Wednesday, October 3, 2012

भारत दर्ज कराएगा गोर्शकोव की देरी पर शिकायत





ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई दिल्ली विमानवाहक युद्धपोत गोर्शकोव (आइएनएस विक्रमादित्य) पर लगातार देरी भारत की खीझ बढ़ा रही है। पोत के इंजन में खामियों के चलते इसको सौंपे जाने की तारीखें एक बार फिर 2013 के मध्य तक टलने के बाद भारत 4 अक्टूबर को रूस के साथ हो रही सैन्य वार्ता में इस मुद्दे को उठाएगा। भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग के लिए गठित अंतर सरकारी आयोग की बैठक के लिए रूसी रक्षा मंत्री अनातोली सर्दुकोव नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। सर्दुकोव और रक्षा मंत्री एके एंटनी दोनों मुल्कों के बीच रक्षा सहयोग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की अगुआई करेंगे। सूत्रों के अनुसार बातचीत के दौरान भारत गोर्शकोव को पाने में हो रही देरी पर अपनी खिन्नता सामने रखेगा। बताते चलें कि गोर्शकोव वैसे तो इस साल दिसंबर के पहले हफ्ते में भारत को सौंपा जाना था, लेकिन समुद्री ट्रायल के दौरान बॉयलर में आई कुछ तकनीकी दिक्कतों के चलते रूस ने इसे अगले साल के मध्य से पहले देने में अक्षमता जताई है। गोर्शकोव में खामियों के बीच इसकी कीमत बढ़ने की आशंकाएं भी हैं। हालांकि, भारत किसी नई कीमत के प्रस्ताव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। इस बीच, रूसी सैन्य निर्यात कंपनी रोसअबॉरोनएक्सपोर्ट के महानिदेशक अनातोली इसाइकिन ने कहा है कि युद्धपोत के दूसरे चरण के परीक्षण किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों के बाद विक्रमादित्य सेवमाश के अड्डे पर लौट आएगा। उसके बाद सौ विशेषज्ञों वाला रूसी-भारतीय संयुक्त आयोग परीक्षणों पर फैसला सुनाएगा। आयोग के निष्कर्ष के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा। गोर्शकोव सौदे में तारीखें ही नहीं, इसकी कीमत भी बदल चुकी है। 2004 में हुए खरीद सौदे के तहत यह पोत भारत को 2008 में मिलना था और इसे 2009 तक नौसेना में शुमार होना था। करार के वक्त इसकी कीमत 94 करोड़ 70 डॉलर तय हुई थी। लेकिन, दो बार डिलीवरी में देरी होने से इसकी लागत बढ़कर 2.3 अरब पहुंच चुकी है। गौरतलब है कि भारतीय रक्षा सेनाओं के बेड़े में मौजूद रूसी सैन्य उपकरणों के स्पेयर पा‌र्ट्स की उपलब्धता और कीमत भी बड़ा मुद्दा रही है। रूस अपने उपकरणों की कीमत बढ़ाता रहा है।
Dainik Jagran  National Edition 3-10-2012 Suraksha Pej -6              


No comments:

Post a Comment