ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली चीन
के साथ 1962 में
हुए युद्ध के जख्मों को कुरेदने की कोशिशों के बीच भारत
ने दो टूक कहा है कि अब वक्त बदल चुका है और वह अपनी हर इंच जमीन की हिफाजत
में सक्षम है। इस युद्ध की 50वीं बरसी से पहले रक्षा मंत्री एके एंटनी
ने कहा
कि 2012 का
भारत पहले वाला नहीं है और उसकी क्षमताएं 1962 के
मुकाबले कहीं अधिक हैं। रक्षा मंत्री ने पूर्वोत्तर में सुरक्षा
ढांचे की मजबूती में अपेक्षा के मुकाबले कमी की बात
तो मानी, लेकिन
साथ ही कहा कि इसमें पहले के मुकाबले काफी सुधार आया है।
दो दिन बाद 1962 में
हुए चीनी हमले के पचास साल पूरे हो रहे हैं, जिसके
बाद से जम्मू-कश्मीर में 38 हजार
वर्ग किमी भारतीय भूमि चीन के कब्जे में है। इसके अलावा पाकिस्तान
ने तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत 5,180 वर्ग
किमी क्षेत्र की भारतीय जमीन भी चीन को दे रखी है।
अरुणाचल प्रदेश में 90 हजार
वर्ग किमी भारतीय भूमि पर भी चीन अपना अवैध दावा करता है। सैन्य
कमांडरों की बैठक के बाद मीडिया के सवालों से रूबरू एंटनी
ने कहा कि पूर्वोत्तर में ढांचागत विस्तार पर पहले माकूल ध्यान नहीं दिया
गया था, लेकिन
अब तेजी से सुरक्षा ढांचे, साधनों
व संख्याबल का विस्तार
हो रहा है। एंटनी ने जोर देकर कहा कि हम चीन के साथ लंबित मामलों को
सुलझाने के लिए बातचीत करने के साथ ही अपनी सेनाओं को बेहतरीन शस्त्रास्त्रों
व साधनों से लैस करने पर भी ध्यान देते रहेंगे। चीनी हैकरों की
सेंधमारी को लेकर दुनियाभर में उठ रही चिंताओं के बीच साइबर सुरक्षा इंतजामों
के बारे में पूछे जाने पर रक्षा मंत्री का कहना था कि इस मोर्चे पर
शुरुआती देर के बावजूद सुरक्षा तंत्र मजबूत बनाने का काम तेजी से हो रहा है।
सैन्य कमांडरों की हर साल दो बार होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में प्राथमिकताओं
से जुड़े एक सवाल पर एंटनी ने स्पष्ट किया कि इसमें सेनाओं की खामियों
की समीक्षा कर उनके समाधान तलाशने पर जोर होता है।
Dainik Jagran National Edition 19-10-2012 Suraksha Pej-6
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