Saturday, October 13, 2012

गोर्शकोव के लिए भारत को अभी करना होगा इंतजार




ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली रूस से विमानवाहक युद्धपोत गोर्शकोव हासिल करने के लिए भारत को करीब एक साल का इंतजार और करना होगा। सैन्य सहयोग वार्ता के लिए भारत आए रूसी रक्षा मंत्री अनातोली सर्दुकोव ने अपने समकक्ष एके एंटनी से बातचीत में कहा कि रूस 2013 की चौथी तिमाही में ही गोर्शकोव भारत को सौंप पाएगा। भारत ने इस देरी पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि युद्धपोत समय पर देने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जाना चाहिए। भारत और रूस के बीच सैन्य व तकनीकी सहयोग पर बने अंतर सरकारी आयोग की 12वीं बैठक में दोनों देशों ने पांचवी पीढ़ी के युद्धक विमान व ब्रह्मोस मिसाइल का नया संस्करण तैयार करने, सुखोई-30 व एमआइ-17 हेलीकॉप्टरों की खरीद और भारतीय पनडुब्बी परियोजना पी-75 में रूसी शिरकत समेत अनेक मुद्दों पर बात की। लेकिन, एंटनी और सर्दुकोव के बीच सीधी बातचीत से लेकर प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता में 2.3 अरब डॉलर के गोर्शकोव सौदे में देरी का मुद्दा ही छाया रहा। संयुक्त प्रेसवार्ता में इस बारे में पूछे जाने पर एंटनी ने कहा, हमने रूस को बता दिया है कि इस विमानवाहक पोत का समय से भारत को मिलना कितना जरूरी है। लेकिन, एंटनी ने फिलहाल भारत की ओर से रूस पर इस देरी के लिए किसी तरह का आर्थिक हर्जाना लगाए जाने की संभावना को नकार दिया। इस मामले पर रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि गोर्शकोव पोत के इंजन और मुख्य बॉयलर में आई तकनीकी खामियों के कारण इसके समुद्र परीक्षणों को रोकना पड़ा है। सेवमाश बेस पर इसकी दिक्कतों को दूर किया जा रहा है और अप्रैल, 2013 में रूस पुन: इसके परीक्षण शुरू करेगा। महत्वपूर्ण है कि रूस अब तक 11 हजार समुद्री मील के परीक्षण ट्रायल कर चुका है। भारत की चिंता से सहमति जताते हुए रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका देश भारत को बेहतरीन परीक्षणों के बाद यह पोत देना चाहता है। दोनों देशों में सैन्य सहयोग को और बढ़ाने के लिए रूस ने भारत की पनडुब्बी निर्माण परियोजना प्रोजेक्ट-75 के तहत उन्नत मिसाइलें देने की पेशकश की है। इसके अलावा नई पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइलों के संयुक्त विकास पर भी काम शुरू करने का प्रस्ताव दिया। सर्दुकोव ने कहा कि भारतीय सेना के लिए एक हजार मिसाइलों के निर्माण की योजना है। इसके अलवा पांचवीं पीढ़ी के नए युद्धक विमान के संयुक्त विकास की प्रगति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि 2020 तक इसका उत्पादन शुरू हो जाना है। इस दौरान रूस से 42 नए सुखोई-30 लड़ाकू विमानों और 59 एमआइ-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की खरीद पर भी बात हुई। रूसी रक्षा मंत्री ने कहा कि नए सौदे के लिए भारत को प्रारूप सौंपा गया है। अब फैसला भारत को करना है।
Dainik Jagran National Edition 11-10-2012 Pej-2 lqj{kk)

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