Monday, October 8, 2012

आपदा प्रबंधन में भी माहिर हैं वायु सैनिक





नई दिल्ली (एजेंसी)। असम की बाढ़ सिक्किम के भूकंप, दक्षिण भारत में सुनामी, उत्तराखंड में बादल का फटना, कश्मीर में आया बर्फीला सैलाब जैसी आपदाओं में वायु सेना के राहत कायरे ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय वायु सैनिक वायु सीमाओं के साथ-साथ आपदा प्रबंधन में भी माहिर हो गए है। पिछले रविवार से असम में ब्रहमपुत्र की बाढ़ में बहकर कीचड़ से भरी दुर्गम जगह पर फंसे एक गैंडे को बचाने के लिए भी वायुसेना के जवान लगातार कोशिश में जुटे हैं। किसी आपदा के समय वायुसेना की मदद की सिफारिश राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से रक्षा मंत्रालय से की जाती है। आपदा प्रबंधन और बचाव कायरें में वायुसेना की भूमिका की सराहना करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रि या बल के उप महा निरीक्षक जेके एस रावत कहते हैं कि किसी आपदा में राहत या बचाव कार्य के लिए जब भी वायुसेना से सहयोग मांगा है कभी मना नहीं किया खराब मौसम या दुर्गम इलाकों के बावजूद वायुसेना ने हमारा साथ दिया है। वायुसेना के जवानों का हौंसला वाकई काबिल ए तारीफ है।भारतीय वायुसेना का काम देश की वायुसीमाओं की सुरक्षा और अन्य रक्षा बलों को सहयोग देना तो है ही लेकिन आपदा के समय ये विभिन्न संस्थाओं के साथ तालमेल बैठाकर दुर्गम इलाकों में तुरंत राहत पहुंचाने में एक अहम भूमिका भी निभाती है। भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘किसी भी आपदा की स्थिति में मदद की मांग किए जाने पर वायुसेना पूरे साजो सामान के साथ जुट जाती है। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य के साथ जुटे रहना भारतीय वायुसेना के जवान अच्छी तरह जानते हैं।’’ आपदा के दौरान हुई क्षति और मौजूदा स्थिति को देखते हुए ही वायुसेना अपनी योजना तैयार करती है। उसका उद्देश्य होता है कि किसी हादसे में होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके। राहत कायरें में इस्तेमाल किए जाने वाले विमानों की भी प्रकृति अलग-अलग अभियानों में अलग-अलग हो सकती है। किसी इलाके में भोजन और अन्य राहत सामग्री गिराने के लिए जहां हेलीकॉप्टरों का प्रयोग किया जाता है, वहीं बहुत से लोगों को किसी स्थान से सुरक्षित निकालने या चिकित्सीय सुविधाएं पहुंचाने के लिए कुछ बड़े विमानों का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा नहीं है कि वायुसेना में जवानों को सिर्फ लड़ाकू विमान उड़ाना और हवाई हमले करना ही सिखाया जाता है। यहां पर उन्हें विभिन्न प्राकृतिक या मानवीय आपदाओं के दौरान राहत पहुंचाने का भी बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। किसी भी स्थिति में हार न मानने की कसम खाकर निकले ये जवान अक्सर विपरीत परिस्थितियों को भी अपने हिसाब से ढाल लेते हैं। एक ऐसा वाकया बीते महीने असम और अरूणाचल प्रदेश में आई बाढ़ का ही है, जब भारी बारिश में पूरा हैलीपैड बह जाने पर वायुसेना के जवानों ने असम के तिनसुकिया में राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास पर एक अस्थायी हैलीपैड का निर्माण कर लिया ताकि राहत कायरें में बाधा न आए। वायुसेना दिवस पर विशेष

Rashtirya sahara National Edition 8-10-2012   Shuraksha 13

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