Monday, October 8, 2012

नौसेना ने किया ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण



पणजी (एजेंसी)। नौसेना ने अपनी ताकत में और इजाफा करते हुए गोवा तट पर एक युद्धपोत से 290 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम सुपरसोनिक क्र ूज मिसाइलब्रह्मोस
का सफल परीक्षण किया। इस क्र ूज मिसाइल का रविवार को सुबह गोवा तट से भारतीय नौसेना के निर्देशित मिसाइल फ्रि गेट आईएनएस तेग से प्रायोगिक परीक्षण किया गया जिसे हाल ही में रूस से लिया गया है ।’’ उन्होंने कहा कि बिना आयुध के दागी गई मिसाइल ने उच्च स्तर के कौशल का प्रदर्शन करते हुए लक्षित जहाज पर जबर्दस्त वार किया जिसमें आग लग गई। मिसाइल ने हमले के लिए सीधा रास्ता नहीं अपनाया और अपने लक्ष्य को तबाह करने से पहले यह इधर-उधर घूमी। इसकी इस क्षमता से लड़ाई के दौरान दुश्मन को भारतीय युद्धपोतों का पता लगाने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। रूस के यांतर शिपायार्ड में बनाए गए आईएनएस तेग ने पिछले साल नौसेना में शामिल किए जाने से पूर्व रूस में परीक्षण के दौरान सफलतापूर्वक मिसाइल दागी थी। नई तलवार श्रेणी के फ्रि गेट से मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद परियोजना 1135.6 के तहत रूसी नौसेना के लिए बनाए जा रहे समान युद्धपोतों पर तैनाती के लिए ब्रह्मोस का मामला और मजबूत हो गया है। दो अन्य युद्धपोतों आईएनएस तरकश और आईएनएस त्रकिंद को इस बेहद घातक मिसाइल से लैस किया जाएगा। रक्षा अधिकारियों ने बताया कि दो चरणों वाली इस मिसाइल का पहला चरण ठोस और दूसरा रैमजेट लिक्विड प्रोपेलेंट है। इस मिसाइल को पहले ही सेना और नौसेना में शामिल किया जा चुका है। आईएनएस राजपूत में तैनाती से ब्रह्मोस मिसाइल पण्राली के पहले संस्करण को भारतीय नौसेना में वर्ष 2005 में शामिल किया गया था और यह अब सेना की दो रेजिमेंटों में पूरी तरह से सक्रि य है। रक्षा मंत्रालय ने सेना को मिसाइल की तीसरे रेजिमेंट के लिए मंजूरी दे दी है जिसे अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया जाएगा। भारत-रूस के संयुक्त उपक्र म ब्रह्मोस का वायुसैनिक संस्करण और पनडुब्बी से दागे जाने वाले संस्करण का कार्य प्रगति पर है।
युद्धपोत आईएनएस तेग से 290 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का हुआ प्रायोगिक परीक्षण बिना आयुध के दागी गई मिसाइल ने उच्च स्तर के कौशल का प्रदर्शन करते हुए लक्षित जहाज पर किया जबर्दस्त वार मिसाइल ने हमले के लिए सीधा रास्ता नहीं अपनाया, अपने लक्ष्य को तबाह करने से पहले घूमी इधर-उधर

Rashtirya sahara National Edition 8-10-2012   Shuraksha 13

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