक्षा मंत्रालय परिवार के
लिए है। हमारा पिछला अनुभव कहता है कि
अधिक शक्तियां देने के साथ अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
नियंतण्रऔर संतुलन होना चाहिए। मंत्री ने कहा कि वित्तीय प्रबंधन में और
जवाबदेही और पारदर्शिता
लाने के प्रयास किसी एक व्यक्ति अथवा एक संस्थान के लिए नहीं बल्कि
सबके भले के लिए हैं। एंटनी ने कहा कि एक तरफ शक्तियां सौंपने की प्रक्रि
या चल रही है और दूसरी तरफ संस्थागत नियंतण्रऔर संतुलन की प्रक्रि या
चल रही है ताकि रक्षा मंत्रालय द्वारा खर्च किया जाने वाला एक एक रुपया अधिक
पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ खर्च हो। डीआरडीओ में कुप्रबंधन की तरफ इशारा
करने वाली एक प्रारंभिक आंतरिक लेखा रिपोर्ट के बारे में पूछने पर एंटोनी
ने कहा कि मैं एक प्रारंभिक आंतरिक लेखा रिपोर्ट के बारे में टिप्पणी
नहीं करूंगा, अगर
अंतिम रिपोर्ट होगी, तभी
मैं कुछ कहूंगा। सशस्त्र
सेनाओं में अनुशासनहीनता के बढ़ते मामलों के बारे में
रक्षामंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों में सेनाएं बहुत सख्त हैं। उन्होंने कहा कि
कुछ कमियां हो सकती
हैं, लेकिन
मैं आपसे कह सकता हूं कि अन्य समाज के मुकाबले सशस्त्र सेनाएं ही ऐसे क्षेत्र हैं जहां
कार्रवाई हो रही है। जब भी कोई शिकायत आती है,
उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाता और उनकी जांच होती है। वह
वरिष्ठतम अधिकारियों
के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। रक्षा लेखा दिवस के मौके पर एक अन्य
कार्यक्रम में अपने मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के सम्मेलन में रक्षामंत्री
ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार को जनता के सामने जवाब देना पड़ता है और उन्हें बताना पड़ता है कि
पैसे का पूरा पूरा सदुपयोग हो रहा
है। रक्षामंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सैन्य
प्रमुखों और कुछ रक्षा संगठनों को दिए गए वित्तीय खर्च के अधिकार पर पहरे बैठाते
हुए रक्षा मंत्रालय
ने उनके लिए वित्तीय सलाहकार नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस कदम
को सैन्य प्रमुखों के वित्तीय अधिकारों पर अंकुश के रूप में देखा गया है।
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Rashtirya Sahara National Edition Dete -02-10-2012 Pej 11
Suraksha
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