ठ्ठप्रणय उपाध्याय, नई
दिल्ली सेना
और वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए करीब नौ हजार करोड़ रुपये से
अधिक की मिसाइल खरीदने की तैयारी है। इसके तहत सुखोई-30 लड़ाकू
विमानों को
अचूक ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस करने की योजना है। वहीं टी-90 टैंकों
के लिए
इनवार मिसाइलें भी खरीदी जानी हैं। सूत्रों के अनुसार
प्रधानमंत्री की अगुआई में गुरुवार को होने वाली केंद्रीय
मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति की बैठक में इस बाबत प्रस्ताव रखा
जाना है, जिस
मुहर लगने की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार करीब 200 ब्रह्मोस
मिसाइलें खरीदी जानी हैं। साथ ही दो सुखोई विमानों में जरूरी परिवर्तन
भी होने हैं। करीब 290 किमी
तक मार करने में सक्षम ब्राह्मोस मिसाइलें भारतीय
वायुसेना के सुखोई-30 लड़ाकू
विमानों की मारक क्षमता में कई गुना इजाफा कर
देंगी। भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्राह्मोस लिमिटेड से
मिसाइल खरीद की इस योजना पर छह हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान
है। भारत पूर्वी और उत्तरी सीमा क्षेत्र में सुखोई लड़ाकू विमानों की
नई स्क्वाड्रन खड़ी कर रहा है वहीं वायुसेना के लिए रूस से 42 सुखोई विमान
खरीदने की भी योजना है। रूस के ही सहयोग से टी-90 टैंकों
से मार करने वाली इनवार मिसाइलों भी खरीदी जानी हैं। करीब तीन
हजार करोड़ रुपये के इस सौदे के तहत 25 हजार मिसाइल खरीदने
का प्रस्ताव है। इसमें 10 हजार
मिसाइलें जहां रूस से खरीदी जाएंगी वहीं 15 हजार
मिसाइलों की खरीद सरकारी उपक्रम भारत डायनामिक्स लिमिटेड से की
जानी हैं। टी-90 टैंक
के बैरल से दागे जाने के बाद 70 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से मार
करने वाली इनवार मिसाइल विस्फोटकों को झेलने में सक्षम बख्तरबंद कवच को भी
भेदने में सक्षम है। सेमी ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम से लैस इस मिसाइल में
लेजर सेंसर भी हैं, जो
इसके निशाने को अचूक बनाते हैं। यह मिसाइल स्थिर और
गतिमान लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है।
Dainik Jagran Nation Edition 18-10-2012 Shuraksha Pej-6
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