ठ्ठसुमन सेमवाल, देहरादून अंडमान
निकोबार द्वीप समूह की कैंपबेल खाड़ी में हाल ही में खोला गया भारतीय
नौसेना का पहला एयर स्टेशन समुद्री क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल का जवाब
है। यह क्षेत्र उस मलक्का स्ट्रेट्स से महज 75 मील की समुद्री दूरी पर
है, जिस
रास्ते चीन अपना 80 फीसदी
तेल गल्फ देशों से लेकर आता है। इसका मकसद देहरादून में चल
रहे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानचित्रकारी सम्मेलन में सार्वजनिक
हुआ। नौसेनाध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी समेत चीफ हाइड्रोग्राफर व वाइस
एडमिरल एसके झा ने माना कि समुद्री सीमा विवाद पर मजबूत नियंत्रण के लिए
मलक्का क्षेत्र के पास एयर स्टेशन की स्थापना जरूरी थी। जानकारी के मुताबिक
एयर स्टेशन में सबसे बड़े जहाज सी-17 ग्लोबमास्टर को रखा
जाएगा। चीन
ने कुछ समय पहले विवादित दक्षिण चीन सागर में योंगशिंग द्वीप पर सांशा नामक
शहर को सैन्य अड्डे के रूप में स्थापित किया। इसके बाद से ही समुद्र तटीय
देशों में चिंता बढ़ने लगी। ये वह देश हैं जिनके साथ भारत का सहयोग रहता
है। अप्रत्यक्ष ही सही, पर
विवाद की इस स्थिति से भारतीय नौसेना भी चिंतित है, क्योंकि
भारतीय समुद्री सीमा क्षेत्रों में भी चीन की गतिविधियां
सामने आती रही हैं। चीन की ओर से उपजे किसी भी विवाद पर अपना प्रभावशाली
असर छोड़ने के लिए किसी ऐसे स्थान पर एयर स्टेशन स्थापित करना जरूरी
है, जहां
से खासतौर पर चीन और उसके जहाजों पर नजर रखी जा सके। चीफ हाइड्रोग्राफर
वाइस एडमिरल एसके झा ने बताया कि इसके लिए अंडमान निकोबार द्वीप
समूह की कैंपबेल खाड़ी सबसे उपयुक्त जगह थी। वाइस एडमिरल झा के मुताबिक
एयर स्टेशन में रनवे को विस्तार दिया जा रहा है। ताकि यहां हरक्युलिस
व सी-17 ग्लोबमास्टर
जैसे विशाल एयर क्राफ्ट को रखा जा सके। चार इंजन वाला ग्लोबमास्टर
2400 मील
समुद्री दूरी तक कार्रवाई में सक्षम है। साफ है कि दक्षिण चीन
सागर विवाद में भले ही चीन ने अमेरिका की बात को दरकिनार
कर दिया, लेकिन
भारत की किसी भी राय को उसे गंभीरता से लेना पड़ेगा।
नौसेनाध्यक्ष एडमिरल डीके जोशी के मुताबिक एक साल के भीतर यहां से बड़े एयर
क्राफ्ट से निगरानी शुरू कर दी जाएगी। इससे निश्चय ही देश की समुद्री
सुरक्षा बेहद मजबूत हो जाएगी।
Dainik Jagran National Edition, 13-10-2012 lqj{kk Pej-5
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