ठ्ठ प्रणय उपाध्याय, नई
दिल्ली इस
साल की शुरुआत अग्नि-5 मिसाइल
के परीक्षण के साथ करने वाला भारत साल खत्म होने से अपने
मिसाइल तरकश में कई नए प्रक्षेपास्त्र जोड़ने की तैयारी कर
रहा है। अगले दो माह में जहां पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली लंबी दूरी की बैलेस्टिक
मिसाइल सागरिका के परीक्षण की तैयारी है, वहीं अभी तक काफी गोपनीय
रखी गई निर्भय क्रूज मिसाइल का भी परीक्षण कार्यक्रम है। इसके अलावा मिसाइल
हमले के खिलाफ एएडी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली का भी टेस्ट होना है। रक्षा
अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सूत्रों के मुताबिक, पानी
के नीचे
से प्रहार करने में सक्षम लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल का पहला परीक्षण
अगले माह संभव है। हालांकि संगठन ने इसकी रेंज का नाम का अभी नहीं खोला है।
डीआरडीओ की योजना स्वदेशी नाभिकीय पनडुब्बी अरिहंत को सागरिका से लैस
कर अगले दो सालों में नौसैनिक बेड़े में शामिल कराने की है। डीआरडीओ 750 किमी
क्षमता की के-15 और
3500 किमी
मारक क्षमता वाली के-4 मिसाइलों
पर भी
काम कर रहा है। भारत
के पास अभी तक पनडुब्बी से दागी जाने वाली लंबी दूरी की मिसाइल नहीं है, जबकि
अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन
व फ्रांस इस ताकत से लैस हैं। लिहाजा हिंद महासागर में
बड़ी ताकत के तौर पर दबदबा रखने की तैयारी कर रहे भारत के लिए
एसएलबीएम वक्त की जरूरत भी है और शक्ति प्रदर्शन की दरकार भी। इस
कड़ी में करीब दो हजार किमी तक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल
निर्भय का परीक्षण इसी माह संभव है। अमेरिकी टॉम हॉक मिसाइल का भारतीय
जवाब मानी जाने वाला निर्भय प्रक्षेपास्त्र आवाज से कम गति वाली एक सब
सोनिक क्रूज मिसाइल है जिसे सभी प्रकार के प्लेटफार्म (जल,थल,आकाश)
से दागा
जा सकेगा। इसे तीनों सेनाओं की जरूरतों के मद्देनजर तैयार किया गया है।
काफी गोपनीय रखी गई इस परियोजना का ही परिणाम है कि निर्भय मिसाइल की कोई
तस्वीर डीआरडीओ ने जारी नहीं की है। डीआरडीओ ने इस साल अप्रैल में अग्नि-5 मिसाइल
का परीक्षण किया था। वहीं अप्रैल के बाद से अब तक अग्नि-1, 3, 4 व
पृथ्वी श्रेणी प्रक्षेपास्त्रों के आधा दर्जन परीक्षण कर चुका है। पृथ्वी-2 का
सफल परीक्षण भारत
ने गुरुवार को परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम स्वदेशी पृथ्वी 2 मिसाइल
का सफल परीक्षण किया। सेना की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड ने 350 किमी
तक मार क्षमता वाली इस मिसाइल का ओडिशा तट पर स्थित चांदीपुर रेंज से परीक्षण
किया। रक्षा
मंत्रालय के मुताबिक, इस
परीक्षण के साथ स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड ने पृथ्वी व अग्नि
मिसाइल से सभी ऑपरेशनल संस्करणों का सफलतापूर्वक परीक्षण कर
लिया। सेना में पहले से मौजूद पृथ्वी-2 के ताजा परीक्षण के
दौरान उन्नत रडार
तंत्र व नौसैनिक युद्धपोतों के जरिए मिशन पैमानों का आकलन किया गया। मिसाइल
में सटीक मारक क्षमता के लिए अति उन्नत नेवीगेशन सिस्टम लगा है जिससे
यह अपने रास्ते से नहीं भटकती। रक्षा मंत्रालय ने पृथ्वी की वैज्ञानिक
टीम के एक सदस्य के हवाले से कहा, इस परीक्षण ने किसी भी स्थिति से
निपटने की तैयारियों को भी साबित किया है। ज्ञात हो, नौ
मीटर लंबी, एक
मीटर व्यास एवं दो इंजन वाले तरल ईधन संचालित पृथ्वी
2 मिसाइल
पारंपरिक एवं परमाणु दोनों तरह के हथियारों को ले जाने में सक्षम
है। समन्वित निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम के तहत तैयार किया जाने
वाला पृथ्वी पहली बैलिस्टिक मिसाइल है। यह मिसाइल 500 किलोग्राम का हथियार
ले जाने में सक्षम है।
Dainik Jagran National Edition 5-10-2012 Shuraksha PeJ-3
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