ठ्ठजागरण ब्यूरो, नई
दिल्ली सेना
के शीर्ष कमांडरों की यहां सोमवार से शुरू हुई बैठक में जम्मू-कश्मीर और
पूर्वोत्तर के सुरक्षा हालात की समीक्षा की गई। सीमा पर आतंकी सरगर्मियों
और पूर्वोत्तर में बीते दिनों अस्थिरता फैलाने की घटनाओं के मद्देनजर
सेना कमांडरों ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारियों
का जायजा लिया। सेना रक्षा तैयारियों में कोई कोताही नहीं रखना चाहती।
इस दौरान सेना में बीते दिनों यूनिट स्तर पर अधिकारियों व जवानों के बीच
तनाव के कारणों को दूर करने पर भी चर्चा हुई। सेना
मुख्यालय के अनुसार, बैठक
को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा
कि हर हाल में तैयारियों को चुस्त बनाए रखने की जरूरत है।
विकसित होती तकनीकों के जरिये सेना का आधुनिकीकरण किया जाएगा। उन्होंने इस
बात पर भी जोर दिया कि घाटी के सुरक्षा इंतजामों में किसी भी सूरत में कोई
ढील नहीं दी जा सकती। महत्वपूर्ण है कि हाल ही में सेनाध्यक्ष का बयान आया
था कि सीमा पार करीब 400 आतंकी
घुसपैठ की फिराक में बैठे हैं। वहीं, घाटी के दौरे के बाद
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे भी कह चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर
में सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून हटाने के हालात नहीं हैं। असम
दंगों के बाद हो रही सेना कमांडरों की बैठक में बांग्लादेशियों के भारत में
अवैध प्रवास तथा घुसपैठ के अलावा कई मुद्दों पर चर्चा हुई। सेना नेतृत्व
ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में उग्रवादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई के साथ
घुसपैठ व सीमा पर निगरानी के पुख्ता इंतजाम करने पर जोर दिया। बीते
छह महीनों के दौरान न्योमा, सांबा
जैसे स्थानों पर सैन्य यूनिटों में अधिकारियों व जवानों
के बीच उपजे तनाव की ओर इशारा करते हुए सेनाध्यक्ष ने कहा
कि सेना के मौलिक मूल्यों को बनाए रखने की जरूरत है। सेना में यूनिट स्तर
प्रबंधन, एकजुटता
व उच्च स्तरीय मनोबल पर जोर दिया जाना चाहिए। सितंबर में
सीमा पार से घुसपैठ के आंकड़े भी जारी हुए। इस दौरान घुसपैठ करने
वाले आतंकियों की आधिकारिक संख्या आठ बताई गई। इससे पहले
सेना से मिली जानकारी के आधार पर रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) ने दावा
किया था कि सितंबर में 18 आतंकी
घुसपैठ करने में कामयाब रहे। इन आंकड़ों को लेकर
खुफिया एजेंसियों, जम्मू-कश्मीर
की पुलिस और सेना के बीच मतभेद की खबरें आईं थीं।
Dainik Jagran
National Edition 16-10-2012 Shuraksha Pej-3
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